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कोठी पर ग्रेनेड हमला : हमलावर सीसीटीवी में कैद, पड़ोसी राज्यों में छापे, 2-2 लाख का इनाम
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चंडीगढ़। शहर के सबसे पॉश इलाकों में शामिल सेक्टर-10 की कोठी (नंबर-575) में हैंड ग्रेनेड के धमाके ने सिटी ब्यूटीफुल में सनसनी फैला दी। जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं हैं। सीसीटीवी फुटेज में हमले के दो आरोपी कैद मिले हैं, जिनकी तलाश शुरू कर दी गई है। हिरासत में लिए गए ऑटो चालक कुलदीप ने भी आरोपियों की शिनाख्त कर दी है। रात को करीब साढ़े 11 बजे चंडीगढ़ पुलिस ने दोनों आरोपियों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर एक व्हाट्सएप नंबर जारी कर दिया। सूचना देने वाले का नाम पता गुप्त रखा जाएगा। पुलिस टीमें हमलावरों को पकड़ने के लिए पंजाब, हरियाणा समेत आसपास के राज्यों में छापे मार रही हैं।
घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में ऑटो सवार युवक कोठी में ग्रेनेड फेंककर भागते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि सोशल मीडिया में वायरल हुई एक अन्य वीडियो में दो युवक पैदल भागते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए ऑटो चालक को हिरासत में ले लिया जिसकी पहचान कुलदीप कुमार के रूप में हुई। पुलिस पूछताछ में ऑटो चालक ने बताया कि शाम करीब 5 बजे वह दोनों युवक उसके ऑटो में बैठे और उसे सेक्टर-10 में कोठी नंबर 575 जाने के लिए कहा। ऑटो चालक ने बताया कि आरोपियों को पहले से ही यहां का रास्ता पता था। युवकों ने मौके पर पहुंचते ही ऑटो से निकलकर कोठी के अंदर कुछ फेंका जिससे जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद उसने डर के मारे वहां से ऑटो भगाया और घटनास्थल से कुछ देरी पर पहुंचते ही दोनों युवक उसके ऑटो से उतरकर भाग गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल कोठी नंबर-575 में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रिंसिपल गोपेश मल्होत्रा को किसी भी तरह की रंगदारी या अन्य कोई धमकी नहीं मिली है और न ही उनके साथ किसी की कोई दुश्मनी है।
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पहले भी रची गई थी पूर्व एसएसपी चहल की हत्या की साजिश
सेक्टर-10 की जिस कोठी में हमला हुआ है, वहां दो वर्ष पहले तक रहने वाले पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल की हत्या की साजिश पहले भी रची गई थी लेकिन चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस ने उसका भंडाफोड़ कर दिया था। पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल को पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ने पर कई बार परिवार समेत जान से मारने की धमकियां मिली थीं। जब उनकी हत्या की साजिश रची गई थी तब बाकायदा रेकी भी की गई थी। बता दें कि जसकीरत सिंह चहल 9 अप्रैल 1977 को एएसआई के पद पर पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे। एक जुलाई 1983 को सब इंस्पेक्टर और फिर 21 जून 1985 को इंस्पेक्टर बने। इस दौरान पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में वह सक्रिय रहते थे। पुलिस में अनुकरणीय सेवाओं के लिए उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। इसी के चलते वर्ष 1996 में उन्हें पुलिस अधीक्षक के रूप में बारी से पहले पदोन्नति दी गई थी।
पंजाब सरकार ने वापस ले ली थी चहल की सुरक्षा
उन्हें व उनके परिवार को कई बार जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी कारण कुछ साल पहले जालंधर के एसएसपी के पद से रिटायर होने के बाद उन्हें पंजाब पुलिस ने सुरक्षा भी दी थी। अप्रैल 2017 में पंजाब सरकार ने चहल की सुरक्षा ली थी। इसके चलते उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाना पड़ा था। जसकीरत चहल का कहना है कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में उन्होंने कार्रवाई करने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की थी। तब उनके घर को आग लगा दी गई थी। इंटेलिजेंस की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए चहल की सुरक्षा को वापस लिया गया था। करीब चार साल पहले जालंधर में स्थित कोठी में रहने के दौरान भी एक युवक का शव मिला था। वह कभी-कभी अधिकारी चहल के सुरक्षाकर्मियों में शामिल अपने दोस्तों के पास रहने के लिए आता था। मृतक अमरीक सिंह किसी प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करता था। वहीं करीब दो साल पहले कोविड के दौरान चहल के वकील बेटे की भी मौत हो गई थी।
