फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Research is being done in Department of Biotechnology Panjab University to improve grape crop

चंडीगढ़: अंगूर की खेती करने वालों को जल्द मिलेगी फंगल बीमारी से मुक्ति, पीयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में हो रही रिसर्च

Sun, 27 Feb 2022 01:38 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 27 Feb 2022 01:38 AM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह को अंगूर पर शोध के लिए साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी) से वर्ष 2021 में 57 लाख रुपये की ग्रांट मिली है।

विज्ञापन
Research is being done in Department of Biotechnology Panjab University to improve grape crop
लैब में तैयार किए गए अंगूर के टिश्यू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में अंगूर की फसल बेहतर बनाने के लिए शोध चल रहा है, जिससे अंगूर के पौधे और फल को मौसमी बदलाव और नमी के कारण होने वाली बीमारी से बचाया जा सके। अंगूर में नमी के कारण फंगल बीमारी पाउडरी मिल्ड्यू और डाउनी मिल्ड्यू बढ़ती है और अंगूर की बेल के साथ फल भी खराब हो जाता है और खाने लायक नहीं रहता।

विज्ञापन


अभी तक किसान फसल पर पेस्टीसाइड का इस्तेमाल कर फसल को बीमारी से बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब पीयू के डॉ. कश्मीर की ओर से अंगूर का नया पौधा तैयार किया जा रहा है, जो फंगल बीमारियों से मुक्त होगा।  
विज्ञापन


पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह को अंगूर पर शोध के लिए साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी) से वर्ष 2021 में 57 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। डॉ. कश्मीर ने बताया कि अभी तक अंगूर में होने वाले फंगल इंफेक्शन के लिए किसान पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे अंगूर की फसल की उत्पादन क्षमता घटने के साथ वह खाने में भी स्वास्थ्यवर्धक नहीं रहता। इसलिए हमारी कोशिश थी कि फसल को बीमारीमुक्त बनाने के साथ ही यह लोगों के लिए खाने में भी स्वास्थ्यवर्धक हो। अभी यूरोप और अमेरिका में अंगूर की ऐसी कई किस्में हैं, जिनमें यह फंगल बीमारी नहीं लगती, लेकिन वे किस्में शराब बनाने के काम आती हैं, इसलिए उन्हें यहां इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।  

विज्ञापन
विज्ञापन

लैब में तैयार किया जा रहा है अंगूर का पौधा

डॉ. कश्मीर ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ अभी लैब में फंगल से लड़ने की क्षमता रखने वाले पौधे को लैब में तैयार कर रहे हैं। इसमें अमेरिकन अंगूरों में पाए जाने वाले जीन्स को इस्तेमाल किया जा रहा है। जो हमारे यहां के अंगूरों में नहीं होते, जिस कारण उन्हें बीमारी लगती है। अंगूर में नए जीन्स एक्टिवेट होने के बाद पौधे पर फंगल बीमारी नहीं लगेगी। पीयू लैब में अभी अंगूर टिश्यू स्टेज पर है। इसे लैब में बाहर के मौसमों जैसा तापमान बनाकर पौधे को तैयार किया जाएगा। लैब में काम कर रही टीम की सदस्य शोधार्थी नंदिनी ने बताया कि लैब में किसी भी पौधे को तैयार कर फूल लगने और बीज तैयार करने में दो से तीन साल का समय लगता है। इस समय में कई तरह के टेस्ट करने होते हैं। अंगूर को आगे बीज से लगाने के बजाय पौधे को स्टेम कटिंग से लगाया जाता है, जिससे एक पौधे से कई पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed