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Hindi News ›   Chandigarh ›   Harmohinder Singh Chattha about Prakash Singh Badal and HSGPC

'इस्तीफा देने का बहाना ढूंढ रहे हैं मुख्यमंत्री बादल'

Tue, 22 Jul 2014 02:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 22 Jul 2014 02:40 PM IST
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Harmohinder Singh Chattha about Prakash Singh Badal and HSGPC

हरियाणा एसजीपीसी के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के इस्तीफे की चर्चा को वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह ने राजनीतिक स्टंट बताया है। उन्होंने कहा कि बादल साहब तो इस्तीफे के लिए पहले से ही तैयार हैं।

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चुनाव से पहले अपने बेटे को सत्ता सौंपना चाहते है। वे तो बस एक बहाना ढूंढ रहे थे। चट्ठा ने कहा कि पंजाब हरियाणा की अलग कमेटी के मामले में तनाव में इसीलिए है कि केंद्र सरकार के सामने ज्यादा आंसू बहा सके।
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पंथ से निष्कासन संबंधी सवाल पर चट्ठा ने कहा कि मैं सिख हूं और सिख ही रहूंगा। अकाल तख्त पर पेश होने के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी उन्हें कोई चिट्ठी नहीं मिली है।
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हालांकि पूर्व में चली आ रही मर्यादा के मुताबिक मुझे वहां जाना चाहिए, लेकिन आगे क्या करना है यह जब चिट्ठी मिलेगी तब देखा जाएगा। संभावना है कि आज कल में चिट्ठी मिल जाएगी।

गुरुद्वारों में जबरन कब्जा नहीं करेगी सरकार

Harmohinder Singh Chattha about Prakash Singh Badal and HSGPC

हरियाणा सरकार जबरदस्ती राज्य के गुरुद्वारों में प्रवेश करके एचएसजीपीसी को कब्जा नहीं दिलवाएगी।  मैं निहंग सिखों की इज्जत करता हूं, यह हमारी मर्यादा में है, लेकिन हथियार लेकर आना उचित नहीं है।

यह बातें हरियाणा के वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहीं। हालांकि एडहॉक कमेटी के शीघ्र गठन की बात उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर छोड़ दी।

उन्होंने कहा कि जबरदस्ती कब्जा लेना सरकार का काम नहीं है और सब कुछ मर्यादा के मुताबिक होना चाहिए। उन्होंने संभावना जताई कि अकाली दल (हरियाणा) और अकाली दल (पंजाब) दोनों के द्वारा बातचीत के माध्यम से भी यह मामला सुलझ सकता है, लेकिन पुलिस गुरुद्वारों में प्रवेश नहीं करेगी।

एचएसजीपीसी बिल संवैधानिक, वापस नहीं लिया जाएगा

Harmohinder Singh Chattha about Prakash Singh Badal and HSGPC

उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा में पारित बिल संवैधानिक है। इसे वापस नहीं लिया जाएगा। एसजीपीसी की ओर से जारी विज्ञापन पर चट्ठा ने कहा कि यह पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाला है।

चट्ठा ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने ही अलग से पंजाबी सूबे की मांग की। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत हरियाणा का गठन हुआ।

इस अधिनियम की धारा 72 के तहत उत्तराधिकारी राज्य अलग से गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के गठन के लिए सशक्त है। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के कार्यकाल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार बनाए गए थे।

इसके अलावा, 1925 के अधिनियम में 14 बार संशोधन हो चुके हैं। जबकि लगभग 12-13 संशोधन तो पंजाब के विभाजन के बाद हो चुके है। तब से लेकर अब तक न तो पंजाब को कोई आपत्ति थी और न केंद्र को।

चट्ठा ने कहा कि बिल के क्रियान्वयन के लिए ‘हरियाणा सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग’ तथा ‘गुरुद्वारा चुनाव आयोग’ का गठन किया जाएगा।

दोनों आयोग के गठन एवं संचालन का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इस प्रकार, आयोगों के गठन व कर्मचारियों के वेतनमान पर होने वाला खर्च सरकार के खजाने से होगा।

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