कांग्रेस छोड़ते ही संपत सिंह ने लगाए गंभीर आरोप, बोले-सात लोगों ने मठाधीश की तरह बांटे टिकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री और 1980 से राजनीति में सक्रिय प्रोफेसर संपत सिंह ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से कांग्रेस छोड़ने का एलान कर दिया। पत्रकारवार्ता में उन्होंने कहा कि कांग्रेस में ही बैठे सामंतवादी लोगों ने उनकी राजनीतिक हत्या करने की कोशिश की है।
मगर वह इतने कमजोर नहीं हैं। इसलिए अब ऐसा कुछ नहीं बचा है, जिससे वह कांग्रेस में रहे। इसलिए कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श कर कांग्रेस छोड़ने का फैसला ले लिया है। अब कौन सी पार्टी में जाएंगे, इसका फैसला आगामी कुछ दिनों में किया जाएगा।
बोले - कुलदीप बिश्नोई को हराने के लिए करूंगा काम
प्रो. संपत ने कहा कि अब उनकी तीन ही प्राथमिकताएं हैं। पहली आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई को हराने के लिए प्रयास करना। दूसरी नलवा हलके से प्रत्याशी रणधीर पनिहार की जमानत जब्त करवाना और तीसरी फतेहाबाद से भी कांग्रेस प्रत्याशी को हरवाना।
उन्होंने कहा कि भजनलाल परिवार उनकी राजनीति में शुरुआती दिनों से ही खिलाफ रहा है। नलवा से उन्होंने 2009 में जसमा देवी को हराया था। उनके बेटे शायद अपनी मां की हार को आज तक नहीं भूले हैं, इसलिए अब उनका टिकट कटवा दिया।
सात लोगों ने मठाधीश की तरह बांटे टिकट
संपत सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा में कांग्रेस के टिकट सिर्फ सात लोगों ने बांटे हैं, जो मठाधीश बने हुए हैं। इन्होंने ही अपना-अपना कोटा बांटकर ऐसे टिकट बांटे जैसे जमीन-जायदाद का बंटवारा होता है।
90 टिकटों में से 51 भूपेंद्र सिंह हुड्डा, 15 प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा, छह अशोक तंवर, 5-5 कुलदीप बिश्नोई व रणदीप सुरजेवाला, चार कैप्टन अजय यादव, तीन किरण चौधरी और एक सावित्री जिंदल के कहने पर दी गई है। ग्राउंड पर मेहनत करने वाले नेताओं के टिकट काटकर ऐसे लोगों को दे दिए, जो अपने चहेते थे।
लोकसभा चुनाव में कुलदीप की मदद की, लेकिन उन्होंने धोखा दिया
संपत सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी कुलदीप बिश्नोई से मुलाकात हुई। उस समय दूड़ाराम भी उनके साथ बैठे थे। कुलदीप बिश्नोई ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में बेटे भव्य की मदद करो, विधानसभा चुनाव में वह उनकी मदद करेंगे।
रणधीर पनिहार के लिए कुलदीप ने कहा था कि उसकी परिस्थितियां कुछ ठीक नहीं हैं। अगर आज ही कह दूंगा कि उसे टिकट नहीं मिलेगा तो वह कोई गलत कदम उठा लेगा। मगर अब कुलदीप ने धोखा किया और उनका टिकट कटवा दिया।
2009 में सरकार बनवाई, फिर भी हुड्डा टिकट के लिए नहीं अड़े
संपत सिंह ने कहा कि 30 साल से ज्यादा इनेलो में रहने के बाद 2009 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बात करके कांग्रेस में आए थे। उनकी वजह से छह-सात विधायक बने। अगर यह विधायक नहीं जीतते तो सरकार लोकदल की बनती।
मगर अब उनसे तकलीफ इस बात की है कि हुड्डा हिसार जिले के एक भी टिकट के लिए नहीं अड़े, जबकि अन्य सभी जिलों में उन्होंने अपने साथियों को टिकट दिलाए हैं। उनकी तरह ही रामनिवास घोड़ेला और नरेश सेलवाल के भी टिकट काट दिए गए।
सारे मठाधीश एक हैं, कार्यकर्ताओं को गुमराह करते रहते हैं
संपत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के सभी मठाधीश और ऊपर वाले नेताओं की एक बात है। सिर्फ कार्यकर्ताओं और निचले नेताओं को गुमराह करते रहते हैं। ग्राउंड पर काम करने वाले नेताओं से खेमे बदलवाते रहते हैं। अब इन ऊपरी नेताओं की असलियत कार्यकर्ताओं को समझनी होगी।