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हरियाणा विस चुनावः कर्मियों के आंदोलन पर ‘दाल’ गला रहे दल, विरोधियों ने बनाया अपना हथियार

Wed, 25 Sep 2019 10:35 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 25 Sep 2019 10:35 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, Opposition Using Employees Protest against Government
कुमारी सैलजा के साथ भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में भाजपा के खिलाफ चुनावी मुद्दों की जुगत में लगे विरोधी दलों ने कर्मचारियों के आंदोलन पर अपनी सियासी ‘दाल’ गलाना शुरू कर दिया है। प्रदेश में विभिन्न वर्ग के कर्मचारियों के संघर्ष को विरोधी भाजपा के खिलाफ हथियार बना रहे हैं। कर्मचारियों की मांगों व आंदोलन के दौरान उन पर हुई कार्रवाई पर भाजपा की घेराबंदी शुरू हो गई है।
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कांग्रेस, इनेलो, जजपा, आप, स्वराज इंडिया समेत अन्य दल इन्ही मुद्दों पर मुखर भी हो चुके हैं। लेकिन भाजपा भी इस घेराबंदी को तोड़ने की रणनीति बना चुकी है। इसके अलावा भाजपा ने भी आचार संहिता से पहले विभिन्न वर्ग के कर्मचारियों की नाराजगी दूर कर उन्हें अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है।
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अब देखना यह है कि प्रदेश में करीब पांच लाख कर्मचारी वर्ग, उनके परिजन व संबंधी किस दल को समर्थन कर उसके हाथ में प्रदेश की बागडौर सौंपने में अपना सहयोग देते हैं।
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आज से हर विधानसभा में कर्मचारी सम्मेलन

दूसरी ओर, सर्व कर्मचारी संघ ने  भी हर विधानसभा क्षेत्र में ‘कर्मचारी सम्मेलन’ करने का निर्णय लिया है। 25 सितंबर से शुरू होने वाला ये कर्मचारी सम्मेलन 7 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान कर्मचारी संघ के नेता हर विधानसभा में कर्मचारी सम्मेलन कर पिछले सरकार में हुए आंदोलनों और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई का बखान करेंगे।

सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा के अनुसार 1996-97 में तत्कालीन बंसीलाल सरकार के बाद मौजूदा सरकार ने एस्मा (एसेंशियल सर्विसस मेनटेनेंस एक्ट) के तहत कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया। उनके अनुसार सबसे पहले 2016 में बिजली कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगाया गया।

फिर 2018 में रोडवेज कर्मियों, मल्टी पर्पस हेल्थ वर्करों और एनएचएम कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगा। इस दौरान आंदोलनरत कर्मचारियों का न केवल वेतन काटा गया, बल्कि विभिन्न विभागों के करीब 1300 कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा के तहत केस दर्ज किए गए।

भाजपा ने भी साधे कर्मचारी

चुनावी रणभेरी बजने से ठीक पहले सरकार आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों को लेकर ज्यादा गंभीर हो गई थी। किसी कीमत पर सरकार को कर्मचारियों की नाराजगी गवारा नहीं थी। लिहाजा सरकार के आदेशों पर बैठकों का दौर चला। आला अफसरों ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों को बुलाकर उनकी जायज मांगों पर विचार करते हुए पूरा करने की कार्रवाई भी शुरू करवाई।

इतना ही नहीं आंदोलनरत कर्मचारियों के मुकद्दमे भी वापस लेने का आश्वासन देते हुए इस बारे में गृह मंत्रालय को लिखा गया।  बिजली, नगर पालिका और रोडवेज विभाग के  आंदोलनरत कर्मचारियों की काटी गई छुटिट्यों को भी सशर्त रेगुलराइज करने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण चौकीदारों का मेहनताना व भत्ते बढ़ाए गए। आंगनवाड़ी वर्करों का मानदेय बढ़ाया गया।

एनएचएम कर्मचारियों डीए 154 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। इसके अतिरिक्त भी सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों से जुड़े कई अहम निर्णय लेते हुए कर्मचारियाें को अपने पक्ष में करने का भरसक प्रयास किया। उधर, भाजपा के प्रवक्ता डा. संजय शर्मा  ने दावा किया है कि मनोहर सरकार ने कर्मचारियों के हित के लिए जितने काम किए हैं, उतने आज तक प्रदेश में नहीं हुए हैं। उनके अनुसार कर्मचारी सरकार की महत्वपूर्ण कड़ी है, उनकी नजरअंदाजी का सवाल ही खड़ा नहीं होता। सरकार वापस आई, तो इसी तरह कर्मचारी के लिए हितकारी फैसले होते रहेंगे।

लाठीचार्ज भी बनेगा मुद्दा
शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न कर्मचारियों द्वारा आए दिन हरियाणा शिक्षा सदन का घेराव भी चलता रहा। कई-कई दिन यहां धरने चलते रहे। विभिन्न संघ से जुड़े शिक्षक, लिपिक, गेस्ट टीचर इत्यादि आंदोलनरत कर्मचारियों ने कई बार विधानसभा और सीएम आवास के घेराव का प्रयास किया। मगर चंडीगढ़ बॉर्डर पर ही उनपर अमूमन वाटर कैनन का इस्तेमाल और कई बार हुई लाठीचार्ज भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा।

शुरू हुए विरोधियों के शब्दबाण

विरोधी दलों के नेताओं ने कर्मचारियों के इस आंदोलन पर अपने शब्दबाण छोड़ने शुरू कर दिए हैं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने हर वर्ग को ठगा है। किसान, नौजवान, महिलाएं, व्यापारी, शिक्षक, कर्मचारी, हर कोई सरकार से त्रस्त होकर सड़कों पर आ गया है। शिक्षकों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन का इस्तेमाल बेहद निंदनीय कृत्य है। उन्होंने कहा कि समस्या के हल के लिए बैठकर बात करने की बजाए लाठियां बरसाना संवेदनहीनता का प्रतीक है।

इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि  पिछले पांच साल से कर्मचारी सड़कों पर हैं, संघर्ष करते उनका लंबा समय निकल गया और अब आखिर में आकर सरकार ने कर्मचारियों को बरगलाने का काम किया है। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला के अनुसार कर्मचारी अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं, विभाग की अनियमिताताओं को उजागर करते हैं, तो उनके खिलाफ एस्मा के तहत कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर दिए जाते हैं, क्या यह कर्मचारियों के साथ न्याय है?।

कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार के कार्यकाल में अपना हक मांगने पर शिक्षकों को लाठियां मिली, अब जांच का नाटक कर सरकार उन्हे बरगला नहीं सकती।  कांग्रेस टीचर्स की सभी जायज मांगों के साथ है। कांग्रेस शिक्षकों के साथ न्याय करेगी। विधायक रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कर्मचारियों पर लाठियां चलाना बेरहमी से कम नहीं है। उनके अनुसार यह जान लिया जाए, शिक्षकों को जो दुत्कारे, वॉटर कैनन व लाठियां मारे, जनता हिसाब करेगी उससे सारे।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी कर्मचारियों के संघर्ष को पूरा समर्थन देेते हुए सदैव उनके साथ है और उनके मुद्दों को बुलंद करती रहे। जबकि आम आदमी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद का कहना है कि यदि आप सत्ता में आई तो दिल्ली की तर्ज पर कच्चे कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा  दी जाएगी और पक्केकर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा किया जाएगा।
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