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हरियाणा विधानसभा बजट सत्र: धर्म परिवर्तन निवारण विधेयक पेश, जोरदार हंगामे के बीच कांग्रेस ने किया वॉकआउट

Fri, 04 Mar 2022 01:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 04 Mar 2022 01:09 PM IST
सार

अब हरियाणा विधानसभा में लोकसभा की तर्ज पर शुरू किए शून्यकाल के लिए अब नई व्यवस्था लागू होगी। विधायकों को बारी-बारी से तीन मिनट न बुलवाकर एक दिन के लिए दस विधायकों के नाम का ड्रा निकाला जाएगा। एक घंटे में ये विधायक छह-छह मिनट बोलेंगे।

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Haryana Assembly Budget Session Third Day Updates
वॉकआउट कर बाहर आते कांग्रेस विधायक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को जबरन धर्मांतरण से जुड़े विधेयक पर जोरदार हंगामा हुआ। वरिष्ठ विधायक रघुबीर कादियान ने इसे समाज को बांटने वाला बताते हुए विधेयक की प्रति फाड़ डाली। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने इसे सदन की तौहीन बाते हुए उन्हें बजट सत्र की शेष बैठकों से निलंबित कर दिया। निलंबन प्रस्ताव संसदीय कार्यमंत्री कंवर पाल ने प्रस्तुत किया। कांग्रेस विधायक निलंबन को गलत बताते हुए वेल में पहुंच गए और शोर-शराबे के बाद वॉकआउट कर दिया।

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शून्यकाल के तुरंत बाद गृह मंत्री अनिल विज ने सदन में चर्चा के लिए हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन निवारण विधेयक, 2022 पेश किया। विधेयक को सदन पटल पर रखते ही कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। वार-पलटवार के दौरान कादियान की गृह मंत्री के साथ बहस हो गई। दोनों गुस्सा गए। कादियान ने विज की ओर देखते हुए मुट्ठी भींची। सदन का माहौल गर्माने से कांग्रेस, भाजपा विधायक आमने-सामने आ गए और तीखी बहस हुई। 
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भाजपा सदस्यों ने पप्पूगिरी नहीं चलेगी तो कांग्रेस विधायकों ने दादागिरी नहीं चलेगी, के नारे लगाए। माहौल इतना गर्म हो गया कि स्पीकर को मार्शल बुलाने पड़े। मार्शल को निर्देश दिए गए कि वे कादियान को बाहर ले जाएं। इस पर कांग्रेस विधायकों ने उनके चारों ओर घेरा बना लिया। मार्शल इससे पहले उन्हें बाहर ले जाते, सभी कांग्रेस विधायक वॉकआउट कर गए।  

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दोपहर के भोजन के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही निलंबन वापसी की मांग करते हुए फिर हंगामा किया। कादियान के खिलाफ की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए स्पीकर अपने निर्णय पर कायम रहे। कांग्रेस विधायक कार्यवाही का बहिष्कार कर बाहर चले गए और वापस नहीं लौटे। कादियान इससे पहले विधानसभा में वापस लिए जा चुके तीन केंद्रीय कृषि कानूनों की प्रति भी फाड़ चुके हैं।

कादियान का प्रति फाड़ना कानूनी दस्तावेज का अपमान: मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि रघुबीर कादियान का विधेयक की प्रति फाड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विधानसभा में प्रस्तुत कानूनी दस्तावेज का अपमान और सदन की मर्यादा का हनन है। ऐसा करने वाले सदस्यों का मामला विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाएगा। विधेयक किसी को बांटने के लिए नहीं, बल्कि समाज में सौहार्द एवं भाईचारा बनाए रखने के लिए है। 

पिछले दिनों धोखे, लालच, विदेश ले जाने, व्यवसाय बनाने के नाते व घर से भाग कर धर्म परिवर्तन करने की यमुनानगर, पानीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम व नूहं में काफी घटनाएं हुई हैं। ये चिंताजनक हैं। कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। देश में अलग-अलग राज्यों ने इस तरह के कानून बनाए हैं।

मुख्यमंत्री के कड़े रुख से भड़के कांग्रेसी
मुख्यमंत्री ने सदन में पुन: स्थापित धर्म परिवर्तन निवारण विधेयक, 2022 पर कहा कि यह किसी व्यक्ति को इच्छापूर्वक धर्म परिवर्तन करने से नहीं रोकता। बशर्ते, उसे डीसी के पास आवेदन करना होगा। अगर सामने की सीटों पर बैठे साथी चाहें तो अपना धर्म बदल सकते हैं। इससे कांग्रेस गीता भुक्कल, आफताब अहमद, राव दान सिंह, बीबी बत्रा, रघुबीर कादियान, बीएल सैनी, शमशेर गोगी इत्यादि विधायक भड़क गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपने शब्द वापस लेने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची तो वह उन्हें पास लेते हैं।

स्पीकर के आग्रह पर भी नहीं माने कादियान
स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने निलंबन आदेश जारी करने से पहले रघुबीर कादियान से आग्रह किया कि वह सदन से माफी मांग लें। कादियान काफी न मांगने पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि वह स्पीकर की भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन इससे ऊपर कोई पश्चाताप नहीं है। स्पीकर विधानसभा के नियमानुसार बताएं कि विधेयक प्रस्तुत होने के बाद कानूनी दस्तावेज बन जाता है। गुप्ता ने कहा कि आप स्पीकर रह चुके हैं, प्रति फाड़ना आपको शोभा नहीं देता। यह प्रथा बंद करनी होगी।

देश का बंटवारा धर्म के आधार पर कांग्रेस ने करवाया: विज
गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर कांग्रेस ने करवाया है। वर्ष 1984 में धर्म के आधार पर सिखों का कत्लेआम करवाया गया। धर्म परिवर्तन निवारण विधेयक, 2022 में किसी एक धर्म या समुदाय का जिक्र नहीं है। इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई का कोई भी उल्लेख नहीं। 

केवल किसी धर्म में लालच व भय से परिवर्तन करने की बात है। हर आदमी को अपने धर्म को मानने व संचालित करने का अधिकार है लेकिन डर व लालच, प्रलोभन या डिजिटल ढंग के उपयोग सहित कपट से धर्म परिवर्तन का अधिकार नहीं है। विज ने विपक्ष से आग्रह करते हुए कहा कि अपने जहन से सांप्रदायिकता को निकाल दे। हिंदुस्तान का बंटवारा हिंदू व मुसलमान के आधार पर हुआ यह शाश्वत सत्य है।

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