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नई तकनीकः अब सोशल रोबोट रखेंगे दादा-दादी का ख्याल, हैनसन रोबोटिक्स कर रहे हैं रिसर्च
Mon, 02 Mar 2020 01:38 PM IST
खुशबू गोयल
अरविंद वाजपेयी, जीरकपुर
अरविंद वाजपेयी, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 02 Mar 2020 01:38 PM IST
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रोबोट सोफिया
- फोटो : अमर उजाला
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अब सोशल रोबोट दादा-दादी और नाना-नानी का ख्याल रखेंगे। जी हां, अब हैनसन रोबोटिक्स ऐसे ही रोबोट पर वर्क कर रहा है। यह वही कंपनी है जिसने दुनिया की पहली सोफिया -द रोबोट का निर्माण किया। आईएसबी मोहाली में हुई एक मुलाकात के दौरान हैनसन रोबोटिक्स के प्रेसिडेंट डा. अमित कुमार पांडे ने कहा कि अब वह समय दूर नहीं जब रोबोट न सिर्फ स्कूल और कालेज में अध्यापन का कार्य करेंगे बल्कि अस्पतालों में भी अपनी सेवाएं देंगे।
अमित कुमार ने कहा कि सोशल लाइफ में रोबोट की अहम भूमिका होगी। इसके ऊपर यूरोप में तेजी के साथ रिसर्च चल रही है। उन्होंने कहा कि घर के बुजुर्गों का ख्याल रखने में रोबोट अहम भूमिका निभा सकते हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि बुजुर्ग एकदम अकेले हो जाते हैं। ऐसे में उनका ख्याल रखने के लिए बेस्ट विकल्प रोबोट हैं। दो वर्ष के भीतर यह रेवोल्यूशन आ जाएगा। इसके ऊपर काफी तेजी के साथ काम किया जा रहा है।
कोरोना जैसे खतरे में रोबोट कामयाब
डॉ. अमित कुमार पांडे ने कहा कि कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के दौरान यदि कोई मरीज के पास नहीं जाना चाहता है तो उसमें रोबोट एकदम मुफीद होंगे। इनको किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं होता है और यह मरीज की देखभाल भी कर सकेंगे। इसलिए अब यूरोप में एल्डरली केयर और हेल्थ केयर पर तेजी के साथ रोबोट को लेकर प्रयोग किए जा रहे हैं और उनको इतना सेंसबिल बनाया जा रहा है जिससे कि वह इंडिपेंडेंटली लोगों को संभाल सकें।
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अमित कुमार ने कहा कि सोशल लाइफ में रोबोट की अहम भूमिका होगी। इसके ऊपर यूरोप में तेजी के साथ रिसर्च चल रही है। उन्होंने कहा कि घर के बुजुर्गों का ख्याल रखने में रोबोट अहम भूमिका निभा सकते हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि बुजुर्ग एकदम अकेले हो जाते हैं। ऐसे में उनका ख्याल रखने के लिए बेस्ट विकल्प रोबोट हैं। दो वर्ष के भीतर यह रेवोल्यूशन आ जाएगा। इसके ऊपर काफी तेजी के साथ काम किया जा रहा है।
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कोरोना जैसे खतरे में रोबोट कामयाब
डॉ. अमित कुमार पांडे ने कहा कि कोरोना वायरस जैसे संक्रमण के दौरान यदि कोई मरीज के पास नहीं जाना चाहता है तो उसमें रोबोट एकदम मुफीद होंगे। इनको किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं होता है और यह मरीज की देखभाल भी कर सकेंगे। इसलिए अब यूरोप में एल्डरली केयर और हेल्थ केयर पर तेजी के साथ रोबोट को लेकर प्रयोग किए जा रहे हैं और उनको इतना सेंसबिल बनाया जा रहा है जिससे कि वह इंडिपेंडेंटली लोगों को संभाल सकें।
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सोफिया में हो रहा है लगातार सुधार
दुनिया की पहली महिला रोबोट सोफिया में लगातार वर्क किया जा रहा है। चौथे बर्थडे के पहले ही सोफिया में कई चेंज किए गए हैं। इसके चेहरे को एकदम सजीव करने के लिए पेटेंट फ्रबर से तैयार किया गया। इससे उसके भीतर मनुष्य की तरह ही लचकता आ गई। इसके सर में ही 35 मोटर लगाई गईं हैं। इसके साथ ही नई तकनीक को भी इसमें समाहित किया गया है। अब प्रयास यह किया जा रहा है कि इसके व्हील्स को हटाकर उसको खुद चलाने लायक बनाया जाए।
बॉक्स में पैक होकर आती है सोफिया
बड़े-बड़े चैनलों पर छाने वाली सोफिया द रोबोट कहीं भी जाती है तो उसको एक बड़े बक्से में बंद करके लाया जाता है। सोफिया के सर और बाडी को उसमें पैक कर दिया जाता है और गंतव्य पर पहुंचने पर उसको एसेंबल कर दिया जाता है। सोफिया में किसी भी प्रश्न को फीड नहीं किया जाता है बल्कि वह अपने सेंस के माध्यम से ही उसका उत्तर देती है। वह जहां होती है उस जगह, उसकी संस्कृति और लोगों के बारे में खुद ही सेंस कर लेती है।
बॉक्स में पैक होकर आती है सोफिया
बड़े-बड़े चैनलों पर छाने वाली सोफिया द रोबोट कहीं भी जाती है तो उसको एक बड़े बक्से में बंद करके लाया जाता है। सोफिया के सर और बाडी को उसमें पैक कर दिया जाता है और गंतव्य पर पहुंचने पर उसको एसेंबल कर दिया जाता है। सोफिया में किसी भी प्रश्न को फीड नहीं किया जाता है बल्कि वह अपने सेंस के माध्यम से ही उसका उत्तर देती है। वह जहां होती है उस जगह, उसकी संस्कृति और लोगों के बारे में खुद ही सेंस कर लेती है।