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चुनावी रण में साथ नहीं चलेंगे ट्रैक्टर-हाथी

Sun, 14 Sep 2014 05:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 14 Sep 2014 05:34 PM IST
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Haryana election: BSP and HJC will fight election separate

भाजपा से अलग होने के बाद हजकां के विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर लड़ने की योजना भी ध्वस्त हो गई है। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों के बीच आम सहमति न बन पाने से बसपा और हजकां अब अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरने जा रही हैं।

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बसपा ने चुनाव में परंपरागत वोटों के अलावा गैर जाट वोटों को अपने पक्ष में जुटाने के उद्देश्य से ट्रिपल-ट्वेंटी और डबल बी का नया फार्मूला तैयार किया है। वहीं, हजकां ने भी गैर जाट वोट के अलावा समाज के सभी वर्गों का समर्थन जुटाने के लिए प्रत्याशियों के चयन को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बसपा के रणनीतिकारों के मुताबिक पार्टी हरियाणा चुनाव के लिए सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला पर काम कर रही है।
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इसके तहत टिकट बंटवारे में समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाना है। इसके लिए ट्रिपल-20 और डबल-बी का फार्मूला तैयार किया गया है। ‘ट्रिपल-20 कोटे के तहत टिकट वितरण में ब्राह्मण, दलित और पिछड़ी जातियों की हिस्सेदारी 20-20 फीसदी होगी यानी 60 फीसदी टिकट इन तीनों जातियों में बराबर-बराबर बांटे जाएंगे।
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बसपा को तीस सीटें देने की पेशकश

Haryana election: BSP and HJC will fight election separate

शेष बची सीटों को डबल बी फार्मूले के तहत ब्राह्मण और वैश्य जातियों में बराबर-बराबर हिस्सेदारी दी जाएगी। टिकट वितरण के इस फार्मूले में पार्टी अपने पंरपरागत दलित वोट बैंक का भी खास ख्याल रख रखेगी।

पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने मुख्यमंत्री के साथ 13 सीटों के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान पहले ही कर चुकी है। अगले एक सप्ताह में पार्टी बची हुई 77 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर देगी। दूसरी ओर, हजकां ने भी सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों के चयन को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता देवीलाल के मुताबिक चुनाव मैदान में हजकां और बसपा के साथ मिलकर उतरने की संभावना खत्म हो चुकी है। हालांकि, गठबंधन के लिए हजकां ने अपनी ओर से सभी कोशिशें कर ली हैं। इसके बावजूद बात नहीं बन पाई है। उन्होंने बताया कि हजकां ने बसपा को तीस सीटें देने की पेशकश की थी, लेकिन बसपा 45 सीटों से कम पर तैयार नहीं है।

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