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Hindi News ›   Chandigarh ›   Government is not coming forward to resolve Mohali Morcha on release of imprisoned Sikhs, Centre and Punjab should answer: High Court

बंदी सिखों की रिहाई पर मोहाली मोर्चा के हल के लिए आगे नहीं आ रही सरकार, जवाब दे केंद्र व पंजाब : हाईकोर्ट

Sat, 23 Aug 2025 12:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 12:01 AM IST
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Government is not coming forward to resolve Mohali Morcha on release of imprisoned Sikhs, Centre and Punjab should answer: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। मोहाली में बंदी सिखों की रिहाई के लिए चल रहे शांतिपूर्ण मोर्चा के प्रतिनिधियों से संवाद की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करके जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
इस याचिका में बताया गया कि ‘बंदी सिख’ उन कैदियों को कहा जाता है जिन्हें उग्रवादी गतिविधियों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन सजा पूरी करने के बाद भी वे जेलों में बंद हैं। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश रेमेश कुमारी की खंडपीठ ने यह नोटिस फिरोजपुर निवासी 39 वर्षीय सिमरनजीत सिंह ब्लासी की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जनवरी 2023 से मोहाली में शांतिपूर्ण मोर्चा चल रहा है, जिसमें सिख समुदाय के बुजुर्गों और युवाओं की भागीदारी है। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग बंदी सिखों की रिहाई है, जो अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेलों में कैद हैं। याचिका में कहा गया कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और अनुशासित है, लेकिन अब तक न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार ने उनसे कोई औपचारिक संवाद शुरू किया है।
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प्रतिदिन प्रदर्शनकारियों की शांतिपूर्ण मार्च को सचिवालय तक पहुंचने से पहले ही पुलिस रोक देती है। पक्षकार ने अदालत को बताया कि कई कैदी बुजुर्ग हो चुके हैं और उनके साथ यह अन्याय संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में अनुच्छेद 39ए का हवाला देते हुए कहा गया कि समान न्याय और मुफ्त विधिक सहायता देने की संवैधानिक व्यवस्था का पालन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि पंजाब सरकार का आंदोलनकारियों से संवाद न करना संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना और विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की जिम्मेदारी के विपरीत है। कोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही कहा कि मामला संवेदनशील है और इसे लेकर मीडिया के समक्ष न जाएं।
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