Chandigarh News: स्मॉग आंखों को दे रहा मर्ज, बच्चे सबसे ज्यादा शिकार, ऐसे रखें अपना ख्याल
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण आंखों में जाने पर समस्याएं पैदा करते हैं। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आंखों की झिल्लियों में जाने पर नुकसान पहुंचाते हैं।
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दिवाली के बाद दिनों दिन बढ़ता प्रदूषण अलग-अलग रूप में शरीर के अंगों को प्रभावित कर रहा है। इन दिनों स्मॉग का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। इससे सबसे ज्यादा आंखें प्रभावित हो रही हैं। आंखों में जलन, खुजली, पानी गिरने की समस्या की शिकायत छोटे बच्चे सबसे ज्यादा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल में ज्यादा देर तक एक्सपोजर होने के कारण उनकी आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इससे बचने के लिए बच्चों के साथ बड़े भी बचाव के उपायों का कड़ाई से पालन करें।
जीएमएसएच-16 के नेत्र रोग विभाग के डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि इस तरह की समस्या होने पर किसी भी दवा का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। आंखों को आराम देने के लिए आंखें बंद करके उस पर पानी का छींटे मारें। ठंडे पानी में रुई डुबोकर उससे आंखों को पोंछे, धूल, धूप और धुएं से बचें।
घर से बाहर निकलते समय चश्मे का प्रयोग अवश्य करें। ज्यादा मात्रा में पानी पिएं और पोषक तत्व आहार में शामिल करें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो और संक्रमण फैलने का खतरा कम हो। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण आंखों में जाने पर समस्याएं पैदा करते हैं। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आंखों की झिल्लियों में जाने पर नुकसान पहुंचाते हैं।
इसका रखें ध्यान
- आंखों में जलन होने पर रगड़ना नहीं चाहिए क्योंकि प्रदूषण में मौजूद कण रगड़ने की वजह से आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं
- आंख में जलन या लालिमा होने पर खुद से किसी भी तरह के आई ड्राप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
- गंभीर स्थिति में प्रदूषण के पहुंचने पर आपको आंखों की रक्षा के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए
- ज्यादा प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए
स्मॉग में सांस लेना मुश्किल
धुआंसा (स्मॉग) दो शब्दों धुआं (स्मोक) और कोहरे (फॉग) से मिलकर बना है जिसकी वजह से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह एक पीला या काला कोहरा होता है जो वायु प्रदूषण के एक मिश्रण से बना है, जिसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर आक्साइड आदि गैसें होती है ।
स्मॉग में ये खतरनाक तत्व होते हैं शामिल
वाहन के धुएं, निर्माण कार्य की धूल, खुले में जलने वाले कूड़े का धुआं, इनसीनेरेटरर्स, कारखाने, लॉन परिवाहक, कोयला आधारित बिजली उत्पादन स्टेशन से निकलने वाला जहरीला धुआं, डीजल और पेट्रोल वाहन, सॉल्वेंट्स, क्लीनर और तेल पेंट, कीटनाशकों और प्रदूषक से मिलकर स्मॉग बनता है।
ये भी खतरे की चपेट में
- बच्चों के फेफड़े विकास कर रहे हैं और ज्यादा समय बाहर खेलने में बिताते हैं ऐसे में उनमें सांस लेने के दौरान अधिक प्रदूषण से प्रभावित होने का खतरा रहता है।
- अस्थमा की समस्या से ग्रस्त लोगों को
- हृदयरोग व मधुमेह के रोगियों को भी
- बुजुर्गों को उच्च जोखिम न केवल अपनी उम्र की वजह से है बल्कि उनके कमजोर दिल, फेफड़े और प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण भी हैं
- एलर्जी से प्रभावित लोग, गर्भवती महिलाओं और धूम्रपान करने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है