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हैंड ग्रेनेड बम ब्लास्ट मामला : तीखी बहस के बाद, अमृतसर से लाए आरोपियों का चार दिन का रिमांड मंजूर

Sat, 30 Nov 2024 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 30 Nov 2024 02:07 AM IST
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Hand grenade bomb blast case: After heated debate, four-day remand of accused brought from Amritsar approved
चंडीगढ़। सेक्टर-10 स्थित कोठी नंबर-575 में हैंड ग्रेनेड बम विस्फोट करने के मामले में अमृतसर से प्रोडक्शन वारंट पर लाए गए दो आरोपियों का रिमांड लेने के लिए शुक्रवार को एनआईए की स्पेशल कोर्ट में फिर से सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपियों का रिमांड लेने व नहीं लेने को लेकर दोनों पक्षाें के बीच तीखी बहस हुई और इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों की दलीलें दी गई। आखिर में कोर्ट ने आरोपी आकाशदीप उर्फ आकाश और अमरजीत का चार दिन का रिमांड मंजूर कर लिया।
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गौरतलब है कि कोठी नंबर-575 में हैंड ग्रेनेड बम से विस्फोट करने के मामले में बीते सप्ताह एनआईए की जांच टीम अमृतसर जेल में बंद दो आरोपी आकाशदीप उर्फ आकाश और अमरजीत को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई थी। जांच टीम ने एनआईए की स्पेशल कोर्ट से इन दोनों का रिमांड मांगा था, लेकिन आरोपी पक्ष इसका विरोध कर रहा था। ऐसे में रिमांड को लेकर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान एनआईए ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने आरोपियों का रिमांड लेने का पहला आवेदन 18 नवंबर को किया था जो कि घटना से 60 दिनों के अंदर था। जांच टीम ने बताया कि मौलवी हुसैन हाजी अब्राहम उमरी बनाम गुजरात राज्य और अन्य, एआईआर 2004 सुप्रीम कोर्ट केस के आदेशानुसार एनआईए 180 दिन तक मामले में आरोपियों को कोर्ट के आदेशों पर हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर सकती है। बाकायदा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 43-डी में इसका संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है।
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आरोपी पक्ष ने इसके जवाब में कहा कि गौतम नवलखा बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी, 2022 (13) सुप्रीम कोर्ट केस (पैरा 166) के फैसले अनुसार रिमांड का आवेदन अनुरक्षणीय नहीं है क्योंकि रिमांड लेने का समय बीत चुका है। बाकायदा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 43-डी और बीएनएस 2023 की धारा 185 के क्लाॅज में भी यह स्पष्ट है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि निर्धारित कानून और प्रावधानों के अनुसार, जांच के दौरान 60 दिनों के भीतर 30 दिनों की पुलिस रिमांड प्राप्त की जा सकती है। लेकिन 18 नवंबर को एनआईए द्वारा दायर आवेदन आरोपियों के वारंट के लिए था, न कि पुलिस रिमांड के लिए। रिमांड के लिए आवेदन केवल 25 नवंबर को दायर किया गया है। आरोपी पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपियों की गिरफ्तारी गलत और दोषपूर्ण है, क्योंकि आरोपियों को पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया था।
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