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हरियाणा चुनाव परिणामः ताऊ के कुनबे की टूट से मुश्किल हुई इनेलो की डगर, अब वजूद को संकट

Fri, 25 Oct 2019 01:41 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 25 Oct 2019 01:41 PM IST
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Haryana Assembly Elections 2019 Result, Abhay Chautala Party INLD Future in Danger
इनेलो नेता अभय चौटाला
देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के कुनबे की ‘टूट’ ने आज चौटाला परिवार के लिए सत्ता की डगर मुश्किल बना दी है। यह कुनबा वर्ष 2005 से सत्ता से बाहर है और इस चुनाव में भी सत्ता की कुर्सी चौटाला परिवार से दूर ही है। पारिवारिक विघटन के बाद न तो इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को कुछ  खास हासिल हुआ और न ही इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी (जजपा) सत्ता तक पहुंचने का आंकड़ा अपने दम पर जुटा पाई।
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हां, इस चुनाव में जजपा ‘किंगमेकर’ के रूप में जरूर उभरकर सामने आई है। सत्ता की ललक ने ताऊ की इस कुनबे को करीब एक साल पहले अक्टूबर 2018 में तोड़कर रख दिया था। देवीलाल के पुत्र पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी जजपा बना ली थी। चूंकि अजय अभी जेल में हैं, लिहाजा जजपा की बागडौर अजय के बडे़ बेटे पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने संभाली और अपने भाई दिग्विजय चौटाला व मां विधायक नैना चौटाला के साथ जजपा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया।
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उधर, पूर्व सांसद दुष्यंत की अपने चाचा यानी ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला से राजनीति खट्टास बढ़ चुकी थी। अभय खुद सीएम बनने का सपना संजोए बैठे थे, तो दुष्यंत की भी कुछ ऐसी ही चाह थी। इसी चाहत ने इनेलो और जजपा की राजनीतिक राहें जुदा कर दी।
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पहली बार ताऊ का ये टूटा कुनबा जुदा राहों के साथ पहले लोकसभा चुनाव में आमने-सामने हुआ और अब हरियाणा के रण में भी दोनों प्रतिद्वंदी की तरह लड़े। हालात यह रहे कि लोकसभा चुनाव में तो दोनों की झोली खाली और इस विधानसभा चुनाव में भी इन दोनों दलों को कुछ खास नहीं मिल पाया। 81 सीटों पर लड़ने वाली इनेलो सिर्फ1 सीट ऐलनाबाद जीत पाई। यहां अभय चौटाला खुद जीते। जबकि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो अपने समर्थित 20 विधायकों के साथ मुख्य विपक्षी पार्टी थी।

दूसरी ओर, 90 सीटों पर लड़ने वाली जजपा 10 सीटों तक ही पहुंच पाई। चूंकि हरियाणा में त्रिशंकू के हालात हैं, इसलिए अभी सत्ता की चाबी जजपा के हाथ मानी जा रही है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी भाजपा खुद सरकार बनाने का अपना दावा कर रही है। अब देखना यह है कि अलग राजनीतिक राह पकड़कर चलने वाली जजपा को इस चुनाव में क्या मिलता है। इसके अलावा ओमप्रकाश चौटाला के छोटे रणजीत सिंह चौटाला को इस बार कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया था। लिहाजा वे रानियां से आजाद ही खड़े हुए और जीत भी गए।

जबकि डबवाली सीट से खड़े हुए ओमप्रकाश चौटाला के भतीजे आदित्य चौटाला को भी शिकस्त मिली। आदित्य ने भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ा था। कुल मिलाकर ताऊ के इस बिखरे परिवार ने इस विधानसभा चुनाव में पाया कम, खोया ज्यादा।
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