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हरियाणा विस चुनावः वक्त के साथ खत्म होता गया क्षेत्रीय दलों का वजूद, और कुछ ऐसा रहा सफर

Wed, 02 Oct 2019 12:28 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 02 Oct 2019 12:28 PM IST
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haryana assembly elections 2019, Regional parties in state politics
बंसी लाल, देवी लाल, भजन लाल - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का लंबे समय तक दबदबा रहा है। इन दलों की कमान संभालने वाले नेताओं ने प्रदेश में राजनीति करने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धाक जमाई। प्रदेश में कांग्रेस से टूटकर दल तो बहुत बने, मगर वक्त के साथ उनका वजूद खत्म होता गया। प्रदेश में इस समय इनेलो ही पुराने क्षेत्रीय दल के रूप में सक्रिय है।
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1996 में अस्तित्व में आया इनेलो भी हालांकि 2018 में दोफाड़ हो चुका है। इससे जननायक जनता पार्टी बन चुकी है। क्षेत्रीय दलों के कद्दावर नेताओं ने न केवल हरियाणा पर राज किया, बल्कि सरकारें बनाने और गिराने में भी अहम भूमिका निभाई। प्रदेश के तीन लालों के नाम से मशहूर देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल ने भी अपने अलग-अलग दल बनाए।
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हरियाणा की सियासत लगभग चार दशक तक इन्हीं के इर्द-गिर्द सिमटी रही। देवी लाल की राहें तो कांग्रेस से जुदा ही रहीं, उनका परिवार भी कांग्रेस से कोसों दूर है। इनेलो और जजपा अलग-अलग दल के रूप में देवीलाल की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। बंसी लाल और भजन लाल तो कांग्रेस से अलग हुए, लेकिन बाद में उनके दलों का कांग्रेस में विलय हो गया।
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बंसी लाल की विरासत को किरण चौधरी संभाले हुए हैं तो भजन लाल की विरासत कुलदीप बिश्नोई के हाथों में हैं। दोनों की गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में होती है।

ऐसा रहा बंसी लाल व हविपा का सफर

पहले लाल के रूप में विख्यात चौधरी बंसी लाल आजादी से पहले से ही राजनीति में सक्रिय थे। वह सात बार हरियाणा विधानसभा के सदस्य चुने गए। 1968 में वह पहली बार मुख्यमंत्री बने। भगवत दयाल शर्मा एवं राव बीरेंद्र सिंह के बाद वह हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री हुए। 1972 में वह दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। 1975 में उन्हें भारत का रक्षामंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ।

आपातकाल के दौरान वह संजय गांधी के विश्वसनीय माने जाते थे। 1984 में वह रेल मंत्री भी बने। 1986 में वह एक साल के लिए फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। 1996 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी बना ली और 1997 में भाजपा के साथ गठबंधन कर हरियाणा में शराबबंदी के वादे के साथ सरकार बनाई । प्रदेश में शराब बंदी पूर्ण रूप से असफल रही। जुलाई 1999 में भाजपा ने अपना समर्थन इनेलो को देकर सरकार गिरा दी । 2005 में हविपा का कांग्रेस में विलय हो गया।

देवी लाल खा गए थे भजन लाल से गच्चा

1977 में दूसरे लाल के तौर पर मशहूर देवीलाल ने जनता पार्टी की अगुवाई करते हुए भट्टू कलां से विधानसभा चुनाव लड़ा और सीएम बने। हरियाणा में ताऊ के नाम से मशहूर देवीलाल 19 अक्टूबर 1989 से 21 जून 1991 तक भारत के उपप्रधानमंत्री भी रहे। वह दो बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979 और 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989 तक मुख्यमंत्री भी रहे।

भजन लाल ने भी कांग्रेस छोड़कर यह चुनाव जनता पार्टी से ही लड़ा था। भजन लाल जनता पार्टी सरकार की सत्ता पलटकर  22 जून 1979 को सीएम बन गए और 22 जनवरी 1980 तक सीएम रहे। 1980 में भजन लाल 39 विधायकों के साथ कांग्रेस में मिल गए और 22 जनवरी 1980 से 5 जुलाई 1985 तक सीएम की कुर्सी संभाली।

देवीलाल ने 1977 के चुनाव में लोकदल का जनता पार्टी में विलय कर दिया था, लेकिन 1979 में देवीलाल को सरकार गिरने पर फिर लोकदल बनाना पड़ा। इसके बाद 1996 में लोकदल से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) बना।

2007 में बनाई हजकां, 2016 में विलय

पूर्व सीएम भजन लाल ने 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस यानि हजकां-बीएल बना ली थी। वह 2005 में जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बनाने से नाराज थे। 2011 में भजन लाल की मृत्यु के बाद उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई ने पार्टी की कमान संभाली।

2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट गया। हजकां अपने दम पर लड़ी, लेकिन दो ही सीटें आदमपुर व हांसी में कुलदीप और रेणुका बिश्नोई जीते। 28 अप्रैल 2016 को कुलदीप बिश्नोई ने दिल्ली में राहुल गांधी की मौजदूगी में हजकां का विलय कांग्रेस में कर दिया था।

विशाल हरियाणा पार्टी से राव बिरेंद्र सिंह भी रहे सीएम

हरियाणा की सत्ता में विशाल हरियाणा पार्टी की भी भागीदारी रही है। राव बिरेंद्र सिंह 24 मार्च 1967 से 2 नवंबर 1967 तक प्रदेश के सीएम रहे। 1967 में तो उन्होंने कांग्रेस टिकट पर पहली विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन 1968 में उन्होंने विशाल हरियाणा पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में ताल ठोकी। 39 सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा और 16 जीती थीं।

1972 में 15 सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा और 3 सीटें जीती। 1977 में 31 सीटों पर उम्मीदवार उतारेे और पांच सीटें जीतने में सफल रहे। उसके बाद राव बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में आ गए और इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की सरकार में मंत्री भी रहे। उनके बेटे राव इंद्रजीत कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे, लेकिन 2013 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा से अनबन के चलते भाजपा में चले गए। वह दूसरी बार भाजपा सरकार में राज्य मंत्री बने हैं।

हरियाणा में ये क्षेत्रीय दल भी सक्रिय
आम आदमी पार्टी, लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी, जननायक जनता पार्टी, स्वराज इंडिया, राष्ट्रीय लोक स्वराज पार्टी, भारतीय सामाजिक न्याय पार्टी इत्यादि।

 
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