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Haryana Assembly Election: दलों के समीकरण बिगाड़ते रहे हैं निर्दलीय, इस बार भी 462 से अधिक रण में
Thu, 19 Sep 2024 12:48 PM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 19 Sep 2024 12:48 PM IST
सार
हरियाणा बनने के बाद से 1967 से लेकर आज तक 13 विधानसभा चुनावों में हर बार निर्दलीयों ने उपस्थिति दर्ज कराई है। 1967 और 87 में तो 16-16 निर्दलीय विधायक चुने गए थे।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में निर्दलीय प्रत्याशी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के समीकरण बनाते और बिगाड़ते रहे हैं। आज तक हरियाणा में एक भी ऐसा विधानसभा चुनाव नहीं हुआ है, जिसमें निर्दलीय न जीते हों। मतलब हर विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने विधानसभा में दस्तक दी है।
हरियाणा बनने के बाद से अब कुल 117 निर्दलीय विधायक विधानसभा में पहुंच चुके हैं। इस बार भी 90 सीटों पर 462 से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे हैं। इनमें से 40 उम्मीदवार भाजपा और कांग्रेस के बागी हैं। इनमें से 17 कांग्रेस के और 23 नेता भाजपा छोड़कर निर्दलीय रण में उतरे हैं। हालांकि, सोमवार तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। इसके बाद निर्दलीयों की स्थिति साफ हो जाएगी। प्रदेश में चार सीटें ऐसी हैं, जहां पर निर्दलीयों का वर्चस्व रहा है।
आज तक चुने गए 117 निर्दलीय विधायकों में से केवल एक महिला शारदा रानी बल्ल्भगढ़ से विधानसभा में पहुंची हैं। सबसे कम निर्दलीय 2014 और 1991 में 5-5 जीते हैं। खास बात ये है कि निर्दलीय के तौर पर विधानसभा पहुंचने वालों में बागी नेता ही शामिल रहे हैं, जिनकी टिकट गई और वो निर्दलीय चुनाव लड़े।
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हरियाणा बनने के बाद से अब कुल 117 निर्दलीय विधायक विधानसभा में पहुंच चुके हैं। इस बार भी 90 सीटों पर 462 से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे हैं। इनमें से 40 उम्मीदवार भाजपा और कांग्रेस के बागी हैं। इनमें से 17 कांग्रेस के और 23 नेता भाजपा छोड़कर निर्दलीय रण में उतरे हैं। हालांकि, सोमवार तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। इसके बाद निर्दलीयों की स्थिति साफ हो जाएगी। प्रदेश में चार सीटें ऐसी हैं, जहां पर निर्दलीयों का वर्चस्व रहा है।
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आज तक चुने गए 117 निर्दलीय विधायकों में से केवल एक महिला शारदा रानी बल्ल्भगढ़ से विधानसभा में पहुंची हैं। सबसे कम निर्दलीय 2014 और 1991 में 5-5 जीते हैं। खास बात ये है कि निर्दलीय के तौर पर विधानसभा पहुंचने वालों में बागी नेता ही शामिल रहे हैं, जिनकी टिकट गई और वो निर्दलीय चुनाव लड़े।
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