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स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था पर जवाब दे सरकार : हाईकोर्ट
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-सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी जवाब दाखिल करने का आदेश
-स्कूलों में 8240 क्लासरूम की जरूरत, 751 का निर्माण हुआ, 1082 का जारी और 1917 का टेंडर हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय की क्या व्यवस्था है। साथ ही मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कैथल जिले के बालू गांव के स्कूली छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए उनके स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया था। मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। जवाबी आंकड़े चौकाने वाले थे। प्रदेश के 131 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं थी, 236 स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं थे। 538 स्कूलों में लड़कियों के शौचालय नहीं थे। 1047 स्कूलों में लड़कों के शौचालय नहीं हैं और विद्यार्थियों के लिए 8240 क्लासरूम की जरूरत है। अब इस मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने एक हलफनामा दायर कर बताया है कि बुनियादी ढांचे के विकास का काम तेजी से जारी है। 8240 अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता को पूरा करने के लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए 751 कमरों का निर्माण किया जा चुका है और 1082 कमरों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। 1917 कमरों के लिए टेंडर जारी है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या प्रदेश के सभी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था है।
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-स्कूलों में 8240 क्लासरूम की जरूरत, 751 का निर्माण हुआ, 1082 का जारी और 1917 का टेंडर हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय की क्या व्यवस्था है। साथ ही मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कैथल जिले के बालू गांव के स्कूली छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए उनके स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया था। मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। जवाबी आंकड़े चौकाने वाले थे। प्रदेश के 131 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं थी, 236 स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं थे। 538 स्कूलों में लड़कियों के शौचालय नहीं थे। 1047 स्कूलों में लड़कों के शौचालय नहीं हैं और विद्यार्थियों के लिए 8240 क्लासरूम की जरूरत है। अब इस मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने एक हलफनामा दायर कर बताया है कि बुनियादी ढांचे के विकास का काम तेजी से जारी है। 8240 अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता को पूरा करने के लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए 751 कमरों का निर्माण किया जा चुका है और 1082 कमरों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। 1917 कमरों के लिए टेंडर जारी है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या प्रदेश के सभी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था है।