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गुरु तेग बहादुर की हस्त लिखित पोथी के दर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 15 Apr 2014 12:53 PM IST
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टिकाणा बाबा काहन सिंह गुरुद्वारा में बैसाखी पर्व पर गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। संगत गुरु तेग बहादुर की हस्त लिखित पोथी के दर्शन कर निहाल हो गई।
सनौली रोड स्थित टिकाणा बाबा काहन सिंह गुरुद्वारा में रविवार को बैसाखी धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में जालंधर से पहुंचे स्वामी सांतानंद महाराज ने गुरु महिमा का गुणगान किया।
उन्होंने कहा कि बैसाखी पर्व खुशहाली का प्रतीक है। खेत में फसल पककर तैयार हो जाती है। इस खुशी को नाच-गाकर मनाया जाता है। फसल पकने की बधाइयां बांटने की परंपरा है।
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उन्होंने कहा कि हम सभी को गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। सिख धर्म के गुरुओं ने हमेशा हिंदू धर्म की रक्षा की और जरूरतमंदों की सहायता के लिए संघर्ष किया। गुरु नानक देव ने एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हुए समान समाज का संदेश दिया।
सतनाम सिंह ने बताया कि दूर-दराज से पहुंच संगत को देर रात को गुरु तेग बहादुर की हस्त लिखित पोथी के दर्शन कराए गए। उन्होंने बताया कि गुरु द्वारा लिखी पोथी के दर्शन वर्ष में एक बार बैसाखी के दिन कराए जाते हैं।
इस दिन का संगत बेसब्री से इंतजार करती है। गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। इस मौके पर ईश्वर बठला, गुरुद्वारा प्रबंधक जीवन दास बठला, अशोक बठला और भगवान दास बठला मौजूद रहे।
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सनौली रोड स्थित टिकाणा बाबा काहन सिंह गुरुद्वारा में रविवार को बैसाखी धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में जालंधर से पहुंचे स्वामी सांतानंद महाराज ने गुरु महिमा का गुणगान किया।
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उन्होंने कहा कि बैसाखी पर्व खुशहाली का प्रतीक है। खेत में फसल पककर तैयार हो जाती है। इस खुशी को नाच-गाकर मनाया जाता है। फसल पकने की बधाइयां बांटने की परंपरा है।
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उन्होंने कहा कि हम सभी को गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। सिख धर्म के गुरुओं ने हमेशा हिंदू धर्म की रक्षा की और जरूरतमंदों की सहायता के लिए संघर्ष किया। गुरु नानक देव ने एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हुए समान समाज का संदेश दिया।
सतनाम सिंह ने बताया कि दूर-दराज से पहुंच संगत को देर रात को गुरु तेग बहादुर की हस्त लिखित पोथी के दर्शन कराए गए। उन्होंने बताया कि गुरु द्वारा लिखी पोथी के दर्शन वर्ष में एक बार बैसाखी के दिन कराए जाते हैं।
इस दिन का संगत बेसब्री से इंतजार करती है। गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। इस मौके पर ईश्वर बठला, गुरुद्वारा प्रबंधक जीवन दास बठला, अशोक बठला और भगवान दास बठला मौजूद रहे।