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Womens Day: पंजाब यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की अनोखी पहल, बच्चों की दादी-नानी को बुलाया

Sat, 07 Mar 2020 12:34 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 07 Mar 2020 12:34 PM IST
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Punjab University Chandigarh Hindi Department Unique Event on Womens Day
वूमन्स डे कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
पंजाब विश्वविद्यालय में हर दिन शिक्षक कक्षाएं लेते हैं लेकिन शुक्रवार को नजारा बदला नजर आया। हिंदी विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों की कक्षा दादी व नानियों ने ली। इस दौरान एक तरफ जहां यादों का पिटारा खुला तो वहीं दूसरी तरफ सवाल-जवाब हुए। कुछ युवा दादियों-नानियों के सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में एकल परिवारों के बढ़ने से बच्चों का नैतिक विकास प्रभावित हुआ है। बेटियों को आगे आने की जरूरत है। वे अपने लक्ष्य को लेकर चलें और मेहनत करें। हर परिवार जो आज महिलाओं का साथ दे रहा है, उन परिवारों की महिलाएं आगे बढ़ रही हैं।
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कई यादों पर दादी-नानी की आंखें भर आईं
विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी विभाग ने अनोखा कार्यक्रम रखा। इस विशेष कार्यक्रम में आठ विद्यार्थियों की दादियों व नानियों को आमंत्रित किया गया। उन्होंने पिछले 70 साल का खाका सामने रखा। समाज में आए बदलाव से लेकर कई बातों पर उन्होंने गहन चिंतन करने को कहा। कई सवाल भी युवाओं के लिए छोड़े जिन पर वे मंथन करेंगे। दादियों और नानियों ने अपने अनुभव और यादें साझा की। कभी उनकी आंखों में आंसू भर आए तो कभी निश्छल हंसी से सभागार गूंज उठा।
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इस दौरान अपने वक्त में महिलाओं के लिए शिक्षा के उतने अवसर न होने की कसक भी नजर आई तो वहीं अपनी तीसरी पीढ़ियों की बच्चियों के आगे बढ़ने का संतोष भी नजर आया। कार्यक्रम में शामिल हुई दादी-नानी सावित्री देवी, कुलवंत कौर, जरनैल कौर, फूल देवी, गुलजार कौर, हरविंदर कौर, गुलजारी देवी एवं राजरानी को विभाग के अध्यापकों ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।

एकल परिवार बढ़ने से बच्चों का नैतिक विकास प्रभावित हो रहा
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि माता-पिता को फिर भी बच्चों के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में जाने का अवसर अभिभावक बैठक, दाखिले के दौरान या अन्य मौकों पर मिलता रहता है लेकिन परिवार के सबसे वरिष्ठ दादी या नानी को इस तरह का अवसर नहीं मिल पाता।

दादियों की बात को दोहराते हुए प्रो. गुरमीत सिंह ने कहा कि वैसे भी आधुनिक समय में एकल परिवार बढ़ने से पहले की तरह परिवार के बड़े सदस्यों को बच्चों के साथ रहने और उनके नैतिक विकास में वह भूमिका निभाने का अवसर नहीं मिल रहा जो किसी समय में दादी-नानी की कहानियों के माध्यम से मिलता था।


विभाग के विद्यार्थियों ने बांधा समां
इस दौरान महिलाओं पर केंद्रित प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर गुलजार ने निर्मित फिल्म भी दिखाई। इसमें विशेष तौर पर दादी अमीना का अपने पोते हामिद के प्रति वात्सल्य प्रेम देखने को मिला। कार्यक्रम में विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने गीत, गजल एवं किस्सों के माध्यम से अपने अनुभव सांझा किए।
 
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