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हरियाणा विस चुनावः फिर सूखी एसवाईएल में बहेगा ‘सियासत’ का पानी, पंजाब का पानी देने से इंकार
Sun, 22 Sep 2019 10:44 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 22 Sep 2019 10:44 AM IST
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सूखी एसवाईएल
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब में एसवाईएल की सूखी नहर हमेशा से बड़ा चुनावी मुद्दा बनती आई है। दोनों सूबों की राजनीति एसवाईएल के इस मुद्दे के ईद-गिर्द लगातर घूम रही है। इस बार चुनावी मौसम हरियाणा में है। चुनावी बिगुल बज चुका है और एक महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सभी राजनीतिक दलों ने उन सियासी मुद्दों को तैयार कर लिया है, जिसके बूते वे चुनावी रण में उतरेंगे।
इन्हीं सियासी मुद्दों में सूखी एसवाईएल का मसला फिर से उठने वाला है। यानी सूखी एसवाईएल में एक बार फिर से अब ‘सियासत’ का पानी बहेगा। हरियाणा में अभी तक इनेलो एसावाईएल का मुद्दा जबरदस्त ढंग से उठाती आई है। इनेलो ने इसके लिए नवंबर 2016 से कथित ‘जलयुद्ध’ भी छेड़ा हुआ है। जिसके तहत कई बार इनेलो प्रदेश में बड़ा आंदोलन, प्रदर्शन और महापंचायतें कर चुकी है। इतना ही नहीं नवंबर 2016 में इनेलो ने एसवाईएल की नहर फिर से खोदने के लिए पंजाब कूच किया था।
जिसके बाद इनेलो नेता अभय चौटाला समेत सवा सौ से अधिक नेताओं को पंजाब के शंभू बॉर्डर गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद से आज तक इनेलो इस मुद्दे पर सरकार को घेरे हुए हैं। विधानसभा में भी इनेलो एसवाईएल और दादूपुर नलवी नहर का मुद्दा जोरो-शोरों से उठा चुकी है। दूसरी ओर, कांग्रेस, जजपा समेत अन्य राजनीति दल ने भी इसी मसले पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाते हुए निशाना साध रहे हैं।
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इन्हीं सियासी मुद्दों में सूखी एसवाईएल का मसला फिर से उठने वाला है। यानी सूखी एसवाईएल में एक बार फिर से अब ‘सियासत’ का पानी बहेगा। हरियाणा में अभी तक इनेलो एसावाईएल का मुद्दा जबरदस्त ढंग से उठाती आई है। इनेलो ने इसके लिए नवंबर 2016 से कथित ‘जलयुद्ध’ भी छेड़ा हुआ है। जिसके तहत कई बार इनेलो प्रदेश में बड़ा आंदोलन, प्रदर्शन और महापंचायतें कर चुकी है। इतना ही नहीं नवंबर 2016 में इनेलो ने एसवाईएल की नहर फिर से खोदने के लिए पंजाब कूच किया था।
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जिसके बाद इनेलो नेता अभय चौटाला समेत सवा सौ से अधिक नेताओं को पंजाब के शंभू बॉर्डर गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद से आज तक इनेलो इस मुद्दे पर सरकार को घेरे हुए हैं। विधानसभा में भी इनेलो एसवाईएल और दादूपुर नलवी नहर का मुद्दा जोरो-शोरों से उठा चुकी है। दूसरी ओर, कांग्रेस, जजपा समेत अन्य राजनीति दल ने भी इसी मसले पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाते हुए निशाना साध रहे हैं।
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उधर, हरियाणा सरकार को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। सीएम मनोहर लाल व उनकी मंत्री कह चुके हैं कि इस मामले को लेकर हरियाणा सरकार जितनी गंभीर है, उतना आज तक कोई सियासी दल नहीं हुआ है। उनके अनुसार दस साल कांग्रेस सरकार रही और पांच साल इनेलो सरकार प्रदेश में रही, मगर किसी ने भी हरियाणा को उसकेहक का पानी दिलवाने की नहीं सोची। लेकिन यह भाजपा की सुप्रीम कोर्ट में प्रभावशाली पैरवी का ही नतीजा है कि फैसला हरियाणा के हक में तो आ चुका है, लेकिन इस मामले केपटाक्षेप की जिम्मेवारी केंद्र सरकार को सौंपी गई है।
गत दिवस उतरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में यह मसला उठा था। मगर एजेंडे कई थे, इसलिए इस मसले पर कोई निर्णय नहीं हुआ। गृहमंत्री अब दिल्ली में केवल इसी एजेंडे को लेकर हरियाणा-पंजाब की बैठक बुलाएंगे और उसमें इस मामले का हल निकाला जाएगा। अन्य राजनीतिक पार्टियों को तो इस विषय में बोलने तक का हक नहीं होना चाहिए, क्योंकि जनता सब जानती है कि सही मायने में हरियाणा के लिए एसवाईएल केपानी की लड़ाई भाजपा ही लड़ रही है और भाजपा ही इसे सिरे भी चढ़ाएगी।
- मनोहर लाल, सीएम हरियाणा
गत दिवस उतरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में यह मसला उठा था। मगर एजेंडे कई थे, इसलिए इस मसले पर कोई निर्णय नहीं हुआ। गृहमंत्री अब दिल्ली में केवल इसी एजेंडे को लेकर हरियाणा-पंजाब की बैठक बुलाएंगे और उसमें इस मामले का हल निकाला जाएगा। अन्य राजनीतिक पार्टियों को तो इस विषय में बोलने तक का हक नहीं होना चाहिए, क्योंकि जनता सब जानती है कि सही मायने में हरियाणा के लिए एसवाईएल केपानी की लड़ाई भाजपा ही लड़ रही है और भाजपा ही इसे सिरे भी चढ़ाएगी।
- मनोहर लाल, सीएम हरियाणा