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हरियाणा रण में उतरीं 1000 चुनावी पार्टियां

Wed, 27 Aug 2014 01:45 PM IST
विजय गुप्ता/अमर उजाला, चंडीगढ़
विजय गुप्ता/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Aug 2014 01:45 PM IST
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haryana assembly election 2014

हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार बहुकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इस बार के चुनाव में एक हजार से ज्यादा पार्टियां मैदान में होंगी। हालांकि इनमें से मुख्य दल आठ ही होंगे। छह राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा दो क्षेत्रीय पार्टियां। राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस, भाजपा, बसपा, एनसीपी, सीपीआई और सीपीआईएम मैदान में होंगी, जबकि क्षेत्रीय दलों में हजकां और इनेलो प्रमुख पार्टियां हैं।

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अब तक विधानसभा चुनाव में सीधा मुकाबला कांग्रेस और इनेलो के बीच होता रहा है। इन दलों के अलावा कुछ और पार्टियां इस बार मैदान में हैं। इनमें से कुछ नेताओं ने बगावत कर अपनी नई पार्टी बनाई हैं तो कुछ जनाधार तलाश रहे हैं।
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हरियाणा सरकार में गृह मंत्री रहे गोपाल कांडा इस बार हरियाणा लोकहित पार्टी के साथ मैदान में हैं, जबकि मुख्यमंत्री हुड्डा के खास रहे विनोद शर्मा कांग्रेस को अलविदा कह जन चेतना पार्टी बना चुके हैं।
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इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने भी हरियाणा में एंट्री की थी। सुदेश अग्रवाल समस्त भारतीय पार्टी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में दमदार दस्तक तो दी लेकिन हरियाणा का चुनाव आते आते पार्टी ने चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया।

हर चुनाव में बढ़ती गई संख्या

haryana assembly election 2014

हरियाणा के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भले दर्जन भर दलों की बीच होता रहा हो। लेकिन चुनाव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले दलों की तादाद पर इसका जरा भी असर नहीं पड़ा।

पंजाब से अलग होने के बाद अस्तित्व में आए हरियाणा राज्य के पहले चुनाव से लेकर अब तक साल दर साल चुनाव में हाथ आजमाइश करने वाले दलों की संख्या में बढ़ोतरी होती रही है।

राज्य विधानसभा में पहुंचने का ख्वाब देखने वाले राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पार्टियां और गैर पंजीकृत दलों की तादाद 1000 से करीब पहुंच चुकी है।

ये पार्टियां हैं मैदान में

haryana assembly election 2014

हरियाणा लोकहित पार्टी
पूर्व गृह मंत्री गोपाल कांडा अपनी लोकहित पार्टी के कुछ प्रत्याशी की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कुछ समय पहले एक बड़ी रैली कर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया। अब इंतजार उनके बाकी प्रत्याशियों की लिस्ट का है, कि बाकी बचे प्रत्याशियों की लिस्ट वे कब उजागर करेंगे।

जन चेतना पार्टी

हरियाणा सरकार में पूर्व मंत्री रहे विनोद शर्मा मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से चालीस साल पुरानी दोस्ती छोड़ कर अपना अलग दल बना चुके हैं। उन्होंने भी अपनी पार्टी का गठन कर लिया है। इस विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार हो रही है। शर्मा शीघ्र ही अपनी पार्टी की रणनीति की घोषणा करेंगे।

समस्त भारतीय पार्टी

समस्त भारतीय पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव  सुदेश अग्रवाल के नेतृत्व में लड़ेगी। सुदेश अग्रवाल राज्य में व्यवस्था परिवर्तन की बात कह कर अपने प्रचार अभियान पर निकले हैं।

ये भी रण में उतरने को तैयार

haryana assembly election 2014

तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस की रणनीति का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। कुछ समय पहले हरियाणा में रैलियां कर सुर्खियों में आई इस पार्टी में वर्तमान सरकार के कुछ नुमाइंदे गए, लेकिन बाद में वे पार्टी को छोड़ कर वापिस आ गए।

बहुजन समाज पार्टी

हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती है। यह बात और है कि अभी तक पार्टी को एक सीट से ज्यादा नहीं मिली है। हालांकि पहले ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि इस दफा बसपा किसी क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतर सकती है। लेकिन हाल ही में पार्टी प्रमुख मायावती ने अकेले दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर कयासों पर विराम लगा दिया। यही नहीं उन्होंने हरियाणा में अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद शर्मा केनाम का ऐलान भी कर दिया है।

आप भी कड़ी टक्‍कर देने को तैयार

haryana assembly election 2014

आम आदमी पार्टी
दिल्ली विधानसभा में धमाकेदार शुरुआत के बाद आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भी उत्तर भारत में कई सीटों पर अपने मजबूत जनाधार का प्रदर्शन किया। यही नहीं पंजाब में पहली दफा आप के चार सांसद लोकसभा भी पहुंचे।

इसके बावजूद पार्टी ने हरियाणा विधान सभा चुनाव में हिस्सा न लेने का ऐलान कर विरोधियों को राहत जरूर दी है लेकिन समर्थक खासे निराश हो गए हैं।

लेफ्ट पार्टियां

हरियाणा विधान सभा के चुनाव में इस बार सीपीआई व सीपीआईएम सहित अन्य लेफ्ट पार्टियों के संयुक्त रुप से मैदान में उतरने की उम्मीद है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में जिस लेफ्ट पार्टी का जनाधार अच्छा है वहां उसी पार्टी के उम्मीदवार को उतारा जाएगा और इस उम्मीदवार को सभी लेफ्ट पार्टियां अपना समर्थन देंगी। चुनाव में लेफ्ट पार्टियां दो दर्जन से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं।

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