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हरियाणा विस चुनावः भजनलाल परिवार कांग्रेस की पिच पर बैटिंग को तैयार, दोनों भाई मैदान में उतरे
Sun, 06 Oct 2019 11:18 AM IST
खुशबू गोयल
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 06 Oct 2019 11:18 AM IST
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भजनलाल, कुलदीप बिश्नोई
- फोटो : फाइल फोटो
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लंबे समय तक कांग्रेस से दूर रहने के बाद भजनलाल का परिवार एक बार फिर से कांग्रेस की पिच पर बैटिंग करने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने भी समय की नजाकत को भांपते हुए पुराने गिले शिकवे दूर कर स्वर्गीय भजनलाल के दोनों बेटों कुलदीप और चंद्रमोहन को गले लगा लिया है।
दोनों भाइयों को टिकट देकर कांग्रेस आदमपुर और पंचकूला सीट हथियाना चाह रही है। जबकि कुलदीप बिश्रोई की धर्मपत्नी रेणुका बिश्रोई इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। टिकट वितरण के बाद से ही आदमपुर और पंचकूला में मजमा लगना शुरू हो गया है।
कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे चंद्रमोहन की पंचूकला स्थित कोठी पर एक बार फिर से रौनक लौट आई है। पिछले दस साल से यहां सन्नाटा रहता था। इक्का-दुक्का लोग ही चंद्रमोहन की कोठी पर उनसे मिलने आया जाया करते थे, लेकिन आज घर के बार गाड़ियों की लंबी लाइन है।
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पूर्व सीएम भजन लाल मुख्यमंत्री रहते हुए इसी कोठी से अपनी सियासत चलाया करते थे। उनके राजनीति से रिटायर होने के बाद उनकी विरासत चंद्रमोहन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर संभाली, लेकिन परिस्थतियों में आए बदलाव में यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चला और उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद पंचकूला सीट से चंद्रमोहन और उनके परिवार की दूरी बन गई।
मैदान खाली हुआ तो कांग्रेस ने यहां से अंबाला शहर के विधायक डीके बंसल को मैदान में उतारा और बंसल ने जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में भाजपा लहर चली और ज्ञान चंद गुप्ता मैदान में उतरे। जीत का दामन थाम कर गुप्ता विधानसभा तक पहुंचे और सीएम मनोहरलाल ने उन्हें चीफ व्हिप बना कर सम्मान से नवाजा।
कांग्रेस ने अपने पुराने सिपहसलार को भले ही सियासी मजबूरी के चलते उतारा है, लेकिन शहर के कांग्रेसियों में इस बात का जोश है कि चंद्रमोहन के आने से शहर में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। यही कारण था कि चंद्रमोहन के चाहने वालों का मजमा उनकी कोठी पर लगना शुरू हो गया था। जिसमें उनके पुराने करीबी शशि शर्मा, रविंद्र रावल, अनिल पंगोत्रा सहित अन्य लोग शामिल थे।
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दोनों भाइयों को टिकट देकर कांग्रेस आदमपुर और पंचकूला सीट हथियाना चाह रही है। जबकि कुलदीप बिश्रोई की धर्मपत्नी रेणुका बिश्रोई इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। टिकट वितरण के बाद से ही आदमपुर और पंचकूला में मजमा लगना शुरू हो गया है।
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कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे चंद्रमोहन की पंचूकला स्थित कोठी पर एक बार फिर से रौनक लौट आई है। पिछले दस साल से यहां सन्नाटा रहता था। इक्का-दुक्का लोग ही चंद्रमोहन की कोठी पर उनसे मिलने आया जाया करते थे, लेकिन आज घर के बार गाड़ियों की लंबी लाइन है।
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पूर्व सीएम भजन लाल मुख्यमंत्री रहते हुए इसी कोठी से अपनी सियासत चलाया करते थे। उनके राजनीति से रिटायर होने के बाद उनकी विरासत चंद्रमोहन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर संभाली, लेकिन परिस्थतियों में आए बदलाव में यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चला और उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद पंचकूला सीट से चंद्रमोहन और उनके परिवार की दूरी बन गई।
