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चंडीगढ़ में गिर रहा भू-जल स्तर, फिर भी 237 ट्यूबवेल चूस रहे पानी

Tue, 10 Mar 2020 02:15 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2020 02:15 AM IST
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Groundwater level falling in Chandigarh, yet 237 tubewells are sucking water
चंडीगढ़। शहर का भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। जल शक्ति अभियान के तहत गिरते भू-जल स्तर वाले शहरों में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल है। इसके बावजूद 237 ट्यूबवेल से शहर में अभी भी पानी सप्लाई हो रहा है। यह स्थिति तब है, जब कजौली वाटर वर्क्स के छह फेजों से 90 एमजीडी पानी शहर में सप्लाई हो रहा है।
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भू-जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशभर के 254 जिलों की सूची तैयार की थी जहां पर तेजी से भू-जल स्तर गिर रहा था। उसमें चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। शहर में कुल 287 ट्यूबवेल हैं। निगम ने दावा किया था कि कजौली वाटर वर्क्स से पांचवें और छठवें फेज का पानी आने के बाद ज्यादातर ट्यूबवेल को बंद कर देंगे पर इन दोनों फेजों से पानी आने के बाद भी निगम ने मात्र 20 ट्यूबवेल को पूरी तरह से और 30 ट्यूबवेल को अस्थायी रूप से बंद किया है। शेष 237 ट्यूबवेल अब भी धरती से पानी सोख रहे हैं। हालांकि जितना पानी निकाला जा रहा है, उतना भूमि के अंदर नहीं जा पा रहा है। इस कारण भू-जल स्तर में गिरावट आ रही है। रिपोर्ट आने के बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने डीसी मंदीप सिंह बराड़ और निगम कमिश्नर केके यादव के साथ मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए कहा था। इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रीयूज वाटर, वाटर बॉडी को फिर से रीजेनरेट करना, मास अवेयरनेस, प्लांटेशन ड्राइव के माध्यम आदि से भू-जल स्तर बढ़ाने की कोशिश करने को कहा।
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इमारतों में लगाया जा रहा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भूमि में जल के स्तर को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाया जाए। जिन इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है, प्रशासन उन्हें चिह्नित कर देख रहा है कि वे चालू हैं कि नहीं क्योंकि ज्यादातर वाटर हार्वेस्टिंग देखरेख व मरम्मत केअभाव में बेकार पड़े हैं। कई स्कूलों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है।
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पानी को रीयूज करने के लिए पांच एसटीपी का किया टेंडर
वर्तमान में शहर के पांच एसटीपी के संचालन के लिए स्मार्ट सिटी के तहत हाल ही में टेंडर हुआ है। इससे गंदे पानी को फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सकेगा। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पानी में डायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (डीओडी) को कम करेगा। एनजीटी के निर्देशानुसार इस प्रोेजेक्ट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी का डीओडी पांच से कम करना है। हालांकि 10 से कम डीओडी भी खतरनाक नहीं है। इसके अलावा नाइट्रेट व फास्फोरस की मात्रा भी काफी कम हो जाएगी। किशनगढ़ के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में डीओडी 2 से कम रहेगा। इस प्लांट से निकलने वाले पानी को लेक में भी उपयोग करने की योजना है।
तालाबों को गोद लेने की योजना ठंडे बस्ते में
नगर निगम और प्रशासन ने रिपोर्ट आने के बाद शहर व गांव के तालाबों को गोद लेने की योजना बनाई थी ताकि इन्हें फिर से जीवित किया जा सके। नगर निगम ने खुड्डा अलीशेर में दो एकड़ में बने तालाब को गोद लिया था। वहीं प्रशासन ने सेक्टर 42 की नई झील को गोद लिया था। दोनों में हालत यह है कि मात्र थोड़ा सा पानी एक गड्ढे में भरा हुआ है। जब अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं होंगे तो भू जल स्तर तो नीचे जाएगा ही।
कोट
ग्रामीणों के सहयोग से तालाब में पानी भरवाया गया था। समय-समय पर तालाब में ट्यूबवेल से पानी भरा जाता है। हालांकि अभी तालाब में पानी कम बचा है। आगे इसके लिए व्यवस्था कराएंगे। -शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर

जब नगर निगम की ओर से सूचना मिली थी तो गांव वालों के साथ मिलकर तालाब में पानी भरवाया था। इसमें निगम ने सहयोग की भी बात की थी। फिलहाल निगम की ओर से ऐसा कोई सहयोग तो नहीं मिला। -हुकुमचंद, पूर्व सरपंच, खुड्डाअलीशेर
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