चंडीगढ़: अंगूर की खेती करने वालों को जल्द मिलेगी फंगल बीमारी से मुक्ति, पीयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में हो रही रिसर्च
पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह को अंगूर पर शोध के लिए साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी) से वर्ष 2021 में 57 लाख रुपये की ग्रांट मिली है।
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पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में अंगूर की फसल बेहतर बनाने के लिए शोध चल रहा है, जिससे अंगूर के पौधे और फल को मौसमी बदलाव और नमी के कारण होने वाली बीमारी से बचाया जा सके। अंगूर में नमी के कारण फंगल बीमारी पाउडरी मिल्ड्यू और डाउनी मिल्ड्यू बढ़ती है और अंगूर की बेल के साथ फल भी खराब हो जाता है और खाने लायक नहीं रहता।
अभी तक किसान फसल पर पेस्टीसाइड का इस्तेमाल कर फसल को बीमारी से बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब पीयू के डॉ. कश्मीर की ओर से अंगूर का नया पौधा तैयार किया जा रहा है, जो फंगल बीमारियों से मुक्त होगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह को अंगूर पर शोध के लिए साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी) से वर्ष 2021 में 57 लाख रुपये की ग्रांट मिली है। डॉ. कश्मीर ने बताया कि अभी तक अंगूर में होने वाले फंगल इंफेक्शन के लिए किसान पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे अंगूर की फसल की उत्पादन क्षमता घटने के साथ वह खाने में भी स्वास्थ्यवर्धक नहीं रहता। इसलिए हमारी कोशिश थी कि फसल को बीमारीमुक्त बनाने के साथ ही यह लोगों के लिए खाने में भी स्वास्थ्यवर्धक हो। अभी यूरोप और अमेरिका में अंगूर की ऐसी कई किस्में हैं, जिनमें यह फंगल बीमारी नहीं लगती, लेकिन वे किस्में शराब बनाने के काम आती हैं, इसलिए उन्हें यहां इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
लैब में तैयार किया जा रहा है अंगूर का पौधा
डॉ. कश्मीर ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ अभी लैब में फंगल से लड़ने की क्षमता रखने वाले पौधे को लैब में तैयार कर रहे हैं। इसमें अमेरिकन अंगूरों में पाए जाने वाले जीन्स को इस्तेमाल किया जा रहा है। जो हमारे यहां के अंगूरों में नहीं होते, जिस कारण उन्हें बीमारी लगती है। अंगूर में नए जीन्स एक्टिवेट होने के बाद पौधे पर फंगल बीमारी नहीं लगेगी। पीयू लैब में अभी अंगूर टिश्यू स्टेज पर है। इसे लैब में बाहर के मौसमों जैसा तापमान बनाकर पौधे को तैयार किया जाएगा। लैब में काम कर रही टीम की सदस्य शोधार्थी नंदिनी ने बताया कि लैब में किसी भी पौधे को तैयार कर फूल लगने और बीज तैयार करने में दो से तीन साल का समय लगता है। इस समय में कई तरह के टेस्ट करने होते हैं। अंगूर को आगे बीज से लगाने के बजाय पौधे को स्टेम कटिंग से लगाया जाता है, जिससे एक पौधे से कई पौधे तैयार किए जा सकते हैं।