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निक्के-निक्के पैरां ते वड्डे-वड्डे सुपणे, इन लड़कियों का नहीं कोई जवाब, फुटबाल में नंबर वन
Mon, 05 Aug 2019 12:51 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 05 Aug 2019 12:51 PM IST
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फुटबाल टीम
- फोटो : अमर उजाला
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जीवन के किसी भी क्षेत्र में बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। आज बेटियों की उड़ान आसमान के पार अंतरिक्ष तक है। सिटी की बेटियां भी अपनी प्रतिभा से नए-नए मुकाम हासिल कर रही हैं। सेक्टर-22ए स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर स्कूल की गर्ल्स फुटबाल टीम अपने खेल की बदौलत शहर के नामी प्राइवेट स्कूलों को भी पछाड़ चुकी हैं। खास बात यह है कि टीम में खेलने वाली छात्राएं गरीब और साधारण परिवार से हैं। सरकारी स्कूलों को कमजोर आंकने वालों के लिए इस स्कूल की लड़कियों ने नजीर पेश की है।
जीएमएसएसएस-22ए की अंडर-14 और अंडर-17 गर्ल फुटबाल टीम पिछले कई सालों से इंटर स्कूल चैंपियन है। स्टेट टूर्नामेंट में भी स्कूल की टीम हर साल पोजिशन लेकर आती है। टीम ने वर्ष 2017-18 के ओओआरजेजे सीएपीएफ फुटबाल टैलेंट सर्च टूर्नामेंट में पहला स्थान हासिल किया। 50 हजार का प्राइज भी जीता, जो सीधे बच्चों के खाते में भेजा गया। इस टूर्नामेंट में शहर के सभी स्कूलों ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा रिलांयस सिटी चैंपियनशिप का तमगा भी इसी स्कूल के नाम है।
दिसंबर 2018 में हुए नेशनल टूर्नामेंट में स्कूल की गर्ल्स टीम दिल्ली को हराकर मुंबई पहुंची। जहां पूरे देश से आठ टीमें पहुंचीं थीं। गर्व करने वाली बात यह रही कि आठों टीमों में से सात टीमें एकेडमी की थीं, सिर्फ जीएमएसएसएस-22ए की टीम ही स्कूल की टीम थी।
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जीएमएसएसएस-22ए की अंडर-14 और अंडर-17 गर्ल फुटबाल टीम पिछले कई सालों से इंटर स्कूल चैंपियन है। स्टेट टूर्नामेंट में भी स्कूल की टीम हर साल पोजिशन लेकर आती है। टीम ने वर्ष 2017-18 के ओओआरजेजे सीएपीएफ फुटबाल टैलेंट सर्च टूर्नामेंट में पहला स्थान हासिल किया। 50 हजार का प्राइज भी जीता, जो सीधे बच्चों के खाते में भेजा गया। इस टूर्नामेंट में शहर के सभी स्कूलों ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा रिलांयस सिटी चैंपियनशिप का तमगा भी इसी स्कूल के नाम है।
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दिसंबर 2018 में हुए नेशनल टूर्नामेंट में स्कूल की गर्ल्स टीम दिल्ली को हराकर मुंबई पहुंची। जहां पूरे देश से आठ टीमें पहुंचीं थीं। गर्व करने वाली बात यह रही कि आठों टीमों में से सात टीमें एकेडमी की थीं, सिर्फ जीएमएसएसएस-22ए की टीम ही स्कूल की टीम थी।
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फुटबाल ने पूरी की सपनों की उड़ान
