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हरियाणा विधानसभा चुनावः भाजपा की ना, ‘सियासी दोस्ती’ सिर्फ पंजाब तक
Thu, 03 Oct 2019 01:45 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 03 Oct 2019 01:45 PM IST
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पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन
- फोटो : Amar Ujala
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पंजाब की तरह हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के गठबंधन की तमाम अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। भाजपा हाईकमान ने हरियाणा में भाजपा-शिअद के गठबंधन की संभावनाओं से साफ इंकार कर दिया है। हाईकमान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अकालियों से ‘सियासी दोस्ती’ सिर्फ पंजाब तक ही सीमित रहेगी।
भाजपा के इस इनकार के बाद हरियाणा में शिअद अब आगामी रणनीति तैयार कर रहा है। शिअद अब हरियाणा में अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहा है। साथ ही किसी अन्य दल के साथ गठबंधन का विकल्प भी शिअद ने अभी तक खोल रखा है। सूबे में अब कशमकश में फंसे शिअद को वीरवार सुबह तक हर हाल में अपनी रणनीति साफ करनी होगी, क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने का अंतिम दिन शुक्रवार यानी 4 अक्टूबर तक ही है।
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भाजपा के इस इनकार के बाद हरियाणा में शिअद अब आगामी रणनीति तैयार कर रहा है। शिअद अब हरियाणा में अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहा है। साथ ही किसी अन्य दल के साथ गठबंधन का विकल्प भी शिअद ने अभी तक खोल रखा है। सूबे में अब कशमकश में फंसे शिअद को वीरवार सुबह तक हर हाल में अपनी रणनीति साफ करनी होगी, क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने का अंतिम दिन शुक्रवार यानी 4 अक्टूबर तक ही है।
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हरियाणा में भाजपा पर दबाव बना रहे थे अकाली
इसी साल मई में हुए लोकसभा चुनाव से पहले शिअद का हरियाणा में इनेलो से एसवाईएल के मसले पर गठबंधन टूट गया था। जबकि हमेशा से शिअद प्रदेश में इनेलो का ही साथी रहा है। इस गठबंधन के टूटने के बाद शिअद ने हरियाणा में भाजपा से नजदीकियां बढ़ानी शुरू की। शिअद नेताओं को उम्मीद थी कि पंजाब की तरह हरियाणा में भी शिअद-भाजपा गठबंधन हो सकता है। इसी के चलते सीएम मनोहर लाल से मुलाकात कर अकाली नेताओं ने उन्हें आश्वास्त किया कि वे लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिना शर्त समर्थन देते हुए अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारेंगे।
मगर इसी दौरान शिअद नेताओं ने सीएम से आगामी विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें अपने प्रत्याशियों के लिए मांगी थी, लेकिन उस वक्त प्रदेश भाजपा ने शिअद से इस मुद्दे पर न तो कोई वादा किया था और न ही किसी प्रकार का ठोस आश्वासन दिया था। मगर अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही शिअद ने हरियाणा में फिर से भाजपा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। मगर हरियाणा भाजपा ने न तो पहले और न ही अब शिअद के साथ गठबंधन में कोई रुचि दिखाई।
हरियाणा भाजपा के नेताओं ने हरियाणा में भाजपा-शिअद की दोस्ती का फैसला पीएम नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर छोड़ दिया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके साथ-साथ हरियाणा भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी राय से भी भाजपा हाईकमान को अवगत करवा दिया था। जिसमें भाजपा के अधिकतर नेताओं ने हरियाणा में किसी से भी गठजोड़ से फिलहाल इंकार कर दिया था। हाईकमान ने भी हरियाणा भाजपा की सूबे में मौजूद स्थिति और नेताओं की राय को तवज्जो देते हुए प्रदेश में भाजपा-शिअद गठबंधन की संभावनाओं पर साफ इनकार कर दिया है।
मगर इसी दौरान शिअद नेताओं ने सीएम से आगामी विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें अपने प्रत्याशियों के लिए मांगी थी, लेकिन उस वक्त प्रदेश भाजपा ने शिअद से इस मुद्दे पर न तो कोई वादा किया था और न ही किसी प्रकार का ठोस आश्वासन दिया था। मगर अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही शिअद ने हरियाणा में फिर से भाजपा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। मगर हरियाणा भाजपा ने न तो पहले और न ही अब शिअद के साथ गठबंधन में कोई रुचि दिखाई।
हरियाणा भाजपा के नेताओं ने हरियाणा में भाजपा-शिअद की दोस्ती का फैसला पीएम नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर छोड़ दिया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके साथ-साथ हरियाणा भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी राय से भी भाजपा हाईकमान को अवगत करवा दिया था। जिसमें भाजपा के अधिकतर नेताओं ने हरियाणा में किसी से भी गठजोड़ से फिलहाल इंकार कर दिया था। हाईकमान ने भी हरियाणा भाजपा की सूबे में मौजूद स्थिति और नेताओं की राय को तवज्जो देते हुए प्रदेश में भाजपा-शिअद गठबंधन की संभावनाओं पर साफ इनकार कर दिया है।
अब जजपा से गठबंधन की अटकलें शुरू
