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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana : CM Manohar lal speaks on DGP Manoj Yadav tenure

हरियाणा डीजीपी पद पर रार : अनिल विज ने नामों का पैनल बनवाया, मनोहर लाल बोले-थोड़ी गलतफहमी है, दूर कर लेंगे 

Mon, 01 Mar 2021 10:42 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 01 Mar 2021 10:42 AM IST
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Haryana : CM Manohar lal speaks on DGP Manoj Yadav tenure
हरियाणा में डीजीपी के नाम पर बढ़ सकती है तनातनी - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में डीजीपी मनोज यादव को बदलने पर तनातनी बढ़ने के पूरे आसार बन गए हैं। गृहमंत्री अनिल विज के निर्देश पर नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए नामों का पैनल तैयार हो चुका है वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल पुलिस मनोज यादव को बदलने के मूड में नहीं हैं। मनोहर लाल ने कहा कि डीजीपी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में एब्जार्ब हो चुके थे। उन्हें हमने केंद्र सरकार से हरियाणा में नियुक्ति के लिए मांगा है। ऐसे में डीजीपी मनोज यादव की कुर्सी मजबूत हो गई है। 

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पिछले कुछ दिनों से डीजीपी की नियुक्ति को लेकर विवाद चल रहा है। दरअसल गृहमंत्री अनिल विज नहीं चाहते हैं कि यादव डीजीपी रहें। उन्होंने नए डीजीपी के लिए पैनल तैयार करने के आदेश दे दिए थे। पैनल तैयार भी हो गया है, लेकिन फाइल आगे नहीं खिसक रही है। अब सीएम ने कहा कि इस मामले को लेकर थोड़ी गलतफहमी है जिसे दूर कर लिया जाएगा। 
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इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रमुख सचिव राजेश खुल्लर की नियुक्ति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस समय राजेश खुल्लर को प्रधान सचिव बनाया गया था। उस समय वह केंद्र सरकार में नियुक्त थे। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से उन्होंने कहा कि राजेश खुल्लर को वापस हरियाणा ले जाना चाहता हूं। उस समय खुल्लर की प्रतिनियुक्ति का समय बाकी था, लेकिन जेटली की सहमति से मैं उन्हें हरियाणा ले आया। 

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हार्डकोर ऑफ आईबी है सही शब्द
केंद्र में एब्जार्ब को यदि तकनीकी तौर पर जानना हो तो उसके लिए हार्डकोर ऑफ आईबी सटीक शब्द है। डीजीपी मनोज यादव की अधिकतम सेवा आईबी में पूरी हुई है। यादव का रिटायरमेंट 2025 में है। उससे पहले उनका आईबी में वापस जाना जरूरी है, लेकिन यह प्रदेश सरकार पर है कि वे यादव को कब वापस भेजें।

यह थी यादव की नियुक्ति की प्रक्रिया
मनोज यादव को हरियाणा में डीजीपी नियुक्त करने से पहले हरियाणा सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखा था कि उन्हें उनके मूल कैडर में भेज दिया जाए। केंद्र ने उन्हें कुछ समय के लिए हरियाणा सरकार में सेवाएं देने की अनुमति के साथ भेजा था। जिसमें सेवा का न्यूनतम समय दो वर्ष है। अधिकतम 2025 से पहले कभी भी हो सकता है।

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