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सरकार की कड़ी कार्रवाई पर बिफरे डाक्टर

Tue, 25 Nov 2014 10:18 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना Updated Tue, 25 Nov 2014 10:18 PM IST
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सिविल अस्पताल के नवनिर्मित मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में दो दिन में छह बच्चों की मौत के बाद सेहत विभाग की कार्रवाई पर सरकारी डॉक्टर भड़क गए हैं।
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पीसीएमएस डॉक्टरों ने मंगलवार को अस्पताल में बैठक करके सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। डॉक्टरों ने साफ किया है कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार ने डॉ. अलका मित्तल का सस्पेंशन और एसएमओ डॉ. आरके करकरा का तबादला वापस न लिया तो सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने भी सारे मामले की तह तक जाने के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में गायनी, पीडियाट्रिक, मेडिसिन के डॉक्टर और सर्जन शामिल होंगे।



सिविल अस्पताल में तैनात डॉ. अविनाश जिंदल और उनके साथियों ने प्रेस कंाफ्रेंस कर कहा कि अगर डॉ. अलका और आरके करकरा पर दिए आदेशों को वापस न लिया गया तो शुक्रवार से कोई भी मरीज नहीं देखा जाएगा। शनिवार को जिला स्तरीय और फिर सभी जिलों में हड़ताल की जाएगी। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार ने शार्टकट इंक्वायरी कर एक्शन लिया है जो गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि लोग पेट में पल रहे बच्चे का चेकअप नहीं करवाते हैं। लास्ट स्टेज में जब बड़े अस्पताल तक के डॉक्टर आपरेशन से मना कर देते हैं तो वह सिविल अस्पताल में आ जाते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों, दर्जा चार और सिक्योरिटी के साथ-साथ मानिटर, इक्यूपमेंट और वेंटिलेटर की भी बहुत कमी है। इसके लिए सरकार को कई बार लिखित रूप में भी दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी सुनवाई नहीं की गई है।
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कहीं हमारी नौकरी न चली जाए
डाक्टरों ने कहा कि इतने लंबे समय से डर कर कार्य कर रहे हैं। सरकार अस्पताल में पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया नहीं करा रही है। अब तक आवाज को इसलिए नहीं उठाया गया क्योंकि नौकरी का डर था। डर था कि कहीं ट्रांसफर दूर न कर दे। आज मजबूर होकर प्रदर्शन पर उतारू होना पड़ा है।
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नहीं है नर्सरी बैकअप
डॉक्टरों ने कहा कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसे नर्सरी बैकअप में भेजा जाता है। अस्पताल में नर्सरी बैकअप न होने के कारण सीएमसी के नर्सरी बैकअप में रेफर किया जाता था। ये ऐलान सरकार ने अपनी कर्मियों को देखते हुए किया था। लेकिन सरकार ने इस डील को भी पिछले दिनों में खत्म कर दिया। अब ऐसे में बिना सुविधा के डाक्टर भी क्या कर सकते हैं।

कई जगहों पर नहीं हैं गायनोकोलोजिस्ट
डॉ. जिंदल ने कहा कि आसपास समराला, साहनेवाल, कुमकलां, मलोद, ढेहलो, पखोवाल, सिंधवावेट और हठूर आदि में कोई भी महिला रोगों की डॉक्टर नहीं है। इस कारण वहां पर आए केसों को सिविल अस्पताल में भेज दिया जाता है। जिसका सारा दबाव डॉक्टरों पर पड़ता है।

क्या जल्दी थी विंग खोलने की
सिविल अस्पताल में स्टाफ और अन्य कमियों के बारे में उच्चाधिकारियों को भी कई बार कहा जा चुका है। पहले अस्पताल में कमियां अभी पूरी नहीं की गई और नया जच्चा बच्चा विंग खोल दिया गया। जिसमें 100 बैड लगाए गए और डॉक्टर सिर्फ तीन हैं।

डॉ. मित्तल ने किया आरोपों को खारिज
निलंबित डॉ. अलका ने मंगलवार को कहा कि वह करीब 48 घंटे से ड्यूटी कर रही थी। फिर भी उन पर लापरवाही का आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जसविंदर कौर की डिलीवरी स्टाफ नर्स ने की थी, जिसे सरकार ने अथारिटी दे रखी है। सर्बजीत कौर साढ़े सात माह से गर्भवती थी, उसकी बच्चेदानी में पानी भर गया था। उसे अच्छे सेंटर में जाने के लिए सलाह दी गई थी, लेकिन वह नहीं मानी। उन्होंने कहा कि 23 नवंबर को आई रीना के पेट में पल रहे बच्चे के मुंह में पोटी चली गई थी, ऐसे में मां को बचाना जरूरी था। वेंटिलेटर न होने की वजह से उसे सीएमसी अस्पताल जाने को कहा था, लेकिन वह नहीं गई। जिस कारण बच्चे की मौत हुई थी। ऐसे ही 20 नवंबर को आई वंदना ने उन्हें लिखकर दे दिया था। फिर वह घर चली गई और फिर लौट आई। मंजीत कौर भी उनके पास 23 नवंबर को आई थी। उसे बहुत ब्लीडिंग हो रही थी। ऐसे में बच्चा सिकुड़ गया।

आउटस्टैंडिग अवार्ड से सम्मानित है डॉ. अलका
डॉ. अलका को लगातार अच्छा कार्य करने के लिए मार्च 2012 में आउटस्टेंडिंग परफार्मेंस के लिए अवार्ड दिया जा चुका है। अलका ने कहा कि एक तरफ तो सरकार उन्हें अवार्ड दे रही है और दूसरी तरफ उन्हें सस्पेंड किया जा रहा है। कोई भी उनकी ओर से किए गए काम की प्रशंसा नहीं कर रहा।

एसएमओ को नहीं मिला कोई नोटिस
नवजात बच्चों की मौत के मामले में एसएमओ को भी ट्रांसफर किया गया है। एसएमओ डॉ. आरके करकरा ने कहा कि उन्हें इस बारे में अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि दो डॉक्टरों रेणु और मंदीप को रखा गया है। अब 4 डाक्टर अस्पताल में हो गए हैं। इसके अलावा अन्य कमियों को भी धीरे धीरे पूरा किया जा रहा है।


मरीज आज भी रहे परेशान
जच्चा-बच्चा विंग में गर्भवती महिलाएं इलाज करवाने के लिए पहुंची। जहां कई घंटे खड़े रहने के बाद डॉक्टर ने उनका चेकअप किया। सिविल अस्पताल में डॉक्टर की कमी के कारण मरीजों की लंबी लाइन लग गई। मरीज मनजीत कौर ने बताया कि वह सुबह 9 बजे चेकअप के लिए आई थी। कभी लाइन एक तरफ कर देते तो कभी डॉक्टर चली जाती। एक बजे उनका नंबर आया। वहीं रेनु शर्मा ने कहा कि वह सुबह 8:30 बजे से लाइन में लगी है। 2 बजे के करीब उसका नंबर आया है।
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