कैबिनेट मीटिंग में आज हरियाणा सरकार ले सकती है 134 ए पर अहम फैसला
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा शुक्रवार को बुलाई गई कैबिनेट की बैठक में अन्य मुद्दों के साथ-साथ नियम 134ए पर सरकार कोई अहम फैसला ले सकती है। इस बात के संकेत मुख्यमंत्री द्वारा बुधवार को पानीपत में दो जमा पांच जनमुद्दे के पदाधिकारियों से हुई बातचीत के दौरान 134ए पर व्यक्त किए विचारों से मिले हैं।
मुख्यमंत्री का कहना है कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को 134ए के फंदे में फंसाया है। निजी स्कूलों द्वारा आरटीई लागू किए जाने की मांग और 134ए के तहत प्रत्येक गरीब बच्चे के लिए 2300 रुपये प्रति माह मांगे जाने के कारण इस पूरे मामले का कोई हल नहीं निकल पा रहा है। माना जा रहा है कि कैबिनेट की बैठक में सरकार पुन: आरटीई लागू किए जाने पर विचार कर सकती है, जिसके तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर निशुल्क दाखिला दिया जाना है और इसके लिए निजी स्कूलों के लिए अनुदान पहले से तय है।
नए-नए नियम बनाकर रोड़े अटकाने का आरोप
हरियाणा के निजी स्कूलों में नियम 134ए के तहत गरीब बच्चों को दूसरी से आठवीं और नौवीं से बारहवीं तक दाखिला दिलाने को लेकर विभिन्न जिलों में डीईओ और बीईओ कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन जारी है। शिक्षा विभाग पर जहां गरीब बच्चों के दाखिले में नए-नए नियम बनाकर रोड़े अटकाने का आरोप लग रहा है, वहीं निजी स्कूल भी विभिन्न मुद्दे उठाकर दाखिलों में आनाकानी कर रहे हैं। इस सबके बीच, खास बात यह भी है कि प्रदेश के निजी स्कूलों में नियम 134ए के तहत जितनी सीटें गरीब बच्चों के लिए उपलब्ध हैं, उनके मुकाबले आधे आवेदन भी नहीं आए हैं।
प्रदेश में 4800 निजी स्कूलों में 28 लाख सीटें हैं, जिनमें 134ए के तहत 2 लाख 80 हजार सीटें पर गरीब बच्चों का हक बनता है। लेकिन नए सत्र के लिए केवल 68000 आवेदन ही पहुंचे हैं। हालांकि दाखिला आवेदनों में कमी के लिए संबंधित इलाकों में तहसीलदारों को दोषी ठहराया जा रहा है। दस जमा दो मुद्दे जन आंदोलन के अध्यक्ष सत्यवीर हुड्डा का आरोप है कि आवेदन के लिए तहसीलदार द्वारा जारी सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया था, जिसे बनाने में ज्यादातर तहसीलदारों ने टालमटोल किया और दाखिले की तिथि तक कई लोगों को सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किए। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग इस मामले में खामोश है।
निजी स्कूलों की मांग, 134ए हटाकर आरटीई लागू करो
अब तक प्रत्येक गरीब बच्चे की पढ़ाई के एवज में 2300 रुपये प्रति माह दिए जाने की मांग कर रहे निजी स्कूलों ने अब नई मांग शुरू कर दी है। प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने मांग की है कि नियम 134ए के कारण उत्पन्न समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब इस नियम को हटाकर राइट टू एजुकेशन (आरटीई) का नियम लागू कर दिया जाए।
वीरवार को कुंडू ने बयान जारी कर कहा कि एक तरफ तो सरकार 134ए नियम को खत्म नहीं करना चाहती और दूसरी ओर इस नियम के तहत 10 फीसदी गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल के समान पैसा भी नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब बच्चों को केवल 200-400 रुपए प्राइवेट स्कूलों को देकर पढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह खर्च उठाने में असमर्थ है तो 134ए को खत्म कर आईटीई लागू करे, जिसके तहत 25 प्रतिशत बच्चों को फ्री एडमिशन देने का प्रावधान है और यह पूरे देश में लागू है। कुंडू ने कहा कि अगर सरकार गरीब बच्चों को 2300 रुपए महीना देने के लिए तैयार है तो प्राइवेट स्कूल भी गरीब बच्चों को एडमिशन देने के लिए तैयार हैं।
निजी स्कूलों का सिलेबस भी निजी, गरीब मेधावी कैसे ढूंढे
शिक्षा विभाग की ओर से इस साल 134ए के तहत दाखिले के लिए नई शर्त लागू की गई है, जिसके तहत गरीब बच्चों को दाखिले से पहले उनमें से मेधावी बच्चों को तरजीह दी जाएगी। मेधावी छात्र चुनने के लिए पिछली कक्षा में चार माह तक संबंधित बच्चे ने मासिक टेस्ट में 50 फीसदी अंक अवश्य लिए हों। यह शर्त दूसरी से आठवीं और अब नौवीं से बारहवीं तक दाखिला पाने वाले सभी गरीब बच्चों पर लागू की गई है।
इस फैसले पर दस जमा दो मुद्दे जन आंदोलन और ईडब्लूएस अभिभावक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सभी निजी स्कूलों का अपना-अपना सेलेबस है। यह शर्म की बात है कि कोई स्कूल सीबीएसई जैसे राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पर चलने को तैयार नहीं है। इसके चलते जो विद्यार्थी सरकारी स्कूल में पढ़कर नौंवी कक्षा में निजी स्कूल में जाना चाहेगा, वह नए पाठ्यक्त्रस्म से तालमेल नहीं बैठा सकेगा। इस तरह गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिला नहीं देना आसान हो जाएगा। सत्यवीर हुड्डा ने कहा कि शिक्षा विभाग पिछले साल की तरह गरीबों का दाखिला रोकने की चालें चल रहा हैं। अगर विभाग का यही रवैया रहा तो उसे इस बार भी हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। भारत भूषण बंसल ने मांग की है कि विभाग ईमानदारी से सभी गरीब बच्चों को दाखिला दिलाए।