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देश में पहली बार, बीजेपी सरकार लेकर आई कैदियों के लिए नायाब योजना
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Dec 2017 10:41 AM IST
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कैदी
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देश में पहली बार, बीजेपी की सरकार एक नायाब योजना लेकर आ रही है। इसके तहत कैदी सरकारी पेट्रोल पंपों की कमान संभालेंगे। हरियाणा सरकार जेलों में सजायाफ्ता कैदियों के पुनर्वास और कल्याण के लिए नायाब योजना लाने जा रही है। जेल विभाग प्रदेश में शहरों व प्राइम लोकेशन पर स्थित जेलों के आसपास अपनी जमीन पर पेट्रोल पंप खोलेगी। जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने विभाग की तरफ से यह प्रस्ताव सीएम मनोहर लाल को मंजूरी के लिए भेजा है।
इन पंपों की कमान जेलों में सजा काट रहे कैदी संभालेंगे। उन कैदियों को पंप पर नौकरी दी जाएगी, जिनकी सजा एक या दो साल बची है और उनका व्यवहार जेल रिकॉर्ड में बहुत ही अच्छा है। साथ ही पढ़े-लिखे हैं और जेलों में सजा काटने के दौरान भी सरकार की योजनाओं को सिरे चढ़ाने में जेल प्रबंधन की मदद की है। जेल प्रशासन की देखरेख में यह पेट्रोल पंप का काम देखेंगे और ड्यूटी की शिफ्ट खत्म होने पर दोबारा जेल जाएंगे।
सजा खत्म होने के बाद अगर वे नौकरी करना चाहें तो सरकार उनकी सेवाएं जारी रखेगी। जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि कैदियों के कल्याण के लिए सरकार यह योजना शुरू कर रही है। उन्हें उम्मीद है कि सीएम से प्रस्ताव को जल्दी मंजूरी मिलेगी। पेट्रोल पंपों से होने वाली कमाई का पचास फीसदी लाभ सरकार को जाएगा, जबकि पचास प्रतिशत जेलों में सुविधाओं और कैदियों के कल्याण पर खर्च होगा। अच्छे व्यवहार व रिकार्ड वाले कैदी ही पंप पर रखेंगे। मुख्यमंत्री की सोच जेल विभाग को आगे बढ़ाने की है।
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इन जेलों के पास पंप शुरू होने की उम्मीद
सरकार अंबाला, थानेसर, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, सिरसा और जींद जेल के पास मौजूद अपनी जमीन पर पेट्रोल पंप खोल सकती है। सूत्रों के अनुसार जेल विभाग ने यहां पंप चलने की संभावनाओं का सर्वे भी कराया है। जेल मंत्री पंवार ने उच्चाधिकारियों को जेल विभाग की प्राइम लोकेशन या शहरों में मौजूद खाली भूमि चिह्नित करने के भी निर्देश दिए हैं।
शिमला-धर्मशाला में दुकानें चला रहे कैदी
हिमाचल प्रदेश के शिमला व धर्मशाला में सजायाफ्ता कैदी खाने-पीने की वस्तुओं की दुकानें चला रहे हैं। धर्मशाला में डिग्री कॉलेज के आसपास अनेक दुकानों का जिम्मा जेल प्रशासन ने कैदियों को सौंपा है। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी समरहिल के प्रशासनिक ब्लॉक के पास कैदी तंबू लगाकर ब्रेकफास्ट, लंच इत्यादि परोसते हैं। सिर्फ उन्हीं कैदियों को दुकानों का प्रबंधन सौंपा गया है, जिन्हें अपराध करने का पछतावा है और वे अपना बाकी जीवन अच्छा आदमी बनकर गुजारना चाहते हैं।
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इन पंपों की कमान जेलों में सजा काट रहे कैदी संभालेंगे। उन कैदियों को पंप पर नौकरी दी जाएगी, जिनकी सजा एक या दो साल बची है और उनका व्यवहार जेल रिकॉर्ड में बहुत ही अच्छा है। साथ ही पढ़े-लिखे हैं और जेलों में सजा काटने के दौरान भी सरकार की योजनाओं को सिरे चढ़ाने में जेल प्रबंधन की मदद की है। जेल प्रशासन की देखरेख में यह पेट्रोल पंप का काम देखेंगे और ड्यूटी की शिफ्ट खत्म होने पर दोबारा जेल जाएंगे।
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सजा खत्म होने के बाद अगर वे नौकरी करना चाहें तो सरकार उनकी सेवाएं जारी रखेगी। जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि कैदियों के कल्याण के लिए सरकार यह योजना शुरू कर रही है। उन्हें उम्मीद है कि सीएम से प्रस्ताव को जल्दी मंजूरी मिलेगी। पेट्रोल पंपों से होने वाली कमाई का पचास फीसदी लाभ सरकार को जाएगा, जबकि पचास प्रतिशत जेलों में सुविधाओं और कैदियों के कल्याण पर खर्च होगा। अच्छे व्यवहार व रिकार्ड वाले कैदी ही पंप पर रखेंगे। मुख्यमंत्री की सोच जेल विभाग को आगे बढ़ाने की है।
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इन जेलों के पास पंप शुरू होने की उम्मीद
सरकार अंबाला, थानेसर, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल, सिरसा और जींद जेल के पास मौजूद अपनी जमीन पर पेट्रोल पंप खोल सकती है। सूत्रों के अनुसार जेल विभाग ने यहां पंप चलने की संभावनाओं का सर्वे भी कराया है। जेल मंत्री पंवार ने उच्चाधिकारियों को जेल विभाग की प्राइम लोकेशन या शहरों में मौजूद खाली भूमि चिह्नित करने के भी निर्देश दिए हैं।
शिमला-धर्मशाला में दुकानें चला रहे कैदी
हिमाचल प्रदेश के शिमला व धर्मशाला में सजायाफ्ता कैदी खाने-पीने की वस्तुओं की दुकानें चला रहे हैं। धर्मशाला में डिग्री कॉलेज के आसपास अनेक दुकानों का जिम्मा जेल प्रशासन ने कैदियों को सौंपा है। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी समरहिल के प्रशासनिक ब्लॉक के पास कैदी तंबू लगाकर ब्रेकफास्ट, लंच इत्यादि परोसते हैं। सिर्फ उन्हीं कैदियों को दुकानों का प्रबंधन सौंपा गया है, जिन्हें अपराध करने का पछतावा है और वे अपना बाकी जीवन अच्छा आदमी बनकर गुजारना चाहते हैं।