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निराशाः जहां जिंदगी के 35 साल गुजार दिए, अब वहां ताला लगते देखेंगे, 35 कर्मियों का क्या होगा

Thu, 19 Sep 2019 03:32 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 19 Sep 2019 03:32 PM IST
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Government Printing Press Going to Close
प्रिटिंग प्रेस - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस में 265 नियमित जबकि 35 ठेका कर्मचारी काम कर रहे हैं। कुल स्टाफ में से 80 प्रतिशत कर्मचारी 55 साल से ज्यादा उम्र के हैं। कई तो ऐसे हैं जो अगले महीने या फिर जनवरी तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे अहम साल यहां गुजारे और अब उनकी आंखों के सामने ही 11 दिन बाद प्रेस बंद हो जाएगी। नम आंखें लिए टेक्निकल कर्मचारी यही सोच रहे हैं कि उम्र के इस पड़ाव में अब वह कैसे किसी और डिपार्टमेंट में समायोजित होंगे।
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गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस के बंद होने के बाद से प्रेस में काम लगभग ठप्प पड़ा है। कब, किस कर्मचारी का कहां ट्रांसफर हो जाएगा, इसी सोच में पूरा दिन गुजर रहा है। 35 साल से प्रेस में टेक्निकल काम कर रहे एक कर्मचारी ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सालों की मेहनत एक कागज के ऑर्डर के आते ही शून्य हो जाएगी। पूरी जिंदगी इन प्रिंटिंग मशीनों और कागजों के बीच गुजार दी। 35 साल के अनुभव के बाद अब मात्र देखने भर से कलरिंग आदि का अंदाजा लग जाता है।
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कंप्यूटर कभी चलाया नहीं लेकिन अब उन्हें किसी और डिपार्टमेंट में भेज दिया जाएगा। एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि जनवरी में रियारमेंट है और अगले महीने घर में शादी है। इस बीच प्रेस को बंद किया जा रहा है। ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हैं। पता नहीं कहां भेजेंगे। इन हालातों को देखते हुए कई कर्मचारियों ने कहा कि अब वह रिटायरमेंट लेने की सोच रहे हैं।
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जीएमएसएच-16 के 1 करोड़ कार्ड छापने का ऑर्डर पेंडिंग

प्रेस को अचानक बंद करने के फैसले से जीएमएसएच-16 को भी काफी असर पड़ने वाला है। जानकारी के मुताबिक, प्रेस के पास जीएमएसएच-16 के 1 करोड़ ओपीडी व अन्य कार्ड छापने के आर्डर मिले हैं। इसमें से 35 लाख कार्ड तो छप चुके हैं लेकिन 65 लाख कार्ड पेंडिंग में हैं। इसके अलावा शहर के सभी स्कूल बच्चों के रिपोर्ट कार्ड भी प्रेस से ही छपवाते हैं।

बुधवार को एक स्कूल अपने ऑर्डर की डिलीवरी लेने आया तो कार्ड खत्म होने की वजह से नहीं मिले। ऐसे में नए रिपोर्ड कार्ड छपेंगे या नहीं, इसको लेकर अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। स्कूलों में 30 सितंबर मिलने वाले रिपोर्ट कार्ड पर भी संकट गहरा गया है।

ग्रेड पे के आधार पर मिलने वाली नौकरी को लेकर चिंतित कर्मी
प्रेस के कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता रि-डिप्यूट करने के बाद मिलने वाली नौकरी को लेकर है। एक उदाहरण के साथ इसे समझते हैं। लंबी सर्विस के बाद बने सेक्शन इंचार्ज के अधीन करीब 15-20 लोग काम करते हैं। सेक्शन इंचार्ज की ग्रेड पे 3200 है, जो एक कलर्क के बराबर है। प्रशासन ग्रेड पे से मिलती नौकरी में ही कर्मचारियों को रि-डिप्यूट करने की बात कर रहा है। यानि सेक्शन इंचार्ज को अब कलर्क का काम करना पड़ेगा।

करोड़ों का फ्रेश कागज, वर्किंग मशीनों की होगी निलामी
प्रेस के पास अभी करोड़ों का काम पेंडिंग है। करीब ढाई करोड़ का काम तो सिर्फ बाइंडिंग में पड़ा है। कर्मचारियों का आरोप है कि अगर प्रशासन को प्रेस बंद ही करना था तो इसकी तैयारी पहले से करनी चाहिए थी। अचानक बंद करने के फैसले से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। इसी महीने फ्रेश कागज के 15 ट्रक आए हैं। कई मशीनें हाल ही में खरीदी गई हैं, जो करोड़ों की हैं। प्रशासन अब यह सभी कागज और मशीनें कबाड़ के भाव में बेचने की तैयारी में है।

 

कोई गाइडलाइन नहीं, कोई रोडमैप नहीं

प्रिंटिंग प्रेस में अभी भी स्कूलों व चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न डिपार्टमेंट्स से फ्रेश ऑर्डर आ रहे हैं। कर्मचारी अभी भी इस असमंजस की स्थिती में हैं कि उन्हें क्या करना है क्योंकि ऑर्डर लेना है या नहीं, पुराने ऑर्डर का निपटारा कैसे करना है। इसके लेकर कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। प्रेस के कर्मचारी ने बताया कि डिपार्टमेंट में कनफ्यूजन की वजह से बुधवार को भी उनके पास एक्स्ट्राऑडनरी गजट का काम आया।

ज्यादातर कर्मचारियों को मिल सकती है बस कंडक्टर की नौकरी
गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस में ज्यादातर कर्मचारी 2400 ग्रेड पे पर काम कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक प्रशासन ऐसे कर्मचारियों को सीटीयू में ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहा है। क्योंकि बस कंडक्टर की ग्रेड पे भी 2400 ही होती है, इसलिए माना जा रहा है कि इन्हें अब बस कंडक्टर का काम करना पड़ेगा।

एसी कमरे में बैठ कर प्रेस को बंद करने का फैसला ले लिया गया। किसी की नहीं सुनी गई। सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। प्रेस को बंद करना गलत फैसला है।
- दर्शन सिंह, सेक्रेटरी, गवर्नमेंट प्रेस यूनियन

किसी कर्मचारी से कोई फीडबैक नहीं लिया गया। बंद करना था तो पूरा प्रोसेस फॉलो करना चाहिए था। जो काम पेंडिंग में हैं, उन्हें पूरा करने का भी समय नहीं दिया गया है। करोड़ों का नुकसान हो रहा है। - सुरिंदर सिंह, प्रेसिडेंट, गवर्नमेंट प्रेस यूनियन

प्रेस हमारे लिए मां रही है। मेरे पिता ने इस प्रेस की कमाई से ही हमें पाला। हम अपने बच्चों को अब पाल रहे हैं। प्रेस के बंद होने से ऐसा लग रहा है कि हमारी मां छिन रही है।
- नरेश कोहली, जनरल फोरमैन

प्रेस को बंद करने से पहले सभी कर्मचारियों को चंडीगढ़ प्रशासन के दूसरे विभागों में शिफ्ट किया जाएगा। मशीनों और कागजों की निलामी की जाएगी। किसी कर्मचारी के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. अजय सिंगला, सेक्रेटरी, प्रिंटिंग और स्टेशनरी विभाग
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