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हरियाणा: चिंताजनक हैं सरकारी स्कूलों के हाल, बच्चों को पढ़ाने के लिए न शिक्षक और न किताबें

Sat, 17 Jul 2021 10:24 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 17 Jul 2021 10:24 AM IST
सार

स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क किताबें मुहैया कराने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है। इस बार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। दिसंबर तो दूर मार्च-अप्रैल तक टेंडर नहीं हुआ और मई में विभाग ने बच्चों को किताबें मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए। बच्चों को 200-300 रुपये किताबें खरीदने के लिए देने की घोषणा तो की गई, लेकिन उनके खातों में राशि आज तक नहीं पहुंची।

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Ground Report of government Schools of Haryana
स्कूल - फोटो : amar ujala

विस्तार

हरियाणा में निजी स्कूलों को टक्कर देने का दम भर रहे सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए 20 हजार से अधिक शिक्षक कम हैं। पहली से आठवीं के बच्चों को इस शैक्षणिक सत्र के लिए अब तक किताबें ही नहीं मिल पाईं।
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प्रदेश सरकार स्कूलों में ढांचागत सुविधाएं, पर्याप्त शिक्षक व किताबें मुहैया कराने का दावा तो कर रही है, लेकिन दावे कागजों से निकलकर धरातल पर नहीं पहुंच पा रहे। इस सत्र में स्कूलों में बच्चे तो 1.60 लाख बढ़ गए पर शिक्षकों की नई भर्ती नहीं हुई। शिक्षकों के वैसे तो 34 हजार से अधिक पद खाली हैं पर 13 हजार अतिथि और 800 तदर्थ अध्यापकों से काम चलाया जा रहा है। बावजूद इसके 20 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। ऐसे में शिक्षा के मामले में निजी स्कूलों को टक्कर देने का स्कूल शिक्षा विभाग का दावा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। 
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शैक्षणिक सत्र पहली अप्रैल से शुरू हो चुका है। अब तक शिक्षकों के तबादले हुए न ही विद्यार्थी संख्या के लिहाज से युक्तिकरण हो पाया। ऑनलाइन तबादलों में स्कूल शिक्षा विभाग कैप्ट वैकेंसी इसलिए ही रखता है। युक्तिकरण न होने से 500 प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की संख्या के लिहाज से शिक्षक कम हैं। 800 स्कूलों में बच्चों की संख्या से ज्यादा शिक्षक हैं तो 70 से ज्यादा प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हैं। 
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छह माह पहले नहीं किया किताबों का टेंडर

स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क किताबें मुहैया कराने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है। इस बार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। दिसंबर तो दूर मार्च-अप्रैल तक टेंडर नहीं हुआ और मई में विभाग ने बच्चों को किताबें मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए। बच्चों को 200-300 रुपये किताबें खरीदने के लिए देने की घोषणा तो की गई, लेकिन उनके खातों में राशि आज तक नहीं पहुंची।

बाजार में किताबें नहीं, कहीं छापकर दे रहे तो रेट दोगुना
शिक्षाविद् सीएन भारती व बच्चों के अभिभावक रमेश मलिक, नीना सिंह, धर्म सिंह बिश्नोई ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पहली से आठवीं कक्षा तक की सरकारी स्कूलों की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। इस बार विभाग की गलती का अभिभावकों व बच्चों को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा। 20-30 फीसदी बच्चों ने तो किताबें पुराने विद्यार्थियों से जुटा लीं, लेकिन अन्य को प्रकाशकों से संपर्क कर छपवानी पड़ रही हैं, जिनकी कीमत पांच सौ से सात सौ रुपये पड़ रही है।

स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति
नवंबर 2020 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पक्के जेबीटी 6217, मुख्य शिक्षक 842, टीजीटी 10225, मौलिक मुख्याध्यापक 2365, लेक्चरर 12960, मुख्याध्यापक 676, प्रिंसिपल 991 कम हैं। यह कुल संख्या 34276 बनती है। कार्यरत 5000 गेस्ट जेबीटी, 6000 टीजीटी, 2000 गेस्ट पीजीटी व 800 तदर्थ शिक्षकों के पदों को भी भरा हुआ मान लिया जाए तब भी 20476 पद खाली रह जाते हैं।

शिक्षकों की भर्ती चल रही, बाजार में तीस फीसदी किताबें उपलब्ध : कंवर पाल
शिक्षा मंत्री कंवर पाल का कहना है कि विभिन्न श्रेणी के पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन आयोग के जरिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। जेबीटी लगभग पूरे हैं। अन्य श्रेणी के शिक्षकों की कमी जल्दी दूर हो जाएगी। पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए तीस फीसदी किताबें बाजार में उपलब्ध थीं। अन्य को पुराने छात्रों व प्रकाशकों से दिलाने का प्रयास जारी है। 

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