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किसान आंदोलन: हरियाणा भाजपा अध्यक्ष बोले-आंदोलन करना बड़ी बात नहीं, समय रहते लौटाना भी चाहिए

Thu, 22 Apr 2021 01:11 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 22 Apr 2021 01:11 PM IST
सार

केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कर लौटे ओम प्रकाश धनखड़ ने अमर उजाला से वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से विशेष बातचीत की।
 

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Haryana BJP President Om Parkash Dhankar express views on Kisan Andolan 
ओमप्रकाश धनखड़। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने एक बार फिर किसान आंदोलन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि को लेकर हुए आंदोलन का भी हल निकला। आंदोलन गांधी जी ने भी किया, वह भी समाप्त हुआ। आंदोलन खड़ा करना बड़ी बात नहीं है, समय पर आंदोलन को लौटाना भी चाहिए। आंदोलन में शामिल कुछ तथाकथित लोग बातचीत सिरे नहीं चढ़ने दे रहे। लेकिन सरकार को आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोगों के परिवारों की चिंता सता रही है। हम कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहे हैं, लिहाजा यह मामला निपटना चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कर लौटे ओम प्रकाश धनखड़ ने अमर उजाला से वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से विशेष बातचीत की।
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प्रश्न: समय बढ़ता जा रहा है किसानों के साथ बातचीत सिरे क्यों नहीं चढ़ पा रही है
उत्तर:
अब तक 11 बार बातचीत हुई है। जब जत्थेबंदियां कृषि कानूनों में सुधार चाहती थीं, उस समय अडानी और अंबानी पर शंका व्यक्त की थी, लेकिन अब नहीं बोलते हैं। धारा-8 ए में साफ लिखा है कि जमीन कोई नहीं ले सकता। धारा-15 में स्पष्ट है कि किसी कारण से किसान डिफाल्टर हो जाए तो उसकी जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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प्रश्न: बात होती है, फिर अड़चन क्या है
उत्तर:
बिल से अलग किसानों की तीन बातें हैं। किसान चाहते हैं कि बिजली और पराली को लेकर बनाए नियमों में ढील दी जाए। साथ ही एमएसपी की शर्तों में सुधार चाहते हैं। सरकार किसानों से अलग नहीं है। किसानों के हित को देखते हुए जो भी उचित होगा वह किया जाएगा, लेकिन अब आंदोलन को आगे बढ़ाने का कोई फायदा नहीं है।
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अभी तक जो बातचीत हुई वो निरर्थक क्यों रही

सरकार ने कहा कि कृषि कानूनों को डेढ़ साल निलंबित कर देते हैं। मंडियों का नियंत्रण भी राज्य सरकारों का विषय होगा। इतनी बातचीत के बाद तो जत्थेबंदियों को खुशी के साथ लौटना चाहिए था। कुछ संगठन समाधान चाहते हैं, लेकिन वामपंथी संगठन आंदोलन खत्म नहीं करना चाहते।

प्रश्न: पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलन में ज्यादा हैं, ऐसा क्यों
उत्तर:
बिक्री योग्य जो अनाज होता है उसमें सबसे ज्यादा खरीद हरियाणा पंजाब से होती है। पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी आगे बढ़ रहे हैं। छह साल में भंडारण का बजट बढ़ गया है। मनमोहन सरकार में 98 हजार करोड़ की खरीद होती थी। अब यह बजट ढाई लाख करोड़ हो चुका है। इसमें हरियाणा-पंजाब का करीब एक लाख करोड़ का हिस्सा है।
 

जब किसान नहीं मान रहे तो सरकार बात क्यों नहीं मान लेती

करीब 30 हजार करोड़ का बजट हरियाणा और 60 हजार करोड़ पंजाब पर खरीद के दौरान खर्च होता है। सभी फसलों की एमएसपी की गारंटी के लिए देश में 17 लाख करोड़ का बजट चाहिए। जबकि देश का कुल बजट 35 लाख करोड़ का है।

प्रश्न: आप ने किसानों के लिए क्या किया, केंद्र के सामने क्या बात की
उत्तर:
मैं केंद्रीय कृषि मंत्री से मिला तो उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी कई बार बातचीत करवा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री भी पत्र लिख चुके हैं। हमारा आग्रह सर्वाधिक रहा है, क्योंकि आंदोलन की भूमि हरियाणा  है।

प्रश्न: पंजाब में चुनाव आ रहा है और किसान नाराज हैं
 उत्तर:
चुनाव के समय जो मुद्दे होंगे उसके हिसाब से रणनीति तय होगी। यह केंद्र का नेतृत्व तय करेगा कि पंजाब चुनाव कैसे लड़ना है। फिलहाल पंजाब में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर हो रहा है। जो कि किसानों के हक की बात है।


 
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