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सुखपाल खैरा देश बांटने वालों का समर्थन कर रहे और केजरीवाल चुप बैठे हैं: हरसिमरत कौर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Jun 2018 01:18 PM IST
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हरसिमरत कौर बादल
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केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 'आप' नेता सुखपाल खैरा पर भड़ास निकालते हुए तीखे तंज कसे। मंत्री हरसिमरत कौर ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता देश को बांटने वाले लोगों का समर्थन कर रहे हैं और केजरीवाल चुपचाप बैठे हैं। सुखपाल सिंह खैरा कौन से डॉलर की भाषा बोल रहे हैं और उन्हें वो डॉलर कौन सा देश दे रहा है।
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It's disgraceful that a prominent leader of Punjab is supporting people who want to divide India & Kejriwal is not saying a word. Sukhpal Khaira kaunse dollar ki bhaasha bol rahe hain, woh dollar unko kaunse desh de rahe hain: Harsimrat Kaur Badal, Union Minister pic.twitter.com/M6B4Fm7xUX
— ANI (@ANI) June 19, 2018विज्ञापन
ये है सुखपाल खैरा का बयान
Sukhpal Singh Khaira
सिखों के अलग राज्य की मांग संबंधी रेफरेंडम-2020 का समर्थन करने संबंधी खबरों का खंडन करते हुए नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने कहा है कि भले ही उन्होंने कभी इसका समर्थन नहीं किया लेकिन वे यह स्वीकार करने से नहीं झिझकते कि यह बंटवारे के बाद की केंद्र सरकारों के सिखों के प्रति पक्षपात और सौतेले व्यवहार का ही नतीजा है।
शनिवार को जारी एक बयान में खैरा ने कहा कि यह सिखों और पंजाबियों की महान कुर्बानियों का ही नतीजा है कि भारत ने आजादी हासिल की। भले ही ब्रिटिश सरकार ने सिखों को अलग पूर्ण राज्य की पेशकश की थी लेकिन सिखों ने भारत का हिस्सा बनने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि बंटवारे का सबसे ज्यादा संताप सिखों ने झेला जब उन्हें पूरी तरह उजड़कर भारत आना पड़ा। खैरा ने इसके साथ ही भाषाई आधार पर, पानी के बंटवारे, आपरेशन ब्लू स्टार और 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए केंद्र की सरकारों द्वारा सिखों से भेदभाव किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अपनी सिख विरोधी नीतियों पर दोबारा विचार करना चाहिए।
शनिवार को जारी एक बयान में खैरा ने कहा कि यह सिखों और पंजाबियों की महान कुर्बानियों का ही नतीजा है कि भारत ने आजादी हासिल की। भले ही ब्रिटिश सरकार ने सिखों को अलग पूर्ण राज्य की पेशकश की थी लेकिन सिखों ने भारत का हिस्सा बनने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि बंटवारे का सबसे ज्यादा संताप सिखों ने झेला जब उन्हें पूरी तरह उजड़कर भारत आना पड़ा। खैरा ने इसके साथ ही भाषाई आधार पर, पानी के बंटवारे, आपरेशन ब्लू स्टार और 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए केंद्र की सरकारों द्वारा सिखों से भेदभाव किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अपनी सिख विरोधी नीतियों पर दोबारा विचार करना चाहिए।