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Chandigarh News: सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए 18 करोड़ जारी किए
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1.20 लाख क्लेम को जल्दी प्रोसेस करने के लिए 70 अतिरिक्त डॉक्टर आयुष्मान में लगाए
प्रत्येक डाक्टर को 1500-1500 केस निपटाने की दी जिम्मेदारी, 15 जुलाई तक प्रोसेस होंगे पूरे क्लेम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 200 करोड़ रुपये की राशि अटकने से नाराज आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा मरीजों का इलाज बंद करने के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आ गई है। आनन-फानन में मंगलवार को निजी अस्पतालों के 18 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी। वहीं, 1.20 लाख कुल क्लेम को सप्ताहभर में प्रोसेस करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से 70 अतिरिक्त डाॅक्टर लेकर आयुष्मान अथॉरिटी में लगाए गए हैं। प्रत्येक डाॅक्टर को 1500-1500 केसों की जिम्मेदारी दी गई है। 15 जुलाई तक सारे बिल प्रोसेस हो जाएंगे और तमाम लंबित राशि निजी अस्पताल संचालकों को जारी कर दी जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने आयुष्मान भारत अथॉरिटी के अधिकारियों की बैठक ली और निर्देश दिए कि लंबित बिलों को जल्दी प्रक्रिया में लाया जाए।
कटौती के लिए जिला स्तर पर कमेटी, देरी पर ब्याज सहित मिलेगी राशि
दूसरी ओर भविष्य के लिए भी सरकार ने दो बड़े फैसले किए हैं, ताकि कोई दिक्कत न आए। दरअसल, निजी अस्पतालों द्वारा भेजे गए क्लेम में पहले कटौती होती थी और इसकी जिम्मेदारी मुख्यालय स्तर पर केवल एक नोडल अधिकारी पर होती थी। इसी के चलते बिल क्लेम करने में देरी होती है। अब सरकार ने सभी जिलों में जिलास्तर पर यह कमेटी बनाई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ कमेटी में आईएमए का एक सदस्य शामिल किया गया है। आईएमए के सदस्य की मौजूदगी के बिना बिलों में कटौती नहीं हो सकेगी। सरकार ने प्रावधान किया है कि अगर तय दिनों से 15 दिन अधिक होने की देरी होती है तो सरकार निजी अस्पतालों को ब्याज समेत राशि का भुगतान करेगी। इसके अलावा, पहले के मुकाबले 30 से 35 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए गए हैं।
कोट (फोटो)
ऐसा नहीं है कि निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है। इलाज चल रहा है। कुछ जिलों में दिक्कत है। अभी कुल 1.20 लाख लंबित क्लेम के करीब 160 करोड़ बकाया हैं। मंगलवार को 18 करोड़ की राशि भेजी गई है। वित्त विभाग 257 करोड़ रुपये और मंजूर कराए हैं। 15 जुलाई तक सभी लंबित क्लेम को प्रोसेस कर दिया जाएगा और सभी की राशि भेज दी जाएगी। आईएमए से अपील है कि वह मरीजों का इलाज न रोकें, क्योंकि राशि किसी भी लंबित नहीं रहेगी।
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-सुधीर राजपाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग।
सरकार का दावा, फरीदाबाद और हिसार में दिक्कत, 20 जिलों में इलाज चालू
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि निजी अस्पतालों में इलाज बंद नहीं हुआ है, केवल हिसार और फरीदाबाद में दिक्कत है, शेष 20 जिलों के अस्पतालों में मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। इन जिलों में 70 से 80 प्रतिशत तक मरीजों को दाखिल किए जाने की रिपोर्ट आ रही है।
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प्रत्येक डाक्टर को 1500-1500 केस निपटाने की दी जिम्मेदारी, 15 जुलाई तक प्रोसेस होंगे पूरे क्लेम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 200 करोड़ रुपये की राशि अटकने से नाराज आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा मरीजों का इलाज बंद करने के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आ गई है। आनन-फानन में मंगलवार को निजी अस्पतालों के 18 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी। वहीं, 1.20 लाख कुल क्लेम को सप्ताहभर में प्रोसेस करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से 70 अतिरिक्त डाॅक्टर लेकर आयुष्मान अथॉरिटी में लगाए गए हैं। प्रत्येक डाॅक्टर को 1500-1500 केसों की जिम्मेदारी दी गई है। 15 जुलाई तक सारे बिल प्रोसेस हो जाएंगे और तमाम लंबित राशि निजी अस्पताल संचालकों को जारी कर दी जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने आयुष्मान भारत अथॉरिटी के अधिकारियों की बैठक ली और निर्देश दिए कि लंबित बिलों को जल्दी प्रक्रिया में लाया जाए।
कटौती के लिए जिला स्तर पर कमेटी, देरी पर ब्याज सहित मिलेगी राशि
दूसरी ओर भविष्य के लिए भी सरकार ने दो बड़े फैसले किए हैं, ताकि कोई दिक्कत न आए। दरअसल, निजी अस्पतालों द्वारा भेजे गए क्लेम में पहले कटौती होती थी और इसकी जिम्मेदारी मुख्यालय स्तर पर केवल एक नोडल अधिकारी पर होती थी। इसी के चलते बिल क्लेम करने में देरी होती है। अब सरकार ने सभी जिलों में जिलास्तर पर यह कमेटी बनाई है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ कमेटी में आईएमए का एक सदस्य शामिल किया गया है। आईएमए के सदस्य की मौजूदगी के बिना बिलों में कटौती नहीं हो सकेगी। सरकार ने प्रावधान किया है कि अगर तय दिनों से 15 दिन अधिक होने की देरी होती है तो सरकार निजी अस्पतालों को ब्याज समेत राशि का भुगतान करेगी। इसके अलावा, पहले के मुकाबले 30 से 35 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए गए हैं।
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कोट (फोटो)
ऐसा नहीं है कि निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है। इलाज चल रहा है। कुछ जिलों में दिक्कत है। अभी कुल 1.20 लाख लंबित क्लेम के करीब 160 करोड़ बकाया हैं। मंगलवार को 18 करोड़ की राशि भेजी गई है। वित्त विभाग 257 करोड़ रुपये और मंजूर कराए हैं। 15 जुलाई तक सभी लंबित क्लेम को प्रोसेस कर दिया जाएगा और सभी की राशि भेज दी जाएगी। आईएमए से अपील है कि वह मरीजों का इलाज न रोकें, क्योंकि राशि किसी भी लंबित नहीं रहेगी।
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-सुधीर राजपाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग।
सरकार का दावा, फरीदाबाद और हिसार में दिक्कत, 20 जिलों में इलाज चालू
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि निजी अस्पतालों में इलाज बंद नहीं हुआ है, केवल हिसार और फरीदाबाद में दिक्कत है, शेष 20 जिलों के अस्पतालों में मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। इन जिलों में 70 से 80 प्रतिशत तक मरीजों को दाखिल किए जाने की रिपोर्ट आ रही है।