मैदान खाली हुआ तो कांग्रेस ने यहां से अंबाला शहर के विधायक डीके बंसल को मैदान में उतारा और बंसल ने जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में भाजपा लहर चली और ज्ञान चंद गुप्ता मैदान में उतरे। जीत का दामन थाम कर गुप्ता विधानसभा तक पहुंचे और सीएम मनोहरलाल ने उन्हें चीफ व्हिप बना कर सम्मान से नवाजा।
कांग्रेस ने अपने पुराने सिपहसलार को भले ही सियासी मजबूरी के चलते उतारा है, लेकिन शहर के कांग्रेसियों में इस बात का जोश है कि चंद्रमोहन के आने से शहर में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। यही कारण था कि चंद्रमोहन के चाहने वालों का मजमा उनकी कोठी पर लगना शुरू हो गया था। जिसमें उनके पुराने करीबी शशि शर्मा, रविंद्र रावल, अनिल पंगोत्रा सहित अन्य लोग शामिल थे।
फिजा ने बदल दी थी सियासी फिजा
चंद्रमोहन के डिप्टी सीएम रहते उनके जीवन में हरियाणा की एडीशनल एडवोकेट जनरल अनुराधा बाली की एंट्री हुई। यह वह दौर था जब चंद्रमोहन ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम चांद मोहम्मद और अनुराधा का नाम फिजा रखा और शादी कर ली। हिंदू मैरिज एक्ट में एक पत्नी के रहते दूसरी से शादी करने की अनुमति नहीं है। इसलिए चंद्रमोहन को धर्म परिवर्तन करना पड़ा। जिसके बाद वे ऐसा सुर्खियों में आए कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद से अब तक उनकी राजनीति हाशिये पर थी। अब कांग्रेस के टिकट पर एक बार फिर से वे अपनी किस्मत आजमाएंगे।
यह भी एक जमाना था
एक जमाना था जब हरियाणा में कांग्रस और पंचकूला में चंद्रमोहन की सरकार थी। पूर्व सीएम हुड्डा की मजबूरी थी कि चंद्रमोहन को डिप्टी सीएम बनाना पड़ा, लेकिन पंचकूला में चौधर हरियाणा सरकार की चले इसके लिए डीसी कांग्रेसी नेता फूलचंद मुलाना के दामाद आरके कटारिया को लगा दिया। कटारिया उन्हीं कामों को हरी झंडी देते थे। जिनको शासन का आदेश होता था, बावजूद इसके चंद्रमोहन अपने चाहने वालों के काम करवा ही लेते थे। सियासत इसे कहते हैं कि आज भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चंद्रमोहन की टिकट के लिए लाबिंग करनी पड़ी।
जीवन-मरण, यश-अपयश सब ऊपर वाले के हाथ में है
आज की राजनीति और ताजा घटनाक्रम पर बातचीत में चंद्रमोहन कहते हैं कि जीवन मरण, लाभ हानि, यश अपयश सब ऊपर वाले के हाथ में है। कांग्रेस अपनी नीतियों के चलते चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में मुददे स्थानीय होते हैं, इसमें कोई बाहरी फैक्टर काम नहीं करता। ज्ञानचंद गुप्ता मेरे ऊपर कोई टिप्प्णी करने से पहले खुद के गिरेबान में झांके, मैं पुरानी बातों को दोहरने में यकीन नहीं रखता।
यह भी एक जमाना था
एक जमाना था जब हरियाणा में कांग्रस और पंचकूला में चंद्रमोहन की सरकार थी। पूर्व सीएम हुड्डा की मजबूरी थी कि चंद्रमोहन को डिप्टी सीएम बनाना पड़ा, लेकिन पंचकूला में चौधर हरियाणा सरकार की चले इसके लिए डीसी कांग्रेसी नेता फूलचंद मुलाना के दामाद आरके कटारिया को लगा दिया। कटारिया उन्हीं कामों को हरी झंडी देते थे। जिनको शासन का आदेश होता था, बावजूद इसके चंद्रमोहन अपने चाहने वालों के काम करवा ही लेते थे। सियासत इसे कहते हैं कि आज भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चंद्रमोहन की टिकट के लिए लाबिंग करनी पड़ी।
जीवन-मरण, यश-अपयश सब ऊपर वाले के हाथ में है
आज की राजनीति और ताजा घटनाक्रम पर बातचीत में चंद्रमोहन कहते हैं कि जीवन मरण, लाभ हानि, यश अपयश सब ऊपर वाले के हाथ में है। कांग्रेस अपनी नीतियों के चलते चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में मुददे स्थानीय होते हैं, इसमें कोई बाहरी फैक्टर काम नहीं करता। ज्ञानचंद गुप्ता मेरे ऊपर कोई टिप्प्णी करने से पहले खुद के गिरेबान में झांके, मैं पुरानी बातों को दोहरने में यकीन नहीं रखता।