हरियाणा में भाजपा से गठबंधन की तमाम अटकलों पर विराम लगने के बाद शिअद ने अब जजपा से गठबंधन के प्रयास शुरू कर दिए हैं। जजपा का उदय इनेलो विघटन के बाद हुआ था। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला भी लोकसभा चुनाव से पहले शिअद सुप्रीमो एवं पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल का आशीर्वाद लेने गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव में तो जजपा-शिअद के बीच कोई गठजोड़ नहीं हो पाया।
मगर अब शिअद इस विधानसभा चुनाव में जजपा से सियासी दोस्ती करने का प्रयास कर रही है। वक्त कम है, फैसला जल्द लेना होगा। उम्मीद है वीरवार सुबह तक तस्वीर साफ हो जाएगी और शिअद अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर देगी। उधर, सूत्रों की यदि माने तो जजपा भी अब इस सियासी मोड़ पर शिअद का साथ देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
पंजाब से सटे सीटों पर है अकालियों का प्रभाव
हरियाणा में शिरोमणि अकाली दल की स्थिति यदि देखें तो पंजाब से सटे सूबे के करीब सोलह विधानसभा क्षेत्रों में अकालियों का ठीक प्रभाव है। इन क्षेत्रों में वोटबैंक भी ठीकठाक है। अतीत में झांके तो इनेलो से गठबंधन के साथ अकालियों ने अपना एक सांसद और विधायक भी हरियाणा में बनाया था। अंबाला सिटी विधानसभा से भी इनेलो-अकाली प्रत्याशी खड़ा होता रहा और अच्छी वोट ले जाता रहा है। इसके अलावा अन्य सीटें भी है, जहां अकाली अपना थोड़ा-बहुत प्रभाव रखते हैं।
मगर अब शिअद इस विधानसभा चुनाव में जजपा से सियासी दोस्ती करने का प्रयास कर रही है। वक्त कम है, फैसला जल्द लेना होगा। उम्मीद है वीरवार सुबह तक तस्वीर साफ हो जाएगी और शिअद अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर देगी। उधर, सूत्रों की यदि माने तो जजपा भी अब इस सियासी मोड़ पर शिअद का साथ देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
पंजाब से सटे सीटों पर है अकालियों का प्रभाव
हरियाणा में शिरोमणि अकाली दल की स्थिति यदि देखें तो पंजाब से सटे सूबे के करीब सोलह विधानसभा क्षेत्रों में अकालियों का ठीक प्रभाव है। इन क्षेत्रों में वोटबैंक भी ठीकठाक है। अतीत में झांके तो इनेलो से गठबंधन के साथ अकालियों ने अपना एक सांसद और विधायक भी हरियाणा में बनाया था। अंबाला सिटी विधानसभा से भी इनेलो-अकाली प्रत्याशी खड़ा होता रहा और अच्छी वोट ले जाता रहा है। इसके अलावा अन्य सीटें भी है, जहां अकाली अपना थोड़ा-बहुत प्रभाव रखते हैं।
स्वभाविक सी बात है कि शिअद हरियाणा में कभी भाजपा का साथी नहीं रहा है। दोनों दलों की राहें हरियाणा में हमेशा जुदा रही है। वैसे भी भाजपा में गठबंधन जैसे विषय हाईकमान स्तर पर ही देखे जाते हैं। हरियाणा में भी भाजपा-शिअद गठबंधन पर भाजपा हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि शिअद से गठबंधन सिर्फ पंजाब तक ही सीमित रहेगा। हरियाणा में भाजपा अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा
हरियाणा में अकाली दल के साथ भाजपा का गठबंधन नहीं होगा। एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा में शिअद ने भाजपा का साथ नहीं दिया था। एसवाईएल हरियाणा की जीवन रेखा है और हमें अपने हिस्से का पानी बिल्कुल चाहिए। वैसे भी भाजपा हरियाणा में खुद अपने दम पर चुनाव लडऩे में पूरी तरह सक्षम है।
- कर्णदेव कंबोज, राज्यमंत्री, हरियाणा
हरियाणा में शिरोमणि अकाली दल का अब क्या स्टैंड रहेगा, इसके लिए बलविंद्र सिंह बूंदड़ के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी हर पहलु पर गौर करते हुए विचार कर रही है। वीरवार सुबह तक सारी स्थिति साफ हो जाएगी। कमेटी के फैसले के अनुसार ही आगे काम किया जाएगा।
- डा. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, शिरोमणि अकाली दल
भाजपा ने हरियाणा में साथ चलने से मना कर दिया है। अभी कुछ और संभावनाएं तलाशी जा रही है। वैसे शिअद की हरियाणा इकाई खुद अकेले चुनाव लडऩा चाहती है। 16 सीटों पर तो उम्मीदवार भी सामने आए हैं। बहुत जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट शिअद हाईकमान को सौंप देगी, उसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- बलविंद्र सिंह बूंदड़, महासचिव, शिरोमणि अकाली दल
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा
हरियाणा में अकाली दल के साथ भाजपा का गठबंधन नहीं होगा। एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा में शिअद ने भाजपा का साथ नहीं दिया था। एसवाईएल हरियाणा की जीवन रेखा है और हमें अपने हिस्से का पानी बिल्कुल चाहिए। वैसे भी भाजपा हरियाणा में खुद अपने दम पर चुनाव लडऩे में पूरी तरह सक्षम है।
- कर्णदेव कंबोज, राज्यमंत्री, हरियाणा
हरियाणा में शिरोमणि अकाली दल का अब क्या स्टैंड रहेगा, इसके लिए बलविंद्र सिंह बूंदड़ के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी हर पहलु पर गौर करते हुए विचार कर रही है। वीरवार सुबह तक सारी स्थिति साफ हो जाएगी। कमेटी के फैसले के अनुसार ही आगे काम किया जाएगा।
- डा. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, शिरोमणि अकाली दल
भाजपा ने हरियाणा में साथ चलने से मना कर दिया है। अभी कुछ और संभावनाएं तलाशी जा रही है। वैसे शिअद की हरियाणा इकाई खुद अकेले चुनाव लडऩा चाहती है। 16 सीटों पर तो उम्मीदवार भी सामने आए हैं। बहुत जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट शिअद हाईकमान को सौंप देगी, उसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- बलविंद्र सिंह बूंदड़, महासचिव, शिरोमणि अकाली दल