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Farmers Protest: पंजाब को एमएसपी का पूरा लाभ, मेघालय के बाद सबसे अमीर हैं सूबे के अन्नदाता... फिर आंदोलन क्यों
Sat, 17 Feb 2024 12:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 17 Feb 2024 12:55 PM IST
सार
Kisan Andolan Demands: धान व गेहूं की खरीद एमएसपी पर होने के कारण पूरे देश में पंजाब के किसान आज भी अमीर हैं। नाबार्ड की ओर से देश के 29 राज्यों में कराए गए एक सर्वे में सामने आया था कि पंजाब में किसानों के प्रति परिवार की मासिक आय 23,133 रुपये है। वहीं देश में यूपी सबसे गरीब है जहां प्रति परिवार मासिक आय मात्र 6668 रुपये है।
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किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Farmers Protest News: किसानों ने अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर 13 फरवरी से आंदोलन कर रखा है और मुख्य मांग एमएसपी पर कानून बनाने की है। हालांकि पंजाब में मुख्य फसल गेहूं व धान ही है, जिसमें से सरकारी एजेंसियां पहले से 97 फीसदी धान एमएसपी पर खरीद रही हैं जबकि 80 फीसदी गेहूं की खरीद भी सरकार द्वारा की जा रही है।
पंजाब में उगने वाली उत्तम किस्म की बासमती मुंह मांगे दाम पर किसान बेच रहे हैं, जिसको निर्यात किया जा रहा है। विशेषज्ञों का तर्क है कि पंजाब के किसान तो पहले से एमएसपी का फायदा ले रहे हैं। इसी कारण पूरे देश में मेघालय के बाद पंजाब के किसान अमीर हैं।
सरकारी रिपोर्ट की मानें तो भारत में 6 फीसदी को एमएसपी मिलता है, 94 को नहीं मिलता है और उन 6 फीसदी किसानों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं। पंजाब में उपजाए गए लगभग 97 प्रतिशत धान और लगभग 75-80 फीसदी गेहूं को सरकार द्वारा खरीदा जाता है।वहीं दूसरी तरफ बिहार में 1 प्रतिशत और यूपी में 7 फीसदी से कम धान और गेहूं की सरकारी खरीद होती है। राजस्थान सरकार द्वारा 4 फीसदी के आसपास गेहूं खरीदा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, 344.86 लाख मीट्रिक टन धान के बदले केंद्र सरकार ने अलग अलग राज्यों के लगभग 35 लाख किसानों को 65.111 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इस 35 लाख किसानों में से पंजाब का योगदान 59 प्रतिशत था।
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सरकार बाकी फसलों को प्रोत्साहित कर रही है तो गारंटी भी देनी होगी : कोकरीकलां
किसान नेता सुखदेव सिंह कोकरीकलां का कहना है कि हरियाणा और पंजाब सरकारें अधिक पानी की खपत करने वाली धान की फसल से विविधता लाने और धान-गेहूं चक्र को तोड़ने के लिए मक्का, कपास, सूरजमुखी और मूंग जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही हैं। लेकिन इन फसलों की कीमतें सही न मिलने के कारण सरकारों का फसल विविधीकरण योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं। सरकार के झांसे में आकर हम फसलें तो उगा लेते हैं लेकिन काफी कम दाम पर बाजार में बिकती है। मसलन, सूरजमुखी के बीज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाए, जो 6,400 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों को खुले बाजार में 4,000 से लेकर 5,000 रुपए प्रति क्विंटल कीमत ही मिली। हमारी फसलें एमएसपी से भी कम भाव पर बिकी।
मक्के की कीमत 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरी
पंजाब में मक्के की कीमतें लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं। 2022-23 के लिए घोषित एमएसपी 1,962 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम है। हरियाणा में भी कीमतें एमएसपी से 50 फीसदी नीचे गिर गई हैं और किसानों को भारी नुकसान हुआ। इसी तरह मूंग के लिए 7,755 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की घोषणा की गई, लेकिन किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 6,000 रुपए ही मिल रहे थे। दरअसल, दूसरी फसलों की कम कीमत मिलना एक बड़ा कारण है, जिसके चलते किसान गेहूं-धान से अपना ध्यान नहीं हटाता। क्योंकि इनमें सुनिश्चित और बेहतर रिटर्न मिलता है।