जांच एजेंसियों ने घटनास्थल पर डेरा डाला
ग्रेनेड हमले ने पुलिस सहित अन्य जांच एजेंसियों पर भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि ग्रेनेड बम सामान्य तौर पर सेना के अलावा कहीं नहीं मिलता। ऐसे में आरोपी हैंड ग्रेनेड कहां से लेकर आए थे, यह भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल है। इस घटना की सूचना पाकर चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव, आईजी राजकुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डीआईजी के अलावा एनआईए, सीआरपीएफ व अन्य कई जांच एजेंसियों के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए। जांच एजेंसियों द्वारा कोठी में बम के धमाके वाली जगह चप्पे-चप्पे को खंगालकर सुबूत एकत्र किए गए। एसएसपी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर ने कहा कि शाम करीब 5.30 बजे सूचना मिली कि चंडीगढ़ के सेक्टर-10 के मकान नंबर 575 में धमाके जैसी आवाज सुनाई दी है तुरंत पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और सीएफएसएल को मौके पर बुलाया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि प्रेशर ब्लास्ट हुआ था, जिससे तेज आवाज आई। प्रेशर ब्लास्ट के कारण कुछ गमले और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं। मौके पर जांच टीमों को काफी महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इस मामले में ऑटो चालक कुलदीप को हिरासत में लिया गया है और उससे अभी पूछताछ जारी है।
इससे पहले 1991 में चंडीगढ़ में हुआ था ग्रेनेड हमला, तीन पुलिसकर्मियों की गई थी जान
इससे पहले वर्ष 1991 में चंडीगढ़ में ग्रेनेड से हमला हुआ था। तब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे और ग्रेनेड उनके काफिले पर फेंका गया था। हस हमले में सैनी की सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे और सैनी भी जख्मी हो गए थे। उस मामले में पुलिस ने सुमेध सैनी के आदेश पर पूर्व आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मुल्तानी को हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा गया कि वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया। परिजनों का आरोप था कि बलवंत सिंह मुल्तानी की पुलिस के टॉर्चर से मौत हो गई। सुमेध सैनी और अन्य पुलिस अफसरों के खिलाफ मोहाली में केस दर्ज किया गया था।
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घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में ऑटो सवार युवक कोठी में ग्रेनेड फेंककर भागते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि सोशल मीडिया में वायरल हुई एक अन्य वीडियो में दो युवक पैदल भागते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए ऑटो चालक को हिरासत में ले लिया जिसकी पहचान कुलदीप कुमार के रूप में हुई। पुलिस पूछताछ में ऑटो चालक ने बताया कि शाम करीब 5 बजे वह दोनों युवक उसके ऑटो में बैठे और उसे सेक्टर-10 में कोठी नंबर 575 जाने के लिए कहा। ऑटो चालक ने बताया कि आरोपियों को पहले से ही यहां का रास्ता पता था। युवकों ने मौके पर पहुंचते ही ऑटो से निकलकर कोठी के अंदर कुछ फेंका जिससे जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद उसने डर के मारे वहां से ऑटो भगाया और घटनास्थल से कुछ देरी पर पहुंचते ही दोनों युवक उसके ऑटो से उतरकर भाग गए।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल कोठी नंबर-575 में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रिंसिपल गोपेश मल्होत्रा को किसी भी तरह की रंगदारी या अन्य कोई धमकी नहीं मिली है और न ही उनके साथ किसी की कोई दुश्मनी है।
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पहले भी रची गई थी पूर्व एसएसपी चहल की हत्या की साजिश
