ये होंगे खट्टर मंत्रिमंडल के संभावित चेहरे
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हरियाणा में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के साथ ही पहले दिन आधा दर्जन मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। इस मंत्रिमंडल में वे सभी नाम शामिल हो सकते हैं, जिन्हें मंत्री पद से ही हरियाणा सरकार में संतोष करना पड़ेगा। अभी तक यह लोग मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल थे। जिसमें अनिल विज, कैप्टन अभिमन्यु, ओम प्रकाश धनखड़ और रामबिलास शर्मा सहित अन्य नाम शामिल हैं।
कविता जैन और कंवर पाल गुर्जर को भी अहम पद मिलने की संभावना है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा अध्यक्ष बनाने की होगी। सदन को चलाने के लिए एक अनुभवी नेता को अध्यक्ष बनाना होगा। हरियाणा में पार्टी के पास बढ़िया नेता तो हैं, लेकिन अधिकतर अब मंत्री पद की चाह रखेंगे।
बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को मिलेगा पद
उचाना से पहली बार विधायक बन कर विधानसभा तक पहुंची बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को भी पार्टी कुछ जिम्मेदारी देगी। हालांकि दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि बीरेंद्र सिंह को केंद्र में मंत्रिपद दिया जाए। जातीय समीकरणों के हिसाब से अन्य सभी समीकरणों को भी ध्यान में रखना होगा।
जिसमें सिख कोटे से असंध से विधायक बख्शीश सिंह, वैश्य समुदाय से फरीदाबाद से विपुल गोयल, बड़खल से सीमा त्रिखा, अहिरवाल से राव नरवीर सिंह और दलित समुदाय से संतोष सारवान के नाम की भी चर्चा है।
ये होंगे मंत्री और उनके संभावित विभाग
करनाल से बीजेपी विधायक मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के अगले मुख्यमंत्री होंगे। चंडीगढ़ में केंद्रीय पर्यवेक्षकों वेंकैया नायडू और दिनेश शर्मा की मौजूदगी में विधायक दल की मीटिंग में ये फैसला हुआ।
बताया जा रहा है कि नए सीएम के नए सिपहसिलारों के नाम भी तय कर लिए गए हैं, लेकिन अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक उनके कैबिनेट के चेहरे इस प्रकार होंगे...
मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री और गृह विभाग
राम बिलास शर्मा, सिंचाई एवं बिजली विभाग
अनिल विज, एक्साइज एवं टेक्सेशन विभाग
कैप्टर अभिमन्यू, वित्त विभाग
विपुल गोयल, इंडस्ट्रीज, माइन्स एवं कॉमर्स विभाग
राव नरबीर सिंह, विकास एवं पंचायती राज विभाग
कविता जैन, शिक्षा और महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग
प्रेमलता सिंह, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग
सुभाष सुधा, स्थनीय निकाय विभाग
सीपीएस- सुखविंद्र श्यौराण, सीमा त्रिखा, डॉ. कमल गुप्ता
उत्तर हरियाणा में बीजेपी का दबदबा
60 साल के खट्टर ने पहली बार हरियाणा के करनाल से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उत्तर हरियाणा में कुल 27 सीटें थीं। सभी सीटें भाजपा के खाते में जाने के बाद ये तो तय था कि नए मुख्यमंत्री उत्तर हरियाणा के होंगे, इसलिए खट्टर का नाम आगे चल रहा था।
चुनाव से पहले से ही भाजपाइयों की ये मांग थी कि अगर उत्तर हरियाणा की 27 में से 24 सीटें भी भाजपा निकाल जाती है तो मुख्यमंत्री उत्तर हरियाणा का ही हो, इसके लिए मोदी और अमित शाह के सामने प्रमुखता से मुद्दा उठाया जाएगा। अब तो 27 की 27 सीटें भाजपा की झोली में आ गईं, इसलिए इनके नाम पर कोई संदेह ही नहीं था।
मोदी और शाह के करीबी
संघ के प्रचारक और फिर प्रदेश के संगठन मंत्री रह चुके खट्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद हैं। 60 साल के खट्टर का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबियों में शुमार है।
इसकी मुख्य वजह ये है कि 90 के दशक में जब मोदी हरियाणा के प्रभारी थे, तब खट्टर प्रदेश बीजेपी में संगठन मंत्री थे। जब मोदी हिमाचल के भाजपा प्रभारी थे तो खट्टर को वहां का सहप्रभारी बनाया गया था।
खट्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से करीब 34 साल और भाजपा से 20 वर्षों से जुड़े हैं। वे हरियाणा में भाजपा के संगठनात्मक सचिव रह चुके हैं।
मोदी के कहने पर वाराणसी भी गए थे खट्टर
1996 में नरेंद्र मोदी और खट्टर हरियाणा में साथ काम कर चुके हैं। मोदी खट्टर पर पूरा भरोसा जताते रहे हैं। भुज में भूकंप त्रासदी से उबरने के लिए मोदी ने खासतौर पर खट्टर को कच्छ बुलाया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में जब मोदी वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे थे, खट्टर को 50 वार्ड की जिम्मेदारी दी गई थी। हरियाणा विस चुनाव में भी मोदी ने खट्टर पर भरोसा जताया जिसपर वे खरे भी उतरे, राज्य में चार सीटों वाली भाजपा को खट्टर ने 47 सीटों के साथ बहुमत दिलाया।
गैर जाट चेहरा हैं खट्टर
बीजेपी पर गैर-जाट को राज्य में मुख्यमंत्री बनाने का काफी दबाव था। गैर-जाटों ने बड़े पैमाने पर बीजेपी को वोट भी किया था। खट्टर के चुनाव में यह फैक्टर भी अहम रहा।
अगर वह सरकार की कमान संभालते हैं तो राज्य में पंजाबी समुदाय से आने वाले पहले मुख्यमंत्री होंगे। पंजाबी समुदाय से होने के नाते दिल्ली और पंजाब में भी पार्टी को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। हरियाणा में इस बिरादरी का वोट करीब 8 फीसदी है।
जाट नेता को बनाएंगे नंबर दो
एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक हरियाणा में गैर जाट-मतों के पार्टी के पक्ष में हुए ध्रुवीकरण के बाद आलाकमान ने जाट वर्ग से मुख्यमंत्री नहीं बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, जाट समुदाय को लुभाने के लिए सरकार में कैप्टन अभिमन्यु को नंबर दो की हैसियत दी जा सकती है।
अभिमन्यु पहली बार नारनौंद से विधायक चुने गए हुए हैं और मुख्यमंत्री के दावेदार थे। हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में प्रभावी जाट समुदाय को साधने के लिए दिवाली के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में होने वाले विस्तार में किसी जाट को मंत्री बनाया जा सकता है।