हरियाणा में लोगों को बड़ी राहत: सरकारी चिकित्सकों की हड़ताल वापस, मांगों पर बनी सहमति, आज से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहेंगी
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच हरियाणा के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने 14 जनवरी से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस ले लिया है। शुक्रवार से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहेंगी।
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हरियाणा के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक शुक्रवार से हड़ताल पर नहीं जाएंगे। सरकार के मांगें मानने पर चिकित्सकों ने हड़ताल वापस ले ली है। अब आपात सेवाएं व पोस्टमार्टम बंद नहीं होंगे। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद चिकित्सक माने। 14 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी के बाद एसीएस स्वास्थ्य राजीव अरोड़ा ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन को गुरुवार शाम सात बजे वार्ता के लिए बुलाया था। इसमें एसोसिएशन की सभी जिलों की कोर कमेटी और राज्य कमेटी के साथ पदाधिकारी राज्य प्रधान डॉ. जसबीर परमार की अगुवाई में बैठक में शामिल हुए।
एसीएस ने अपने कार्यालय में बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें महानिदेशक डॉ. वीणा सिंह भी मौजूद रहीं। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक में शामिल हुए। वार्ता के दौरान सहमति बनी कि डॉक्टरों की पीजी नीति अधिकतम दो हफ्ते में तैयार की जाएगी। इसमें तीन वर्ष का चिकित्सीय अनुभव होना जरूरी है।
डॉक्टरों को इसमें 40त्न कोटा मिलेगा। एसएमओ की सीधी भर्ती के संबंध में निर्णय को एक सप्ताह में अंतिम रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञ संवर्ग को सैद्धांतिक रूप से मुख्यमंत्री ने अनुमोदित किया है, उसे जल्द से जल्द अंतिम रूप सरकार देगी। सभी वित्तीय और कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
एसीएस स्वास्थ्य की उपस्थिति में अगले सप्ताह एसीएस वित्त के साथ एसीपी की चार बैठकें होंगी। डॉ. परमार ने बताया कि सरकार के निर्णयों को देखते हुए राज्य कोर कमेटी ने हड़ताल का आह्वान स्थगित कर दिया है। शुक्रवार से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहेंगी।
कोरोना में चिकित्सकों की बहुत अहम भूमिका: विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि कोरोना की वर्तमान स्थिति में समाज में चिकित्सकों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। चिकित्सकों की मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा। वे पूरी तन्मयता के साथ अपनी ड्यूटी निभाएं। उनके साथ हुए हर वादे को लागू करने का पत्र निर्धारित अवधि में जारी होगा।
सरकार को अपनाना पड़ा नरम रुख
चिकित्सकों के रुख को देखते हुए सरकार को नरम रवैया अपनाना पड़ा। अगर कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच चिकित्सक ओपीडी के साथ आपात सेवाएं व पोस्टमार्टम बंद करते तो गंभीर संकट खड़ा हो जाता। स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर जातीं। चूंकि, एस्मा लागू करने के बाद चिकित्सक गुस्सा गए थे।