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हरियाणा विस चुनावः भाजपा ने चार बार अकेले ताल ठोकी, सिर्फ 2014 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई

Mon, 16 Sep 2019 11:26 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 16 Sep 2019 11:26 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, BJP Achievements in Haryana Politics
हरियाणा में भाजपा का इतिहास - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में भाजपा इस समय अपने स्वर्णिम काल में है। 1980 में अस्तित्व में आने के बाद 26 अक्टूबर 2014 को पहली बार पार्टी की 47 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। चुनाव इससे पहले भी भाजपा ने अकेले और गठबंधन में खूब लड़े, सरकारें भी बनाईं, लेकिन अपने बूते सत्ता में आने का सपना 2014 में ही पूरा हुआ। इसमें सबसे बड़ा योगदान केंद्र में 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार का भी रहा।
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मोदी मैजिक ही था, जिसने हरियाणा की हवा भाजपा के पक्ष में बदल दी और 2009 में महज चार विधायकों वाली भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। मोदी की हवा ने दस साल से सत्तासीन कांग्रेस को उखाड़ फेंका था। इसके बाद प्रदेश की बागडोर भाजपा आलाकमान ने मनोहर लाल के हाथों में दी। प्रदेश के चौथे लाल कहे जाने वाले मनोहर लाल ने सीएम बनने के बाद खुद को हर कसौटी पर कसा और बड़ी से बड़ी अग्निपरीक्षा भी पास कर डाली।
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पार्टी ने किसी भी निकाय चुनाव में हार का सामना नहीं किया। नगर निगमों पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जींद उपचुनाव भी जीता। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा तो साफ किया ही पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भी मात दे दी। मनोहर राज में भाजपा की जड़े धरातल पर खासी मजबूत हुई हैं। संगठन घर-घर तक पहुंचा है। पन्ना प्रमुख पार्टी की ताकत बन चुके हैं। सरकार ने पांच साल में अंतिम व्यक्ति तक का विकास करने का प्रयास किया है। यही वजह है कि भाजपा दोबारा सत्ता पर काबिज होने का दम भर रही है।   
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सिर्फ चार बार अकेले ठोंकी ताल

भाजपा ने अस्तित्व में आने के बाद हरियाणा में चार चुनाव में ही अकेले ताल ठोंकी है। 1991, 2005, 2009 और 2014 में पार्टी ने बिना किसी से गठबंधन किए चुनाव लड़ा। इनमें से केवल 2014 में ही भाजपा 47 सीटें जीत पाई।

1991 में भाजपा ने 89 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 9.43 वोट प्रतिशत के साथ दो ही प्रत्याशी शाहबाद से खरैती लाल और महेंद्रगढ़ से रामबिलास शर्मा जीते। जबकि 70 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

2005 में सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन 10.36 प्रतिशत वोट के साथ दो ही उम्मीदवार नारनौंद हलके से राम कुमार गौतम और हसनगढ़ क्षेत्र से नरेश कुमार जीते। जबकि 75 उम्मीदवारों  की जमानत जब्त हो गई।

2009 के विधानसभा चुनावों का भाजपा का वोट प्रतिशत वर्ष 2009 से घटकर 9.04 प्रतिशत हो गया, लेकिन उसके चार विधायक अंबाला कैंट से अनिल विज, सोनीपत से कविता जैन, तिगांव से कृष्ण पाल गुर्जर और भिवानी से घनश्याम सर्राफ ही जीते, जबकि 72 भाजपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

2014 में 90 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, 47 सीटें जीती, 12 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। जींद उपचुनाव में जीत के बाद 48 विधायक हो गए।
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