मुंबई नेशनल खेलने सभी लड़कियां हवाई जहाज से गईं। जो लड़कियां हवाई जहाज में सफर करने के सपने को भी बहुत बड़ा सपना मानती थीं, वो आज उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचना दूसरी लड़कियों की हसरत होती है। ये वो लड़कियां हैं जो कभी खो-खो जैसे खेल में अपना भविष्य तलाशती थीं लेकिन आज फुटबाल में राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में अपना कौशल दिखा रही हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर, डाइट व नियमों की देते हैं जानकारी
स्कूल के कोच भूपिंदर सिंह ने बताया कि वह हमेशा खिलाड़ियों के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें स्कूल और स्कूल से पासआउट हो चुकी फुटबाल खिलाड़ी जुड़ी हुई हैं। वह लगातार ग्रुप में फुटबाल के खेल से जुड़े टिप्स, डाइट व नियमों से संबंधित जानकारी साझा करते रहते हैं, जो इन खिलाड़ियों के बहुत काम आता है।
यहां ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ नहीं ‘सेव गर्ल-ब्रेव गर्ल’ का नारा
जीएमएसएसएस-22ए कई जगह ‘सेव गर्ल-ब्रेव गर्ल’ का नारा लिखा गया है। स्कूल में जिस तरह से लड़कियों को फिजिकली फिट और सक्षम बनाया जा रहा है, लब नारे को सच साबित करता है। कोच भूपिंदर सिंह का कहना है कि लड़कों को खेलने के कई मौके मिलते हैं, वह गली, ग्राउंड, पार्क आदि में खेल लेते हैं लेकिन लड़कियां सिर्फ एक सुरक्षित परिसर जैसे स्कूल में ही खेल पाती हैं। इसलिए स्कूल की कोशिश है कि हर लड़की स्पोर्ट्स में पार्टिसिपेट करे, इससे अच्छे प्लेयर निकलते हैं और टीम बनाने में भी आसानी होती है। स्कूल में शाम को खुटबॉल की फ्री ट्रेनिंग भी दी जाती है।
व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर, डाइट व नियमों की देते हैं जानकारी
स्कूल के कोच भूपिंदर सिंह ने बताया कि वह हमेशा खिलाड़ियों के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें स्कूल और स्कूल से पासआउट हो चुकी फुटबाल खिलाड़ी जुड़ी हुई हैं। वह लगातार ग्रुप में फुटबाल के खेल से जुड़े टिप्स, डाइट व नियमों से संबंधित जानकारी साझा करते रहते हैं, जो इन खिलाड़ियों के बहुत काम आता है।
यहां ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ नहीं ‘सेव गर्ल-ब्रेव गर्ल’ का नारा
जीएमएसएसएस-22ए कई जगह ‘सेव गर्ल-ब्रेव गर्ल’ का नारा लिखा गया है। स्कूल में जिस तरह से लड़कियों को फिजिकली फिट और सक्षम बनाया जा रहा है, लब नारे को सच साबित करता है। कोच भूपिंदर सिंह का कहना है कि लड़कों को खेलने के कई मौके मिलते हैं, वह गली, ग्राउंड, पार्क आदि में खेल लेते हैं लेकिन लड़कियां सिर्फ एक सुरक्षित परिसर जैसे स्कूल में ही खेल पाती हैं। इसलिए स्कूल की कोशिश है कि हर लड़की स्पोर्ट्स में पार्टिसिपेट करे, इससे अच्छे प्लेयर निकलते हैं और टीम बनाने में भी आसानी होती है। स्कूल में शाम को खुटबॉल की फ्री ट्रेनिंग भी दी जाती है।
स्कूल से 50 फुटबालर तैयार कर चुके हैं भूपिंदर सिंह
भूपिंदर सिंह, जो पिछले 8 सालों से जीएमएसएसएस-22ए में गर्ल्स व ब्वॉयज को फुटबाल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। भूपिंदर सिंह खुद फुटबाल के नेशनल प्लेयर रह चुके हैं। यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ज्वाइन करने से पहले भूपिंदर सिंह सेंट स्टीफन स्कूल में फुटबाल कोच थे। उनके अनुसार अभी तक वह स्कूल से 50 से ज्यादा फुटबालर तैयार कर चुके हैं। वर्ष 2017 में उन्हें यूटी स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है। भूपिंदर सिंह मशहूर फुटबालर गुरप्रीत सिंह संधु के पहले कोच भी रह चुके हैं।
