यूक्रेन संकट: सकुशल लौटा अबोहर का हरजिंदर सिंह, खुशी से छलके मां-बाप के आंसू, पोलैंड पहुंचीं राजपुरा की जसप्रीत
सात दिन भूखी प्यासी जसप्रीत आखिरकार यूक्रेन के दहशत भरे माहौल से निकलकर पोलैंड पहुंच गई। पोलैंड पहुंचते ही जब जसप्रीत ने कॉल अपने परिवार को की तो परिजनों ने राहत की सांस ली।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
खारकीव से सुरक्षित अबोहर के भगवानपुरा निवासी मेडिकल का विद्यार्थी हरजिंदर सिंह जैसे अपने घर पहुंचे तो खुशी में परिजनों के आंसू झलक पड़े। अपने जिगर के टुकड़े को सामने देख उनके माता-पिता भावुक हो गए। अब भी कई छात्र यूक्रेन में फंसे हैं। जिनकी वापसी के लिए उन्होंने दुआ की।
यूक्रेन से घर लौटे हरजिंदर सिंह के पिता गुरचरण सिंह ने बताया उनका बेटा गुरुवार की सुबह यूक्रेन से दिल्ली पहुंचा और देर रात अबोहर से घर आया। हरजिंदर सिंह ने सकुशल घर लौटने पर भगवान का धन्यवाद किया। उन्होंने पंजाब सरकार की घोर लापरवाही का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में देश के सभी राज्यों ने अपने राज्यों के बच्चों को ले लाने का इंतजाम किया गया है। वहां पहुंचने वाले लोग अपने-अपने राज्यों के बच्चों को आवाज लगाकर बुला रहे हैं लेकिन पंजाब ने वहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं देखा किया है।
हरजिंद्र सिंह पिता गुरचरण सिंह व माता चरणजीत कौर ने अपने बेटे की सशुकल वापसी के लिए परमात्मा व भारत सरकार का आभार जताया और अपील की है कि अभी जो छात्र वहां फंसे हैं, उनकी वापसी के प्रयास तेज किए जाने चाहिए। हरजिंदर सिंह जब अपने घर वापस पहुंचा तो पूरे मोहल्ले के लोगों ने उनका स्वागत किया और मुंह मीठा करवाया। हरजिंदर सिंह ने बताया कि अबोहर का एक और युवक पुनीत यूक्रेन से सुरक्षित निकल चुका है व आज-कल में भारत पहुंच जाएगा।
राजपुरा की जसप्रीत पहुंचीं यूक्रेन
सात दिन भूखी प्यासी जसप्रीत आखिरकार यूक्रेन के दहशत भरे माहौल से निकलकर पोलैंड पहुंच गई। पोलैंड पहुंचते ही जब जसप्रीत ने कॉल अपने परिवार को की तो परिजनों ने राहत की सांस ली। जसप्रीत कौर के पिता घनौर के उलाणा निवासी बिंदरपाल सिंह व माता सुरिंदर कौर ने बातया कि नवंबर-2021 में बेटी जसप्रीत कौर को यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में पढ़ने भेजा था।
साढ़े तीन माह बाद ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ गया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी और साथियों ने यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में शरण ली। दो से तीन दिन तक तो वह कुछ खा नहीं सकी। हमने कॉल किया तो पता चला कि चारों ओर बमबारी हो रही है और सारे रास्ते बंद हैं। मेरे साथ भारतीय दोस्त होने की वजह से कुछ राहत भी रही। लगातार हो रहे धमाकों से कलेजा कांप उठा।
गुरुवार रात को बेटी पहुंची पोलैंड
बिंदरपाल सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे मेरी बेटी जसप्रीत और उसकी दोस्त खारकीव के बंकर से निकलकर 20 किमी पैदल चलकर बुक्साल के रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सारी रात सफर कर गुरुवार की शाम चार बजे वह यूक्रेन के अंतिम शहर लवीव में पहुंची। यहां से उन्होंने टैक्सी ली और भारतीय झंडा लगाकर रात 8.30 बजे के करीब पोलैंड पहुंची। वहां शेल्टर में भारतीय लोगों ने उनका जबरदस्त स्वागत किया तो हमारी परेशानी काफी हद तक खत्म हो गयी। उन्होंने कहा कि अब जसप्रीत रविवार को गांव उलाणा पहुंच जाएगी।
लोन पर पैसे लेकर बेटी को भेजा था यूक्रेन
बिंदरपाल सिंह ने बताया कि वह चंडीगढ़ में होमगार्ड के पद पर तैनात हैं। उनकी इच्छा थी कि वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाएं। उन्होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी (खारकीव) में 14 लाख रुपये लोन पर पैसे लेकर जमा करवा दिए थे। तीन माह बाद ही बेटी को वापस आना पड़ गया। उन्होंने सरकार से अपील की है कि यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा लेने वाले सभी शिक्षार्थियों को कम रेट या सब्सिडी पर उनकी शिक्षा पूरी करवाएं। जिससे जो सपने उनके परिजनों ने देखे वह पूरे हो सकें। उन्होंने भारत सरकार का धन्यवाद दिया और कहा कि देश के 20 हजार विद्यार्थियों को यूक्रेन से निशुल्क भारत लाने का कार्य सराहनीय है।