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Chandigarh News: औषधीय पौधों से महकेंगे सरकारी स्कूल, विकसित किए जाएंगे हर्बल पार्क

Sat, 23 Mar 2024 04:48 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Mar 2024 04:48 PM IST
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Government schools will be scented with medicinal plants
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूल अब औषधीय पौधों की सुगंध से महकेंगे। विद्यार्थियों को प्रकृति व हरियाली से जोड़ने के लिए स्कूलों में हर्बल पार्क विकसित करने का फैसला लिया है। इन पार्कों में औषधीय पौधों के साथ अन्य प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण में सुधार होगा, बल्कि बच्चों में पेड़ लगाने के प्रति भी लगाव बढ़ेगा। आयुष विभाग की ओर से 500 वर्ग गज में हर्बल पार्क विकसित करने के लिए 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इस संबंध में शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। आयुष विभाग के निर्देशानुसार रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन को लेकर औषधीय पौधों की महत्ता के प्रति विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा। इन पार्कों में औषधीय महत्व वाली वनस्पतियां विकसित करके विद्यार्थियों को उनकी पहचान कराई जाएगी। शिक्षा निदेशालय द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालय में वृक्ष प्रजापतियों सहित औषधीय पौधों की 10 से 15 प्रजातियों के लिए 500 वर्ग मीटर या इससे अधिक प्लाट किसी विद्यालय में है तो वह आवेदन कर सकते हैं।
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शिक्षक और विद्यार्थी रखेंगे हर्बल पार्क का रखरखाव

शिक्षा निदेशालय की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हर्बल पार्क के रखरखाव के लिए विद्यालय जिम्मेदार होंगे। शिक्षक व विद्यार्थियों के साथ अभिभावक-शिक्षक संघ व एनजीओ की भागीदारी रहेगी। इसके साथ ही स्कूल की छुटि्टयों के साथ रखरखाव की विशेष व्यवस्था की जाएगी। विद्यार्थियों को पौधों को लेबल करने, पानी देने, निराई व गुड़ाई की जाएगी, जिससे उनके द्वारा पोषित प्रजातियों के लाभों और उपयोग के बारे में विद्यार्थियाें का ज्ञान बढ़ेगा।
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हर साल मिलेगी वित्तीय सहायता
पार्क के लिए पहले साल और अगले चार वर्षों के लिए रखरखाव लागत के तौर पर प्रति विद्यालय 7 हजार रुपये दिए जाएंगे। यदि ऐसे स्कूल हर्बल गार्डन स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं, जिनका क्षेत्र 500 वर्ग मीटर से कम है, उन्हें आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को जिले में एक इको क्लब को-आर्डिनेटर बनाने के निर्देश दिए हैं, जोकि हर्बल पार्क स्थापित करने वाले स्कूलों की वास्तविकता को जांचेगा।




लगाए जाएंगे ये पौधे
हर्बल पार्क में तुलसी, आंवला, अश्वगंधा, सतवरी, गुडमर, गुग्गल, कलीहरी, मलमेघा, पीपली, गंधा, पिपरमिंट, चित्रक, नीम, नागेश्वर समेत कई अन्य प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे जिन्हें विभिन्न रोगों के इलाज के लिए उपयोग में लाया जाता है। विद्यालय मुखियाओं को निर्देश दिए गए हैं कि हर्बल गार्डन स्थापित करने का प्रस्ताव आयुष विभाग को भेजा जाए।
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