ये हैं बेस्ट प्लेयर
गुनप्रीत कौर
जीएमएसएसएस-22ए में दसवीं की छात्रा गुनप्रीत कौर छोटी सी उम्र में अब तक 6 नेशनल खेल चुकी हैं। अब तक वह 2 गोल्ड जीत चुकी हैं। गुनप्रीत कौर पिछले साल इंडिया के अंडर-19 में नेशनल भी खेलने के लिए सेलेक्ट हुई थीं।
बबीता
जीएमएसएसएस-22ए में 12वीं की छात्रा बबीता 2 नेशनल खेल चुकी हैं। एक गोल्ड अपने नाम किया है। फुटबाल खेलने वह तेलंगाना, दो बार मुंबई आदि कई जगह जा चुकी हैं। बबीता के पिता सरकारी नौकरी करते हैं।
हनी
जीएमएसएसएस-22ए की हनी भी अब तक दो नेशनल खेल चुकी हैं, जिसमें उन्होंने एक गोल्ड जीता है। बारहवीं में पढ़ने वाली हनी के पिता प्राइवेट जॉब करते हैं। हनी छोटी उम्र से ही फुटबाल खेल रही हैं।
स्कूल में फुटबाल खेलने का माहौल है। लंच के समय लड़कियां ग्राउंड में जाकर फुटबाल खेलने लगती हैं। लड़कियां में फुटबाल के प्रति जुनून है, जिसे देखते हुए स्कूल भी उनकी सभी जरूरतों को पूरा करता है। कोच भूपिंदर सिंह स्कूल टाइम के बाद भी बच्चों को ट्रेनिंग देने आते हैं।
- राजीव कुमार, प्रिंसिपल, जीएमएसएसएस-22ए
स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए हमने कई स्कूलों में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाए हैं, जिनमें विभिन्न खेलों के कोर्ट तैयार किए गए हैं। बास्केटबाल, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, स्वीमिंग, क्रिकेट, फुटबाल आदि खेलों को बढ़ावा देने के लिए बीते कुछ सालों में कई प्रयास किए गए हैं।
- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़ (यूटी)
ये हैं बेस्ट प्लेयर
गुनप्रीत कौर
जीएमएसएसएस-22ए में दसवीं की छात्रा गुनप्रीत कौर छोटी सी उम्र में अब तक 6 नेशनल खेल चुकी हैं। अब तक वह 2 गोल्ड जीत चुकी हैं। गुनप्रीत कौर पिछले साल इंडिया के अंडर-19 में नेशनल भी खेलने के लिए सेलेक्ट हुई थीं।
बबीता
जीएमएसएसएस-22ए में 12वीं की छात्रा बबीता 2 नेशनल खेल चुकी हैं। एक गोल्ड अपने नाम किया है। फुटबाल खेलने वह तेलंगाना, दो बार मुंबई आदि कई जगह जा चुकी हैं। बबीता के पिता सरकारी नौकरी करते हैं।
हनी
जीएमएसएसएस-22ए की हनी भी अब तक दो नेशनल खेल चुकी हैं, जिसमें उन्होंने एक गोल्ड जीता है। बारहवीं में पढ़ने वाली हनी के पिता प्राइवेट जॉब करते हैं। हनी छोटी उम्र से ही फुटबाल खेल रही हैं।
स्कूल में फुटबाल खेलने का माहौल है। लंच के समय लड़कियां ग्राउंड में जाकर फुटबाल खेलने लगती हैं। लड़कियां में फुटबाल के प्रति जुनून है, जिसे देखते हुए स्कूल भी उनकी सभी जरूरतों को पूरा करता है। कोच भूपिंदर सिंह स्कूल टाइम के बाद भी बच्चों को ट्रेनिंग देने आते हैं।
- राजीव कुमार, प्रिंसिपल, जीएमएसएसएस-22ए
स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए हमने कई स्कूलों में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाए हैं, जिनमें विभिन्न खेलों के कोर्ट तैयार किए गए हैं। बास्केटबाल, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, स्वीमिंग, क्रिकेट, फुटबाल आदि खेलों को बढ़ावा देने के लिए बीते कुछ सालों में कई प्रयास किए गए हैं।
- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़ (यूटी)