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गुलदाउदी की 266 किस्में एक ही जगह हो रहीं तैयार, जानिए कैसे बनाई जाती हैं
नीरज कुमार /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 May 2018 12:37 PM IST
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चंडीगढ़ में गुलदाउदी शो
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चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-33 के टैरेस्ड गार्डन के सामने गुलदाउदी के 266 किस्मे तैयार की जा रही हैं। यह सभी किस्में नगर निगम की ओर से दिसंबर में आयोजित होनेवाला गुलदाउदी शो में प्रदर्शित किया जाएगा। अभी गुलदाउदी के मदर प्लांट को क्यारियों में लगाया गया है। मदर प्लांट बढ़ गए हैं और इनकी कटिंग होगी। कटिंग किए गए एक सौ पचास डंठलों को एक साथ बंडल बनाकर रेत में लगाया जाता है।
21 दिनों में इसमें जड़े आनी शुरू हो जाएंगी। जड़ें आने के बाद इसे जमीन में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है।
नवंबर में अपने शुरू होंगे फूल
इन गमलों में लगे गुलदाउदी में नवंबर के मध्य से फूल आना शुरू हो जाता है। दिसंबर के महीना में तो ये गुलदाउदी पूर्ण रूप से खिले मिलते हैं। इनकी देखभाल के लिए छह मालियों की स्थाई ड्यूटी लगाई गई है। पूर्ण रूप से खिलने के बाद ही पता चलता है कि यह किस वेराइटी की है।
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नगर निगम के हार्टिकल्चर विंग के एक्सईएन केपी सिंह का कहना है कि सेक्टर-33 के नर्सरी में सीजनल फूलों की पनीरी भी तैयार की जाती है। इनमें जीनिया, ग्लाडिया, कोचिया, गंभरीना, कांसकॉम, सलोसिया, कॉस्मॉस है। ये गरमी सीजन के फूल हैं। इसके अलावा सरदी के फूलों में सालविया, पेंजी, पिरोनिया, गेंदा, लैजम, बरबीना ये सभी सरदी के सीजन के फूल हैं।
इन दवाइयों का होता है स्प्रे
सैक्डोर, एरगॉन, क्लोड नाम की दवाईयां गुलदाउदी के पौधों और फूलों पर छिड़काव (स्प्रे) किया जाता है। इसके स्प्रे करने से पौधे मजबूत होते हैं। सरदी के सीजन में गुलदाउदी में सबसे पहले फूल आते हैं। इसके कारण फंगस और कीड़े इन पर हमला करते हैं। इससे ये दवाइयां बचाव करती हैं।
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21 दिनों में इसमें जड़े आनी शुरू हो जाएंगी। जड़ें आने के बाद इसे जमीन में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है।
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नवंबर में अपने शुरू होंगे फूल
इन गमलों में लगे गुलदाउदी में नवंबर के मध्य से फूल आना शुरू हो जाता है। दिसंबर के महीना में तो ये गुलदाउदी पूर्ण रूप से खिले मिलते हैं। इनकी देखभाल के लिए छह मालियों की स्थाई ड्यूटी लगाई गई है। पूर्ण रूप से खिलने के बाद ही पता चलता है कि यह किस वेराइटी की है।
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नगर निगम के हार्टिकल्चर विंग के एक्सईएन केपी सिंह का कहना है कि सेक्टर-33 के नर्सरी में सीजनल फूलों की पनीरी भी तैयार की जाती है। इनमें जीनिया, ग्लाडिया, कोचिया, गंभरीना, कांसकॉम, सलोसिया, कॉस्मॉस है। ये गरमी सीजन के फूल हैं। इसके अलावा सरदी के फूलों में सालविया, पेंजी, पिरोनिया, गेंदा, लैजम, बरबीना ये सभी सरदी के सीजन के फूल हैं।
इन दवाइयों का होता है स्प्रे
सैक्डोर, एरगॉन, क्लोड नाम की दवाईयां गुलदाउदी के पौधों और फूलों पर छिड़काव (स्प्रे) किया जाता है। इसके स्प्रे करने से पौधे मजबूत होते हैं। सरदी के सीजन में गुलदाउदी में सबसे पहले फूल आते हैं। इसके कारण फंगस और कीड़े इन पर हमला करते हैं। इससे ये दवाइयां बचाव करती हैं।