सेक्टर-10 की जिस कोठी में हमला हुआ है, वहां दो वर्ष पहले तक रहने वाले पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल की हत्या की साजिश पहले भी रची गई थी लेकिन चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस ने उसका भंडाफोड़ कर दिया था। पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल को पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ने पर कई बार परिवार समेत जान से मारने की धमकियां मिली थीं। जब उनकी हत्या की साजिश रची गई थी तब बाकायदा रेकी भी की गई थी। बता दें कि जसकीरत सिंह चहल 9 अप्रैल 1977 को एएसआई के पद पर पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे। एक जुलाई 1983 को सब इंस्पेक्टर और फिर 21 जून 1985 को इंस्पेक्टर बने। इस दौरान पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में वह सक्रिय रहते थे। पुलिस में अनुकरणीय सेवाओं के लिए उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। इसी के चलते वर्ष 1996 में उन्हें पुलिस अधीक्षक के रूप में बारी से पहले पदोन्नति दी गई थी।
पंजाब सरकार ने वापस ले ली थी चहल की सुरक्षा
उन्हें व उनके परिवार को कई बार जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी कारण कुछ साल पहले जालंधर के एसएसपी के पद से रिटायर होने के बाद उन्हें पंजाब पुलिस ने सुरक्षा भी दी थी। अप्रैल 2017 में पंजाब सरकार ने चहल की सुरक्षा ली थी। इसके चलते उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाना पड़ा था। जसकीरत चहल का कहना है कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में उन्होंने कार्रवाई करने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की थी। तब उनके घर को आग लगा दी गई थी। इंटेलिजेंस की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए चहल की सुरक्षा को वापस लिया गया था। करीब चार साल पहले जालंधर में स्थित कोठी में रहने के दौरान भी एक युवक का शव मिला था। वह कभी-कभी अधिकारी चहल के सुरक्षाकर्मियों में शामिल अपने दोस्तों के पास रहने के लिए आता था। मृतक अमरीक सिंह किसी प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करता था। वहीं करीब दो साल पहले कोविड के दौरान चहल के वकील बेटे की भी मौत हो गई थी।
जांच एजेंसियों ने घटनास्थल पर डेरा डाला
ग्रेनेड हमले ने पुलिस सहित अन्य जांच एजेंसियों पर भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि ग्रेनेड बम सामान्य तौर पर सेना के अलावा कहीं नहीं मिलता। ऐसे में आरोपी हैंड ग्रेनेड कहां से लेकर आए थे, यह भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल है। इस घटना की सूचना पाकर चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव, आईजी राजकुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डीआईजी के अलावा एनआईए, सीआरपीएफ व अन्य कई जांच एजेंसियों के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए। जांच एजेंसियों द्वारा कोठी में बम के धमाके वाली जगह चप्पे-चप्पे को खंगालकर सुबूत एकत्र किए गए। एसएसपी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर ने कहा कि शाम करीब 5.30 बजे सूचना मिली कि चंडीगढ़ के सेक्टर-10 के मकान नंबर 575 में धमाके जैसी आवाज सुनाई दी है तुरंत पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और सीएफएसएल को मौके पर बुलाया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि प्रेशर ब्लास्ट हुआ था, जिससे तेज आवाज आई। प्रेशर ब्लास्ट के कारण कुछ गमले और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं। मौके पर जांच टीमों को काफी महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इस मामले में ऑटो चालक कुलदीप को हिरासत में लिया गया है और उससे अभी पूछताछ जारी है।
इससे पहले 1991 में चंडीगढ़ में हुआ था ग्रेनेड हमला, तीन पुलिसकर्मियों की गई थी जान
इससे पहले वर्ष 1991 में चंडीगढ़ में ग्रेनेड से हमला हुआ था। तब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे और ग्रेनेड उनके काफिले पर फेंका गया था। हस हमले में सैनी की सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे और सैनी भी जख्मी हो गए थे। उस मामले में पुलिस ने सुमेध सैनी के आदेश पर पूर्व आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मुल्तानी को हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा गया कि वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया। परिजनों का आरोप था कि बलवंत सिंह मुल्तानी की पुलिस के टॉर्चर से मौत हो गई। सुमेध सैनी और अन्य पुलिस अफसरों के खिलाफ मोहाली में केस दर्ज किया गया था।