सरकार तो हर साल, सरकार विभिन्न फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है, लेकिन प्रभावी रूप से धान व गेहूं और कभी-कभी सोयाबीन जैसी केवल दो या तीन फसलें ही सरकार द्वारा घोषित कीमतों पर खरीदी जाती हैं। बाकी निजी व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है, जिनके पास एमएसपी या उससे ऊपर खरीदने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। इसलिए हम कानून व गारंटी मांग रहे हैं। चावल की बजाय 100,000 हेक्टेयर से मक्की खरीदने के लिए पंजाब में 89.35 करोड़ रुपये और हरियाणा में 24.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
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पंजाब में उगने वाली उत्तम किस्म की बासमती मुंह मांगे दाम पर किसान बेच रहे हैं, जिसको निर्यात किया जा रहा है। विशेषज्ञों का तर्क है कि पंजाब के किसान तो पहले से एमएसपी का फायदा ले रहे हैं। इसी कारण पूरे देश में मेघालय के बाद पंजाब के किसान अमीर हैं।
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सरकारी रिपोर्ट की मानें तो भारत में 6 फीसदी को एमएसपी मिलता है, 94 को नहीं मिलता है और उन 6 फीसदी किसानों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं। पंजाब में उपजाए गए लगभग 97 प्रतिशत धान और लगभग 75-80 फीसदी गेहूं को सरकार द्वारा खरीदा जाता है।वहीं दूसरी तरफ बिहार में 1 प्रतिशत और यूपी में 7 फीसदी से कम धान और गेहूं की सरकारी खरीद होती है। राजस्थान सरकार द्वारा 4 फीसदी के आसपास गेहूं खरीदा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, 344.86 लाख मीट्रिक टन धान के बदले केंद्र सरकार ने अलग अलग राज्यों के लगभग 35 लाख किसानों को 65.111 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इस 35 लाख किसानों में से पंजाब का योगदान 59 प्रतिशत था।
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सरकार बाकी फसलों को प्रोत्साहित कर रही है तो गारंटी भी देनी होगी : कोकरीकलां
किसान नेता सुखदेव सिंह कोकरीकलां का कहना है कि हरियाणा और पंजाब सरकारें अधिक पानी की खपत करने वाली धान की फसल से विविधता लाने और धान-गेहूं चक्र को तोड़ने के लिए मक्का, कपास, सूरजमुखी और मूंग जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही हैं। लेकिन इन फसलों की कीमतें सही न मिलने के कारण सरकारों का फसल विविधीकरण योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं। सरकार के झांसे में आकर हम फसलें तो उगा लेते हैं लेकिन काफी कम दाम पर बाजार में बिकती है। मसलन, सूरजमुखी के बीज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाए, जो 6,400 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों को खुले बाजार में 4,000 से लेकर 5,000 रुपए प्रति क्विंटल कीमत ही मिली। हमारी फसलें एमएसपी से भी कम भाव पर बिकी।
मक्के की कीमत 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरी
पंजाब में मक्के की कीमतें लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं। 2022-23 के लिए घोषित एमएसपी 1,962 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम है। हरियाणा में भी कीमतें एमएसपी से 50 फीसदी नीचे गिर गई हैं और किसानों को भारी नुकसान हुआ। इसी तरह मूंग के लिए 7,755 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की घोषणा की गई, लेकिन किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 6,000 रुपए ही मिल रहे थे। दरअसल, दूसरी फसलों की कम कीमत मिलना एक बड़ा कारण है, जिसके चलते किसान गेहूं-धान से अपना ध्यान नहीं हटाता। क्योंकि इनमें सुनिश्चित और बेहतर रिटर्न मिलता है।
सरकार तो हर साल, सरकार विभिन्न फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है, लेकिन प्रभावी रूप से धान व गेहूं और कभी-कभी सोयाबीन जैसी केवल दो या तीन फसलें ही सरकार द्वारा घोषित कीमतों पर खरीदी जाती हैं। बाकी निजी व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है, जिनके पास एमएसपी या उससे ऊपर खरीदने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। इसलिए हम कानून व गारंटी मांग रहे हैं। चावल की बजाय 100,000 हेक्टेयर से मक्की खरीदने के लिए पंजाब में 89.35 करोड़ रुपये और हरियाणा में 24.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।