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Haryana Election: बंसीलाल के गढ़ में चचेरे भाई-बहन आमने-सामने, भाजपा से श्रुति तो कांग्रेस से ये हैं उम्मीदवार
Mon, 09 Sep 2024 01:26 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, भिवानी
अमर उजाला नेटवर्क, भिवानी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 09 Sep 2024 01:26 PM IST
सार
बंसीलाल के गढ़ में चचेरे भाई-बहन आमने-सामने होंगे। पूर्व विधायक भी निर्दलीय ताल ठोकेंगे। जजपा भी प्रत्याशी उतार चुकी है। इस हॉट सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। बंसीलाल परिवार के वोट बंटने की संभावना है।
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Haryana Assembly Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के गढ़ तोशाम में चचेरी बहन और भाई आमने-सामने होंगे। भाजपा से श्रुति चौधरी तो कांग्रेस से अनिरुद्ध चौधरी को टिकट मिला है। वहीं, भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद पूर्व विधायक शशिरंजन परमार भी तोशाम से निर्दलीय चुनावी दंगल में ताल ठोक चुके हैं।
जजपा ने भी तोशाम से सरपंज राजेश भारद्वाज को मैदान में उतार दिया है। तोशाम लंबे अर्से से पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल का गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर खुद चौधरी बंसीलाल जीतकर सूबे के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। वहीं उनके पुत्र चौ. सुरेंद्र सिंह भी यहां से विधायक बन चुके हैं।
सुरेंद्र सिंह के निधन के बाद 2005 से इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर लगातार किरण चौधरी विधायक बनती आ रही हैं। भाजपा में जाने के बाद किरण चौधरी राज्यसभा सदस्य हैं, ऐसे में उनकी बेटी श्रुति चौधरी यहां से भाजपा की प्रत्याशी हैं।
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दिलचस्प पहलु यह भी है कि अब कांग्रेस से अनिरुद्ध के उतरने के बाद तोशाम में पूर्व मुख्यमंत्री परिवार के बीच समर्थकों का वोट भी बंट जाएगा। क्योंकि एक ही परिवार के दो सदस्य चुनावी मैदान में हैं और दोनों बंसीलाल के नाम पर ही वोट भी मांग रहे हैं।
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जजपा ने भी तोशाम से सरपंज राजेश भारद्वाज को मैदान में उतार दिया है। तोशाम लंबे अर्से से पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल का गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर खुद चौधरी बंसीलाल जीतकर सूबे के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। वहीं उनके पुत्र चौ. सुरेंद्र सिंह भी यहां से विधायक बन चुके हैं।
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सुरेंद्र सिंह के निधन के बाद 2005 से इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर लगातार किरण चौधरी विधायक बनती आ रही हैं। भाजपा में जाने के बाद किरण चौधरी राज्यसभा सदस्य हैं, ऐसे में उनकी बेटी श्रुति चौधरी यहां से भाजपा की प्रत्याशी हैं।
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दिलचस्प पहलु यह भी है कि अब कांग्रेस से अनिरुद्ध के उतरने के बाद तोशाम में पूर्व मुख्यमंत्री परिवार के बीच समर्थकों का वोट भी बंट जाएगा। क्योंकि एक ही परिवार के दो सदस्य चुनावी मैदान में हैं और दोनों बंसीलाल के नाम पर ही वोट भी मांग रहे हैं।
श्रुति चौधरी का ये रहेगा मजबूत और कमजोर पक्ष
श्रुति चौधरी का मजबूत पक्ष यह है कि तोशाम से उन्होंने लोकसभा चुनाव में भी काफी लीड ली है। दूसरी बात श्रुति के साथ उनकी मां किरण चौधरी भी पूरी ताकत झोंक बेटी को जीत दिलाने का हर संभव प्रयास कर रही हैं। वे दिल्ली और हरियाणा में दोनों जगह चौधर होने का हवाला देकर इलाके के लोगों के काम कराने का दावा भी कर रही हैं। जबकि कमजोर पक्ष यह है कि बंसीलाल के मतदाताओं और जाट मतदाताओं को अपने पक्ष में करना उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
श्रुति चौधरी का मजबूत पक्ष यह है कि तोशाम से उन्होंने लोकसभा चुनाव में भी काफी लीड ली है। दूसरी बात श्रुति के साथ उनकी मां किरण चौधरी भी पूरी ताकत झोंक बेटी को जीत दिलाने का हर संभव प्रयास कर रही हैं। वे दिल्ली और हरियाणा में दोनों जगह चौधर होने का हवाला देकर इलाके के लोगों के काम कराने का दावा भी कर रही हैं। जबकि कमजोर पक्ष यह है कि बंसीलाल के मतदाताओं और जाट मतदाताओं को अपने पक्ष में करना उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अनिरुद्ध चौधरी को जाटों से आस
अनिरुद्ध चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के इकलौते पोते होने के साथ-साथ पूर्व विधायक रणबीर महेंद्रा के बेटे हैं। बंसीलाल परिवार का परंपरागत वोट उनके साथ आ सकता है। इलाके के जाट मतदाता भी अनिरुद्ध के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, क्योंकि वे भाजपा से नाराज हैं। जबकि कमजोर पक्ष यह भी है कि उनका ये पहला विधानसभा चुनाव है। इससे पहले वे बाढ़डा में सक्रिय रहे हैं। अब तोशाम में चुनाव के दौरान उनके लिए मतदाताओं को साधना भी बड़ी चुनौती है।
अनिरुद्ध चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के इकलौते पोते होने के साथ-साथ पूर्व विधायक रणबीर महेंद्रा के बेटे हैं। बंसीलाल परिवार का परंपरागत वोट उनके साथ आ सकता है। इलाके के जाट मतदाता भी अनिरुद्ध के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, क्योंकि वे भाजपा से नाराज हैं। जबकि कमजोर पक्ष यह भी है कि उनका ये पहला विधानसभा चुनाव है। इससे पहले वे बाढ़डा में सक्रिय रहे हैं। अब तोशाम में चुनाव के दौरान उनके लिए मतदाताओं को साधना भी बड़ी चुनौती है।
पूर्व विधायक शशिरंजन बिगाड़ेंगे मतों का गणित
तोशाम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पूर्व विधायक शशिरंजन परमार भी बंसीलाल परिवार के सदस्यों को कड़ी टक्कर देंगे। क्योंकि वे पिछले चुनाव में यहां से करीब 56 हजार वोट हासिल कर चुके हैं। इस बार वे जितना भी मत हासिल करेंगे, उससे बंसीलाल परिवार के सदस्यों के मतों का ही गणित बिगड़ेगा।
तोशाम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पूर्व विधायक शशिरंजन परमार भी बंसीलाल परिवार के सदस्यों को कड़ी टक्कर देंगे। क्योंकि वे पिछले चुनाव में यहां से करीब 56 हजार वोट हासिल कर चुके हैं। इस बार वे जितना भी मत हासिल करेंगे, उससे बंसीलाल परिवार के सदस्यों के मतों का ही गणित बिगड़ेगा।