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हरियाणा विधानसभा चुनाव: अशोक तंवर के तेवर पड़े नरम, पद छोड़े, पार्टी नहीं
Fri, 04 Oct 2019 01:15 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 04 Oct 2019 01:15 AM IST
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Former Haryana Congress Chief Ashok Tanwar
- फोटो : ANI
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दरवाजे दस जनपथ पर बुधवार को खुद को मानव बम बताकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर खुलेआम टिकट बेचने का आरोप लगाने वाले हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर के तेवर नरम पड़े हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने साफ-सफाई की मुद्रा में खुद की कही बातों को कार्यकर्ताओं की भावना बता दिया।
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उनका कहना है कि मैंने मर्यादित तरीके से अपनी बात कही है। टिकट बेचने के की सत्यता पर उन्होंने कहा कि क्या सिस्टम है इसका खुलासा हो। हालांकि तंवर ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर सभी पदों से त्यागपत्र देने की बात कही और बताया कि मैं पार्टी में सिर्फ साधारण कार्यकर्ता की तरह रहूंगा।
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तंवर ने कहा कि टिकट घोषणा से पहले जिन लोगों ने नामांकन कराया मैं अपने कार्यकर्ताओं के साथ शामिल हुआ। उनका कहना है कि सही को सही कहने का जज्बा है। टिकट बेचने के आरोपों पर कहा राहुल गांधी भी तो यही चाहते थे कि सब कुछ पारदर्शी हो लेकिन कोई मान नहीं रहा है।
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उनका कहना है कि कांग्रेस भक्ति की जगह पार्टी में हुड्डा भक्ति चल रही है। उन्होंने ये भी साफ किया कि उन्हें सोनिया गांधी को लेकर कोई नाराजगी नहीं है। मैंने कार्यकर्ताओं की भावना को मर्यादित तरीके से बताया है। खरीद-फरोख्त के सबूत भी देंगे।
एक प्रश्र के उत्तर में कहा कि कौन मजबूत है ये समय बताएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में मेरे साथी कहां जाएं ये उनका अधिकार है। पार्टी में जमीनी नेताओं की बात नहीं सुनी जा रही है। जो कमेटी बनती है उसमें भी अपनों को शामिल किया जाता है। सुनवाई के लिए पार्टी में सिस्टम बनाने की जरूरत है। पार्टी में हमारी आस्था लेकिन लोग छोड़कर जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस हारती है तो वही लोग जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे लोग कह रहे है कि टिकट बिके हैं मैंने ऐसे लोगों को फटकार लगाई कि सबूत दें। चुनाव प्रचार में शामिल होने के सवाल पर कहा जो मदद मांगेगा मैं वहां जाऊंगा। अगर बुलाया तो सोनिया गांधी और राहुल जी की रैलियों में जाऊंगा। आदेश नेतृत्व का होता है लेकिन जिन्होंने पार्टी का आदेश नहीं माना मैं उनकी नहीं सुनुंगा।