विधानसभा चुनावः मुद्दों में जमीन तलाश रहे नेता
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हरियाणा के चुनावी समर में नेताओं ने मुद्दों के बीच जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। आसार हैं कि इस बार की जंग बीते विधानसभा चुनाव से इतर होगी। इस बार तिकोने संघर्ष होने के कारण राज्य में मुद्दे हावी रहेंगे।
इसमें एसवाईएल और एचएसजीएमसी मसले के हावी रहने की संभावना है। इसके अलावा विकास और नौकरी में भेदभाव, क्षेत्रवाद, 100 गज के प्लॉट के मामले, दलित उत्पीड़न, सीएलयू प्रकरण और एसईजेड जैसे मुद्दे हावी रहेंगे।
कांग्रेस : विकास को हथियार बनाएगी
कांग्रेस विकास के दम पर विधानसभा चुनाव में पूरे जोश के साथ उतरेगी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिखों को अलग कमेटी के नाम पर लामबंद कर सकती है। इसके अलावा पार्टी के पास हरियाणा नंबर वन सहित कई अन्य नारे हैं जो मुद्दों के तौर पर प्रभावी होंगे।
पार्टी मुद्दों को अपने घोषणापत्र के माध्यम से जनता के सामने पेश करने के अलावा प्रदेश में शिक्षण संस्थानों का विकास, विश्वविद्यालयों की स्थापना, बिजली का उत्पादन, एनसीआर का विकास, और मेट्रो को हरियाणा तक पहुंचाने का क्रेडिट लेगी।
सीएलयू प्रकरण पर घिरेगी कांग्रेस
इनेलो ने कांग्रेस को सीएलयू के प्रकरण में घेरने की तैयारी की है। पार्टी ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर हरियाणा के मुख्यमंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा हरियाणा में भूमि आवंदन के मुद्दों को इनेलो चुनाव के दौरान जोर-शोर से उठाएगी।
हरियाणा की प्रमुख विपक्षी पार्टी इस चुनाव में जनता के सामने कैश फार सीएलयू प्रकरण, भूमि घोटाला, भ्रष्टाचार, बिगड़ रही कानून व्यवस्था, महंगाई, बिजली-पानी, अहम पदों पर रिटायर अधिकारियों को लगाने से जैसे मुददे लेकर जनता के सामने जाएगी।
एसवाईएल पर गरमाई सियासत
हरियाणा में एसवाईएल का मुद्दा बड़ा है। हालांकि लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा उतना नहीं गरमाया जितना विधानसभा चुनाव में गूंजने की संभावना है। हरियाणा विधानसभा के अंतिम सत्र में भी यह मुद्दा गूंजा था। इसके बाद स्पीकर ने इसमें सर्वदलीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी को प्रधानमंत्री से मिलना है।
उधर, 16 को अमित शाह की रैली में चौधरी बीरेंद्र सिंह ने एसवाईएल का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ से आने वाले पानी और एसवाईएल का पानी हरियाणा को मिल जाए तो यहां की कायापलट जाएगी।
उधर, हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई पहले ही यह कह चुके हैं कि यदि भाजपा चुनाव से पहले हरियाणा को एसवाईएल का पानी दिलवाती है तो वे अपनी पार्टी का विलय करने को तैयार हैं।
अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण इस मसले के छाए रहने की संभावना है। कांग्रेस ने पिछले दो चुनाव में इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया था।
इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इसका लाभ लेने से नहीं चूकेगी। चूंकि धार्मिक मसला है इसीलिए खुलकर कोई विपक्षी दल भी नहीं बोलेगा, लेकिन कांग्रेस को इसका लाभ लेने से रोकने के लिए विपक्ष कोई न कोई हथकंडा जरूर अपना सकता है।
विकास में भेदभाव का मुद्दा:
विकास में भेदभाव के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने हमेशा कांग्रेस पर उंगली उठाई है। नौकरियों में भेदभाव का मामला भी हरियाणा विधानसभा में विपक्ष ने उठाया है।
सभी दल विधानसभा चुनाव में इस मुददे को जोर-शोर से उठाकर फायदा लेने के लिए प्रयासरत रहेंगे। उत्तर हरियाणा के नेता विकास की अनदेखी के मुद्दे को लेकर कमर कसे बैठे हैं। अहीरवाल में भी विकास और नौकरियों में अनदेखी का मुद्दा विपक्ष उठाएगा।
यह भी रहेंगे मुद्दे
हरियाणा में बड़े मुद्दों के अलावा अन्य राज्यस्तरीय मुद्दे भी हावी रहेंगे। विधानसभा चुनाव में बड़े मुद्दों के अलावा जिला और प्रत्येक विधानसभा स्तर पर अलग-अलग मुद्दे हैं जो प्रत्याशियों के माध्यम से सभी दल उठाएंगे।
भाजपा तैयार कर रही आरोप पत्र:
मुद्दो की इस लड़ाई की जंग में भाजपा ने अपना आरोप पत्र लगभग बना कर तैयार कर लिया है। इस आरोप पत्र के जरिये भाजपा चुनाव में मुद्दों को जनता के सामने रखेगी। पार्टी का मानना है कि आरोप पत्र में उठाए गए सभी मुद्दे गहन जांच के बाद प्रभावी ढंग से रखे जाएंगे।