'अपनों' की टिकट के लिए लॉबिंग में जुटे दिग्गज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए सभी दलों में जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है। चहेतों और रिश्तेदारों को लिए दिग्गजों ने लॉबिंग शुरू कर दी है। नेताओं की लॉबिंग और दलबदलुओं को तरजीह से स्थानीय नेताओं में निराशा है।
हर दल में दावेदारों की संख्या ज्यादा होने से उम्मीदवारों को चयन में पार्टी हाईकमान को खासी माथापच्ची करनी पड़ रही है। हालांकि इनेलो ने 73 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर बाजी मार ली है, जबकि भाजपा की पहली सूची मंगलवार को आने की संभावना है। कांग्रेस में दावेदारों के नाम शार्टलिस्ट करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हजकां वेट एंड वाच की रणनीति अपना रही है। छोटे दलों की नजर असंतुष्टों पर टिकीं हैं।
नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट मिलने की संभावना
परिवारवाद की राजनीति के आरोप से जूझती कांग्रेस में इस बार भी कुछ नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन भाजपा में रिश्तेदारी टिकट का पैमाना बनेगी या नहीं, इस बात पर अभी संशय है। कांग्रेस से 1212 लोगों ने विभिन्न हलकों के लिए दावा ठोंक रखा है, जबकि भाजपा ने पैनल में 200 से अधिक नाम शामिल किए हैं। हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल और हजकां क्षेत्रीय दल हैं।
इनेलो अपने अधिकतर टिकट घोषित कर चुकी है। हजकां टिकटों को लेकर अभी पत्ते नहीं खोल रही है, लेकिन भाजपा में प्रधानमंत्री मोदी का मूड यह स्पष्ट करेगा कि चुनाव में कितने रिश्तेदारों को टिकट मिलेगी। मंत्रियों द्वारा रिश्तेदारों को अपने कार्यालय में शामिल किए जाने को लेकर मोदी की पहले भी आपत्ति रही है।
अब इस विधानसभा चुनाव में हरियाणा में टिकट वितरण का क्या फार्मूला होगा इसका खुलासा कभी भी हो जाएगा। हरियाणा भाजपा के जीते हुए कई सांसद भी अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। जिसमें कुछ अपने राजनीतिक वारिस पुत्र या पुत्री को आगे बढ़ाना चाह रहे हैं जबकि कुछ नेता अपने करीबी रिश्तेदारों के लिए पैरवी कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस के टिकट के लिए फूलचंद मुलाना और कैप्टन अजय यादव अपने अपने बेटे की पैरवी कर रहे हैं।
बीरेंद्र की लंबी लिस्ट
कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थाम चुके बिरेंद्र सिंह के करीबियों की टिकट की लिस्ट लंबी है। पार्टी निश्चित तौर पर बिरेंद्र के करीबियों को टिकट देगी, लेकिन कितने लोगों को टिकट मिलेगी इस पर संशय है।
राव इंद्रजीत बेटी को लड़वाने के इच्छुक:
राव इंद्रजीत भी अपने करीबी लोगों की लिस्ट दे चुके हैं। राव अपनी बेटी आरती यादव को भी टिकट चुनाव लड़वाने के इच्छुक हैं।
कृष्णपाल गुर्जर के कितने नाम होंगे सलेक्ट:
मोदी के करीबी कृष्णपाल गुर्जर के कितने नाम टिकट वितरण में शामिल होंगे, इसका खुलासा जल्द होगा। फिलहाल वे अपने पुत्र देवेंद्र सिंह को तिगांव से चुनाव लड़वाने के इच्छुक हैं।
महेंद्र प्रताप के बेटे की बारी
कांग्रेस सरकार में मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह अपने बेटे को चुनाव लड़वाने की घोषणा कर चुके हैं। वे चाह रहे हैं कि उनके बेटे विजय प्रताप को बड़खल सीट से लड़ने का मौका मिले।
बंतो कटारिया के लिए जुगत लगा रहे रतनलाल:
भाजपा के मौजूदा सांसद अपने रिश्तेदारो के लिए पैरवी कर रहे हैं। जिसमें अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया अपनी पत्नी बंतो कटारिया को भी चुनाव लड़वाना चाहते हैं। उनकी यह इच्छा भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कितनी मानेगा यह देखने की बात होगी।