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Hindi News ›   Chandigarh ›   handicraft and handloom based exhibition in chandigarh lajpat rai bhawan

एक छत के नीचे हैंडीक्राफ्ट से लेकर हैंडलूम तक सब कुछ, देखने आएं

Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
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handicraft and handloom based exhibition in chandigarh lajpat rai bhawan
हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन
चंडीगढ़वासियों के लिए बड़े काम की खबर। एक छत के नीचे हैंडीक्राफ्ट से लेकर हैंडलूम तक सब कुछ मिलेगा। आसामी सिल्क से लेकर, बाहा कॉटन, एंब्रॉयड्री, नागालैंड के विंटर वियर, प्रिंटेड साडि़या और मेरठ की खादी शर्ट से लेकर जूट और बैंबों से बने हैंडलूमस की वैरायटी आपको शहर में मिल रही है। दरअसल, सेक्टर 15 स्थित लाजपत राए भवन में सोमवार को नॉर्थ इस्ट एग्जिबिशन शुरू हुई है, जोकि 11 अक्टूबर तक चलेगी।
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इस प्रदर्शनी में असम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश के हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम्स के 35 स्टॉल लगे हुए हैं, जहां लोगों नार्थ इस्ट की ट्रैडिशनल ड्रेसेज से लेकर सूट्स, साड़ी, बैग, बर्तन और होम डैकोर का सामान खरीदने को मिलेगा।
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प्रदर्शनी में महिलाओं के लिए आर्टिफिशियल जूलरी से जुड़ी चीजें भी हैं। प्रदर्शनी में मुगा सिल्क, पाट सिल्क फैब्रिक की साडि़यों के अलावा असम की ट्रैडिशनल ड्रेस मेखला चादर भी है। इसके अलावा त्रिपुरा की बाहा कॉटन, बालुचरी सिल्क और  जमदानी साडि़या भी शामिल हैं।
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जूट और बैंबो के हैंडबैग
प्रदर्शनी में असम के विशवजीत के स्टॉल पर जूट और बैंबो से बने बैग की भी वैरायटी मिल रही है। इनमें पर्स, मोबाइल बैग, स्लिंग बैग, लंच बैग भी शामिल हैं। जिनकी कीमत 100 से लेकर 650 रुपए तक है।

होम डैकोर में त्रिपुरा के लैंप बने आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी में होम डैकोर में बैंबो से बनी मूर्तियां, लैंप, टेबल, एकसेसोरिजी भी शामिल हैं। इसके अलावा हैंडमेड फ्लावर भी प्रदर्शनी में मिल रहे हैं। वहीं त्रिपुरा के मल्टीकलर लैंप प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।


मणिपुर के पत्थर के बर्तन भी हैं यहां
मणिपुर की अहान सासा के स्टॉल पर पत्थर के बर्तन मिल रहे हैं। अहान बताती हैं कि यह पत्थर मणिपुर में लांगपी गांव में ही मिलता है, और इन बर्तनों की खासियत यह है कि यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक हैं। यह ब्लैक कलर का होता है। और इन्हें बनाने से पहले पत्थर को क्रश करना पड़ता है उसके बाद उसे नियमित आकार दिया जाता है। इसमें बनाए गए खाने का स्वाद भी अलग होता है।
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