Haryana Assembly Election: चार सीटों पर आजाद प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मिला जनता का साथ
हथीन से दो निर्दलीय उम्मीदवारों में भाजपा के बागी पूर्व विधायक कहर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में कहर सिंह इनेलो से विधायक थे। भाजपा नेता कहर सिंह से नामांकन वापस लेने के लिए मान-मन्नौवल कर रहे हैं। इसी तरह नूंह सीट से 7 और नीलोखेड़ी से 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं।
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हरियाणा के चार विधानसभा सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा है। इसमें पूंडरी सीट सात, नूंह सीट से पांच, हथीन सीट से चार और नीलोखेड़ी सीट से पांच बार निर्दलीय उम्मीदवार जीत चुके हैं। इस बार चुनाव में पूंडरी सीट से 17 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
इसमें सज्जन ढुल को जजपा ने समर्थन किया हुआ है। हथीन से दो निर्दलीय उम्मीदवारों में भाजपा के बागी पूर्व विधायक कहर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में कहर सिंह इनेलो से विधायक थे। भाजपा नेता कहर सिंह से नामांकन वापस लेने के लिए मान-मन्नौवल कर रहे हैं। इसी तरह नूंह सीट से 7 और नीलोखेड़ी से 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं।
पूंडरी : निर्दलीय विधायकों ने किसी भी दल का हाथ थामा तो मिली हार
2019 में निर्दलीय विधायक बने रणधीर गोलन इस बार भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर 1996 से 2019 तक लगातार निर्दलीय प्रत्याशी जीतते आए हैं, जबकि पहली बार 1968 में निर्दलीय उम्मीदवार ईश्वर सिंह ने कांग्रेस के तारा सिंह को हराया था। इसके बाद खुद कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी ईश्वर सिंह को हराया था। 2000 में दो निर्दलीय प्रत्याशी तेजवीर और नरेंद्र के बीच मुकाबले में तेजवीर को जीत मिली थी। 2004 में निर्दलीय दिनेश कौशिक ने इनेलो के नरेंदर शर्मा को शिकस्त दी। अगले चुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी बनकर उतरे दिनेश कौशिक को निर्दलीय प्रत्याशी सुल्तान ने पटखनी दे दी।