टिकट के दावेदारों से बोले तंवर, अभी भी वक्त है सुधर जाओ, विस में इससे बड़ी हार भी संभव
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लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पहली बार फतेहाबाद पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने टिकट के दावेदारों को नसीहत दी है कि अभी भी वक्त हैं कि वो गंभीरता से काम करना शुरू कर दें अन्यथा फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों में 76 हजार वोटों से कांग्रेस की हार हुई थी ये आंकड़ा अगले विधानसभा चुनाव में बढ़ भी सकता है।
भूना रोड पर स्थित एक पैलेस में कांग्रेस सम्मेलन में एक बार फिर हुड्डा गुट के नेताओं ने दूरी बना ली। इस बैठक में टोहाना से परमवीर सिंह, रतिया से जरनैल सिंह और फतेहाबाद से प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा शामिल नहीं हुए ।
ये तीनों ही नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के माने जाते हैं। जबकि दुड़ाराम, कुलबीर बैनीवाल, कृष्णा पूनियां सहित कई टिकट के दावेदार बैठक में तंवर के साथ नजर आए। बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया सचिव विनीत पूनिया ने वर्करों में जोश जरूर भरने का प्रयास किया।
इस बैठक में आम कांग्रेसी वर्करों ने दिल की भड़ास निकाली। कई लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि लोकसभा चुनावों में उन्हें वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई रास्ता ही नहीं दिखाया गया जिसके चलते उनमें से अधिकतर को पता ही नहीं था कि उन्हें आखिर करना क्या था।
इसी तरह से एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि कहने को सभी वरिष्ठ नेता एकजुटता का दावा करते रहे लेकिन किसी ने भी अपने समर्थकों को गंभीरता से मेहनत करने का संदेश तक नहीं दिया। ये बैठक हार के कारणों की समीक्षा करने के लिए बुलाई थी जिसके चलते मीडिया को इस बैठक से दूर रखा गया।
जिले से सवा लाख की लीड ने टिकटार्थियों के चेहरे लटकाए
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को फतेहाबाद विस से 76 हजार, रतिया से 40 एवं टोहाना से 8 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। जिले में सवा लाख वोटों की हार के बाद विस चुनावों को लेकर टिकटार्थियों के चेहरे लटक गए हैं।
कांग्रेस बैठक में मंच पर तीनों विधानसभा क्षेत्रों के टिकट के दावेदार मौजूद रहे। मंच पर फतेहाबाद विस से दावेदार दुड़ाराम, कुलबीर बैनीवाल, कृष्णा पूनियां, रतिया से राम स्वरूप रामा, मंगतराम लालवास और टोहाना से देवेंद्र सिंह बबली मौजूद रहे।
लोकसभा चुनावों के दौरान गुटबाजी से दूर रहने का संदेश देते हुए कांग्रेस नेताओं ने एकजुटता का परिचय दिया था। हुड्डा गुट के माने जाने वाले प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, रतिया से जरनैल सिंह व टोहाना से परमवीर सिंह ने भी तंवर के लिए प्रचार किया। हार के तुरंत बाद समीक्षा बैठक में नहीं पहुंचकर हुड्डा गुट ने साफ कर दिया है कि अब वो तंवर के साथ कदमताल नहीं कर सकते।