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अप्रवासियों पर हरियाणा के सीएम खट्टर का बयान, बोले- केंद्र सरकार लेगी फैसला, फिर हम देखेंगे

Tue, 07 Aug 2018 12:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 07 Aug 2018 12:10 PM IST
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Haryana CM Manohar Lal Khattar Statement on Illegal Immigrants
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
देश भर में छाए अप्रवासियों के मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का बयान सामने आया है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर पहले केंद्र सरकार द्वारा फैसला लिया जाना है। उसके बाद राज्य सरकार एक्शन लेगी। केंद्र सरकार जैसे निर्देश जारी करेगी, उसी के अनुसार इस मुद्दे का हल निकाला जाएगा। वैसे भी अप्रवासियों का पंजीकरण केंद्र स्तर पर ही किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह बयान तब दिया, जब उनसे राज्य में अप्रवासी लोगों को लेकर सवाल पूछा गया।
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क्या है एनआरसी का मुद्दा

Haryana CM Manohar Lal Khattar Statement on Illegal Immigrants
NRC
30 जुलाई को शीर्ष न्यायालय की निगरानी में 30 जुलाई को असम में एनआरसी का दूसरा अंतिम मसौदा जारी किया गया था। इसमें 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं है, जिसके बाद से काफी विवाद  हो रहा है। असम में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के लिए योग्य पाया गया, जबकि 40 लाख लोगों का नाम इस लिस्ट में नहीं था।

बता दें कि इस लिस्ट में उन सभी भारतीय नागरिकों को शामिल किया गया, जो राज्य में 25 मार्च, 1971 के पहले से निवास करते थे। अब इस मुद्दे पर विपक्षी दल सरकार को घेरने में जुटे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि जिनका नाम लिस्ट में नहीं है, उन्हें एक बार फिर से दावा पेश करने का मौका दिया जाएगा। जिसके बाद संशोधित लिस्ट जारी की जाएगी।

देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है। असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से अलग है। यहां असम समझौता 1985 से लागू है और इस समझौते के मुताबिक, 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा।

विपक्ष का आरोप
विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार ने जानबूझकर अल्पसंख्यकों, बंगालियों और अन्य लोगों को इस लिस्ट में से बाहर कर दिया है। हालांकि सरकार ने विपक्षी दलों पर बांग्लादेशियों घुसपैठियों का साथ देने का आरोप लगाया है। सरकार ने कहा है कि किसी भी भारतीय को एनआरसी की लिस्ट से बाहर नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के अलावा लिस्ट में अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हैं, ऐसे में विपक्ष का आरोप निराधार है।
 
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