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21 साल बाद हरियाणा में छात्र संघ चुनाव से बैन हटा, पर कुछ शर्तों के साथ
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 21 Feb 2018 04:38 PM IST
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हरियाणा में बंसीलाल-भाजपा गठबंधन की सरकार में बैन छात्र संघ चुनाव की बहाली 21 साल बाद भाजपा सरकार ने की है, पर कुछ शर्तों के साथ। बेशक सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया, लेकिन जो माइलेज छात्र संघ चुनाव का भाजपा को मिलना चाहिए था, उसे लेने से चूक गई। इनसो ने चुनाव बहाली का पूरा क्रेडिट ले लिया। इससे भाजपा के युवाओं के साधने के दाव पर भी इनसो ने पानी फेरा है। प्रदेश में 18 से 25 साल तक के सबसे अधिक मतदाता हैं।
चुनावी बहाली से भाजपा इन्हें अपने पाले में लाना चाहती थी, लेकिन चुनाव कराने के निर्णय के बाद अधिसूचना जारी न कर खुद ही अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार ली। इससे सरकार को फायदे के बजाए नुकसान हुआ है। चुनाव पर प्रतिबंध के बाद से साल दर साल अनेक आंदोलन बहाली को लेकर हुए, लेकिन बात आखिरकार 2018 में जाकर बनी। चुनाव शुरू कराने को लेकर इनेलो के अग्रणी छात्र संगठन इनसो ने लंबी लड़ाई लड़ी।
2014 में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में छात्र संघ चुनाव बहाली का वादा किया था, लेकिन सरकार के तीन साल बीतने के बावजूद चुनाव संबंधी कोई फैसला न होने पर इनसो ने प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया। गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार के वीसी प्रो. टंकेश्वर कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति ने वैसे तो बीते वर्ष नवंबर में ही चुनाव कराने संबंधी सिफारिश कर दी थी। लेकिन, सरकार ने इस पर पेच फंसा दिया।
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शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने अप्रत्यक्ष और नए शैक्षणिक सत्र में चुनिंदा कैंपस में ही चुनाव कराने की घोषणा कर डाली। इससे इनसो बिफर गई और आमरण अनशन तक शुरू कर डाला। इससे भाजपा अपने ही दाव पेच में फंस कर रह गई। अब सरकार ने इनसो का आमरण अनशन खत्म कराने केलिए अपना निर्णय वापस ले लिया है। सरकार प्रदेश की सभी 12 यूनिवर्सिटी और दो सौ से अधिक कॉलेजों में एक साथ ही चुनाव कराएगी। चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होगा। इस संबंध में उच्चतर शिक्षा विभाग ने सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी यूनिवर्सिटी के वीसी को चुनाव कराने संबंधी पत्र भी जारी कर दिया है।
सरकार की ओर से गाइडलाइन
. सभी यूनिवर्सिटी 2018 में अपने संविधान अनुसार छात्र संघ चुनाव कराएंगी। दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव होंगे।
. जरूरत होने पर चुनाव के लिए यूनिवर्सिटी पर्याप्त बजट का प्रावधान करेंगी।
. चुनाव कराने के लिए प्रो. टंकेश्वर समिति चार सप्ताह में अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अध्ययन के साथ ही टंकेश्वर समिति डीयू व पीयू का चुनाव पैटर्न अपनाने पर भी विचार करेगी।
. प्रत्येक वीसी अपने यूनिवर्सिटी कलेंडर के हिसाब से चुनाव कराने के लिए समिति गठित करेगा
. राज्यस्तरीय समिति की निगरानी में चुनाव होंगे। उच्च शिक्षा महानिदेशक, आईजी पुलिस व तकनीकी शिक्षा महानिदेशक इसमें शामिल रहेंगे।
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चुनावी बहाली से भाजपा इन्हें अपने पाले में लाना चाहती थी, लेकिन चुनाव कराने के निर्णय के बाद अधिसूचना जारी न कर खुद ही अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार ली। इससे सरकार को फायदे के बजाए नुकसान हुआ है। चुनाव पर प्रतिबंध के बाद से साल दर साल अनेक आंदोलन बहाली को लेकर हुए, लेकिन बात आखिरकार 2018 में जाकर बनी। चुनाव शुरू कराने को लेकर इनेलो के अग्रणी छात्र संगठन इनसो ने लंबी लड़ाई लड़ी।
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2014 में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में छात्र संघ चुनाव बहाली का वादा किया था, लेकिन सरकार के तीन साल बीतने के बावजूद चुनाव संबंधी कोई फैसला न होने पर इनसो ने प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया। गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार के वीसी प्रो. टंकेश्वर कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति ने वैसे तो बीते वर्ष नवंबर में ही चुनाव कराने संबंधी सिफारिश कर दी थी। लेकिन, सरकार ने इस पर पेच फंसा दिया।
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शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने अप्रत्यक्ष और नए शैक्षणिक सत्र में चुनिंदा कैंपस में ही चुनाव कराने की घोषणा कर डाली। इससे इनसो बिफर गई और आमरण अनशन तक शुरू कर डाला। इससे भाजपा अपने ही दाव पेच में फंस कर रह गई। अब सरकार ने इनसो का आमरण अनशन खत्म कराने केलिए अपना निर्णय वापस ले लिया है। सरकार प्रदेश की सभी 12 यूनिवर्सिटी और दो सौ से अधिक कॉलेजों में एक साथ ही चुनाव कराएगी। चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होगा। इस संबंध में उच्चतर शिक्षा विभाग ने सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी यूनिवर्सिटी के वीसी को चुनाव कराने संबंधी पत्र भी जारी कर दिया है।
सरकार की ओर से गाइडलाइन
. सभी यूनिवर्सिटी 2018 में अपने संविधान अनुसार छात्र संघ चुनाव कराएंगी। दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव होंगे।
. जरूरत होने पर चुनाव के लिए यूनिवर्सिटी पर्याप्त बजट का प्रावधान करेंगी।
. चुनाव कराने के लिए प्रो. टंकेश्वर समिति चार सप्ताह में अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अध्ययन के साथ ही टंकेश्वर समिति डीयू व पीयू का चुनाव पैटर्न अपनाने पर भी विचार करेगी।
. प्रत्येक वीसी अपने यूनिवर्सिटी कलेंडर के हिसाब से चुनाव कराने के लिए समिति गठित करेगा
. राज्यस्तरीय समिति की निगरानी में चुनाव होंगे। उच्च शिक्षा महानिदेशक, आईजी पुलिस व तकनीकी शिक्षा महानिदेशक इसमें शामिल रहेंगे।