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सऊदी अरब से छूटकर आए युवक ने सुनाई दर्द भरी कहानी, सरकार से की ये बड़ी मांग

Mon, 10 Sep 2018 09:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरदासपुर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरदासपुर (पंजाब) Updated Mon, 10 Sep 2018 09:34 AM IST
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Gurdaspur's Prince exiled from Saudi Arabia jail
सांकेतिक तस्वीर
सऊदी अरब की सफर जेल में बंद कमल मंजिदर सिंह उर्फ प्रिंस जेल से रिहा होकर वापस अपने वतन पहुंच गया है। प्रिंस शनिवार को ही सफर की जेल से रिहा होकर देर शाम दिल्ली पहुंचा। रविवार को वह गुरदासपुर पहुंचा। घर पहुंचे प्रिंस ने बताया कि सितंबर 2017 में वह एक ट्रेवल एजेंट को 2 लाख रुपये देकर सऊदी अरब गया था। एजेंट ने कहा था कि वह उसे वहां ट्राला चालक का काम दिलाएगा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद अब्बुतालिब कंपनी के मालिक ने उसे ट्राला चलाने का काम नहीं दिया। 
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7 महीने में सिर्फ 4 बार ड्राइविंग स्कूल ले गया, जिसके बाद उसका लाइसेंस बनकर आया तो कंपनी मालिक ने लाइसेंस छीन लिया। जब प्रिंस ने कंपनी के मालिक से 7 महीने का वेतन मांगा तो चोरी का इल्जाम लगाकर उसे जेल में बंद करा दिया। जेल में उसके साथ लुधियाना के गांव डल्ला निवासी हरदीप सिंह, मथुरा निवासी नसीम, इलाहाबाद निवासी विवेक भारती भी थे। प्रिंस ने बताया कि उन्होंने किसी तरह आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान का नंबर लेकर उनसे इस संबंध में बात की। 
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जिस पर मान ने कहा कि आप एक वीडियो बनाकर भेजें। हमने किसी तरह पुलिस से बच कर मोबाइल पर वीडियो बनाई और उसे भगवंत मान को भेजा। इसके बाद उन्होंने वो वीडियो वायरल की और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से इस संबंध में बात की। मीडिया में खबर आने के बाद भगवंत मान और सुषमा स्वराज के प्रयासों से पुलिस ने उसे व नसीम को रिहा कर दिया। लेकिन एयरपोर्ट पर आने पर नसीम के फिंगर प्रिंट मैच नहीं हुए, जिस कारण उसे दोबारा जेल भेज दिया गया।
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भारत के करीब 500 सऊदी की जेल में बंद 

Gurdaspur's Prince exiled from Saudi Arabia jail
सांकेतिक तस्वीर
सफर की जेल में चार माह की कैद से छूटकर आए प्रिंस ने बताया कि भारत को चाहिए कि वह सऊदी अरब का वीजा बंद करा दें या फिलीपींस सरकार की तरह काम करें। प्रिंस ने बताया कि भारत के करीब 500 लोग वहां की जेल में बंद हैं। बकरियां चराने वालों को दस दस दिन पुरानी रोटी भी नसीब होती है।

प्रिंस ने कहा कि जब सऊदी का वीजा लगता है तो एंबेसी के पास पूरी डिटेल होती है। लेकिन वहां कोई किसी की सुध नहीं लेता। उसने बताया कि वह जहां काम करता था, उससे करीब 500 किलोमीटर दूर एंबेसी थी। इस कारण वह एंबेसी नहीं पहुंच सका और न ही एंबेसी वालों ने उससे संपर्क किया। 

एंबेसी फिलीपींस के नागरिकों की करती है पूरी मदद
प्रिंस ने कहा कि सरकार को चाहिए कि फिलीपींस सरकार की तरह कार्य करें। वहां फिलीपींस के हर नागरिक के पहुंचने पर एंबेसी उनसे खुद संपर्क करती है। अगर कोई जेल में बंद हो गया तो एंबेसी उन्हें 100 रुपये हफ्ते का खर्च देती है और उनको छुड़वाने में मदद करती है। प्रिंस ने भारत सरकार का धन्यवाद करते हुए अपील की कि वहां फंसे युवकों को वापस लाया जाए।
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