Ground Report: कैथल में विकास मुद्दा, आदित्य सुरजेवाला दे रहे चौधर का नारा.. लीलाराम को जातीय समीकरण का सहारा
साल 2000 में इनेलो से जीते लीलाराम पिछली बार भाजपा के लिए कैथल में पहली बार कमल खिलाने में कामयाब रहे थे। एक बार फिर वह सुरजेवाला को टक्कर दे रहे हैं। हालांकि, उनको सत्ता विरोधी लहर व लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। सुरजेवाला पिता-पुत्र लीला राम की इसी कमी पर बार-बार हमला कर इसे मुद्दा बना रहे हैं।
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विस्तार
महाभारतकालीन ऐतिहासिक धरती कैथल में विधानसभा चुनाव में इस बार गढ़ बचाने और बनाने की जंग है। यहां सुरजेवाला परिवार की तीसरी पीढ़ी मैदान में है। राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला अपने पुराने गढ़ को दोबारा हासिल करने के लिए बेटे आदित्य के लिए दिन रात एक किए हुए हैं।
कैथल में विकास मुद्दा
उनके हमलों के कारण कैथल हरियाणा की पहली ऐसी सीट बन गई है, जहां विकास कार्य और काम मुद्दा है। सुरजेवाला ने पूरा शहर 'काम किया है काम करेंगे' के नारे से अटा दिया है। इससे लोग खुद भी विकास की बात करने लगे हैं। दूसरी तरफ, लीलाराम को पार्टी के कैडर और नायब सैनी सरकार में हुए काम व बिना पर्ची-खर्ची युवाओं को दी गई नौकरी पर भरोसा है।
भाजपा के मेरिट मिशन पर नाैकरियां देने का भी मुद्दा
गांवों में सबसे ज्यादा भाजपा के मेरिट मिशन पर नौकरियां देने के मुद्दे का जिक्र है। क्योड़क के हुकम सिंह कहते हैं कि गांव में बिना पैसे और बिना सिफारिश के युवाओं को नौकरियां मिली हैं, लेकिन जनेशर सिंह को लीला राम से नाराजगी भी है कि वह गांव में कम आए और चौपाल के लिए पैसे देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन राशि नहीं दी।
खुराना के संदीप कुमार व समाजसेवी धर्मवीर केमिस्ट भी लीलाराम के काम से नाखुश नजर आए। विकास की चर्चाओं के बीच यहां चौधर के नारे की भी हवा है। कांग्रेस में बड़ा चेहरा होने के कारण सुरजेवाला ही चौधर का नारा दे रहे हैं। सुरजेवाला के लिए यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 2019 में रणदीप भाजपा के लीलाराम गुर्जर से महज 1246 वोटों से हार गए थे। बेटे के माध्यम से हार का बदला लेने की तैयारी में हैं।
सुरजेवाला छह माह से कर रहे थे तैयारी ...गांवों में परेशानी
कैथल शहर में सुरजेवाला खुद को मजबूत मान रहे हैं। वह छह माह से यहां तैयारियों में जुटे थे। तमाम नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को उन्होंने साध लिया है। इसके अलावा, पूर्व मंत्री सुरेंद्र मदान, पूर्व विधायक रोशन लाल तिवारी, लीलाराम के खास नजदीकी मुकेश जैन, विनोद सोनी और प्रयाग राज बालू समेत पांच पार्षद सुरजेवाला के पक्ष में आ चुके हैं, लेकिन गांवों में राह इतनी आसान नहीं है। ओबीसी और एससी वोट उनके लिए दिक्कत पेश कर सकते हैं। गुर्जर बाहुल इलाके में भी वह सुरजेवाला को सीधी चुनौती दे रहे हैं। हालांकि, लीलाराम को भितरघात का भी खतरा है, क्योंकि टिकट के लिए कैलाश भगत और सुरेश गर्ग भी दावेदार थे, लेकिन हाईकमान ने दोबारा से लीलाराम पर विश्वास जताया है।
सात गेट करते हैं शहर का फैसला
कैथल पुराना शहर एक किले के रूप में है। किले के चारों ओर सात तालाब और आठ दरवाजे हैं। दरवाजों का नाम है -सीवन गेट, माता गेट, प्रताप गेट, डोगरा गेट, चंदाना गेट, रेलवे गेट, कोठी गेट, क्योड़क गेट। अलग अलग गेटों में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है और यहीं से हार जीत का फैसला होता है। लाइन पार एरिया चुनाव में सबसे अहम रोल अदा करता है।
अन्य दलों का जिक्र कम
कैथल में कुल 12 प्रत्याशी हैं। इनमें जाट समाज से 4 और गुर्जर समाज से दो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है। इनेलो-बसपा, जजपा और आम आदमी पार्टी यहां कहीं न तो मुकाबले में दिख रही हैं और न ही मुकाबले को त्रिकोणीय करने की स्थिति में हैं। 2 लाख से ज्यादा मतदाताओं में पंजाबी, वैश्य, गुर्जर और जाटों के बराबर वोट हैं।
आदित्य सुरजेवाला का मजबूत पक्ष
परिवार की परंपरागत सीट, दादा और पिता विधायक रहे
हलके पर रणदीप सुरजेवाला की मजबूत पकड़
दस साल पहले सरकार में मंत्री रहे कराए विकास कार्यों से आस
कमजोर पक्ष
खुद रणदीप मैदान में नहीं, बेटा आदित्य नया चेहरा है
गुर्जर बाहुल इलाके में लीलाराम का वोट बैंक अधिक
लीला राम का मजबूत पक्ष
देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार, पार्टी का मजबूत संगठन
कैथल में गुर्जर और सैनी समाज का अच्छा वोट बैंक, ओबीसी से आस
भाजपा सरकार की उपलब्धियों से आसरा, मेरिट पर नौकरियां
कमजोर पक्ष
पांच साल में कैथल में विकास के नाम पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं दिला पाए
सत्ता में साथ रहे साथी अब छोड़कर सुरजेवाला की तरफ चले गए
भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर और खुद के प्रति नाराजगी